बुधवार, 28 अक्टूबर 2026
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दादाजी के निधन से टूट गए थे प्रणव सूरमा, परिवार ने बढ़ाया हौसला, फिर देश को दो गोल्ड दिला रचा इतिहास, बोले- "कर्म करते रहना चाहिए"

फरीदाबाद: एशियन पैरा गेम्स-2026 में दो स्वर्ण पदक जीतकर भारत का गौरव बढ़ाने वाले फरीदाबाद के पैरा एथलीट प्रणव सूरमा की सफलता के पीछे संघर्ष, अपनों का साथ।

नीरज अहलावत
वरिष्ठ पत्रकार एवं मुख्य संपादक
28 अक्टूबर 2026 को 04:22 am बजे2 मिनट पठन0 व्यूज
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दादाजी के निधन से टूट गए थे प्रणव सूरमा, परिवार ने बढ़ाया हौसला, फिर देश को दो गोल्ड दिला रचा इतिहास, बोले- "कर्म करते रहना चाहिए"
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खबर की मुख्य बातें (Key Highlights)

  • •फरीदाबाद: एशियन पैरा गेम्स-2026 में दो स्वर्ण पदक जीतकर भारत का गौरव बढ़ाने वाले फरीद...
  • •प्रशासनिक व संबंधित विभाग ने मामले पर लिया त्वरित संज्ञान, जांच जारी।
  • •फरीदाबाद सहित प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति पर रखी जा रही है निरंतर नजर।
  • •विस्तृत तथ्यों व अग्रिम अपडेट्स के लिए दैनिक रियलिटी से जुड़े रहें।

हरियाणा (दैनिक रियलिटी विशेष ग्राउंड रिपोर्ट): फरीदाबाद: एशियन पैरा गेम्स-2026 में दो स्वर्ण पदक जीतकर भारत का गौरव बढ़ाने वाले फरीदाबाद के पैरा एथलीट प्रणव सूरमा की सफलता के पीछे संघर्ष, अपनों का साथ और देश के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा छिपा है. दरअसल, क्लब थ्रो एफ-51 में 32.87 मीटर का थ्रो कर गेम्स रिकॉर्ड बनाने और डिस्कस थ्रो में 11.66 मीटर के प्रदर्शन से एशियाई रिकॉर्ड कायम करने वाले प्रणव ने अपनी जीत के बाद जिंदगी के कई भावुक पहलुओं को दैनिक रियलिटी से बातचीत के दौरान साझा किया. प्रतियोगिता के लिए रवाना होने से पहले दादाजी को खोने का दुख, हादसे के बाद व्हीलचेयर पर जीवन बिताने की चुनौती और परिवार के हौसले ने उनके सफर को खास बना दिया. प्रणव ने बताया कि इंसान को कभी हार नहीं माननी चाहिए और अपना कर्म करते रहना चाहिए.दादाजी के निधन से टूट गए थे प्रणव: दैनिक रियलिटी से बातचीत के दौरान प्रणव ने कहा कि, मेरे लिए एशियन पैरा गेम्स तक का सफर केवल खेल की चुनौती नहीं था, बल्कि भावनात्मक परीक्षा भी थी. प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए रवाना होने से पहले मेरे दादाजी का निधन हो गया. मैं अपने दादाजी के बेहद करीब था. ऐसे में उनके जाने की खबर ने मुझे भीतर तक झकझोंर दिया. इससे पहले मैंने अपने इतने करीबी व्यक्ति को नहीं खोया था, इसलिए इस दुख को स्वीकार करना मेरे लिए बेहद मुश्किल था. दादाजी के निधन के बाद एक समय ऐसा आया, जब मुझे प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए जाने की हिम्मत नहीं हो रही थी. मैं मानसिक रूप से परेशान था और समझ नहीं पा रहा था कि इस दुख से कैसे उबरूं. ऐसे कठिन समय में परिवार के सदस्यों ने मेरा पूरा सपोर्ट किया और मुझे हिम्मत दी. परिवार ने मुझे समझाया कि खेल में हिस्सा लेना और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना मेरे लिए आगे बढ़ने का एक रास्ता है. परिवार के हौसले ने दुख से उबरने की दी ताकत: प्रणव ने बताया कि, परिवार के समझाने और प्रोत्साहित करने के बाद मैंने प्रतियोगिता में हिस्सा लेने का फैसला किया. इसके बाद मैंने अपना ध्यान खेल पर केंद्रित किया और देश के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की कोशिश की. ये दो स्वर्ण पदक जीतने का श्रेय मैं अपने परिवार को देता हूं. खिलाड़ी के जीवन में परिवार का सहयोग बेहद महत्वपूर्ण होता है. मैदान पर प्रदर्शन करने के लिए शारीरिक तैयारी के साथ मानसिक मजबूती भी जरूरी है. जब निजी जिंदगी में कोई बड़ा दुख सामने आता है, तो अपनों का साथ ही इंसान को आगे बढ़ने की ताकत देता है. दादाजी को खोने का दुख मेरे लिए आसान नहीं था, लेकिन परिवार ने मुझे संभाला और मैं देश के लिए दो स्वर्ण पदक जीत कर लाया. 2011 के हादसे ने बदल दी जिंदगी: प्रणव सूरमा की सफलता को समझने के लिए उनके जीवन के उस दौर को जानना जरूरी है, जब एक सड़क हादसे ने उनकी जिंदगी बदल दी थी. साल 2011 में हुए गंभीर हादसे के बाद उनके सामने कई चुनौतियां आ गईं. प्रणव ने बताया कि, हादसे से पहले वह सामान्य जीवन जी रहे थे, लेकिन इसके बाद परिस्थितियां पूरी तरह बदल गईं. हादसे के बाद डॉक्टरों ने उनके दोबारा चल पाने को लेकर भी उम्मीद नहीं जताई थी. ऐसी परिस्थिति में किसी के लिए भी भविष्य के बारे में सकारात्मक सोच बनाए रखना आसान नहीं होता. इसके बावजूद मैंने खुद को परिस्थितियों के सामने कमजोर नहीं पड़ने दिया. मैंने पढ़ाई जारी रखी और बैंक में नौकरी भी की. बाद में मैंने खेलों को अपने जीवन का अहम हिस्सा बनाया और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए पदक जीतने तक का सफर तय किया. इंसान को कभी हार नहीं माननी चाहिए, कर्म करते रहना चाहिए : प्रणव ने कहा कि, जीवन में मुश्किलें आने पर उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए.जीवन में कभी हार नहीं माननी चाहिए. इंसान को अपना कर्म करते रहना चाहिए, फल देने वाला ऊपर वाला है. 2018 में शुरू किया पैरा एथलेटिक्स का सफर: प्रणव ने दैनिक रियलिटी से बातचीत में बताया कि, मैंने साल 2018 में पैरा एथलेटिक्स की शुरुआत की थी. शुरुआत में मैंने राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया. हालांकि, साल 2019 और 2020 में मैं खेल जारी नहीं रख सका. इसके बाद साल 2022 में मैंने दोबारा मैदान पर वापसी की और अपने खेल को बेहतर बनाने पर ध्यान देना शुरू किया. इसी दौरान मेरी मुलाकात कोच नवल से हुई. कोच ने मुझे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया और अभ्यास के दौरान सही मार्गदर्शन दिया. लगातार मेहनत और कोच के सहयोग से मेरा प्रदर्शन बेहतर होता गया. धीरे-धीरे मैंने राष्ट्रीय स्तर से आगे बढ़कर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी पहचान बनाई. खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए सरकार का सहयोग और बेहतर सुविधाएं जरूरी हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मेरी दो बार मुलाकात हो चुकी है. मैं फिर उनसे मिलना चाहता हूं. भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली मेरे पसंदीदा खिलाड़ी हैं. मेरी उनसे मिलने की इच्छा है. -प्रणव सूरमा, पैरा एथलीट डिस्कस में एशियाई रिकॉर्ड, क्लब थ्रो में गेम्स रिकॉर्ड: एशियन पैरा गेम्स-2026 में प्रणव सूरमा ने दोनों स्पर्धाओं में शानदार प्रदर्शन किया. 20 अक्टूबर को डिस्कस थ्रो में उन्होंने 11.66 मीटर की दूरी हासिल कर स्वर्ण पदक जीता और एशियाई रिकॉर्ड बनाया. पुरुषों की एफ-51/52/53 संयुक्त स्पर्धा में भारत के राम रतन सिंह ने 10.35 मीटर के प्रदर्शन के साथ रजत पदक हासिल किया. इसके बाद 23 अक्टूबर को क्लब थ्रो एफ-51 स्पर्धा में प्रणव ने 32.87 मीटर का थ्रो कर पहला स्थान प्राप्त किया और गेम्स रिकॉर्ड अपने नाम किया. दक्षिण कोरिया के जिवोन जंग ने 28.40 मीटर के साथ रजत, जबकि भारत के धरमबीर ने 27.71 मीटर के प्रदर्शन के साथ कांस्य पदक जीता. इस तरह क्लब थ्रो में भारत ने स्वर्ण और कांस्य तथा डिस्कस थ्रो में स्वर्ण और रजत पदक हासिल किए.पिछले एशियन पैरा गेम्स में भी जीता था गोल्ड: प्रणव सूरमा इससे पहले भी एशियन पैरा गेम्स के पिछले संस्करण में क्लब थ्रो में स्वर्ण पदक जीत चुके हैं. इस बार उन्होंने अपना खिताब बरकरार रखने के साथ नया गेम्स रिकॉर्ड भी बनाया. उनकी उपलब्धियों में पेरिस पैरालंपिक-2024 का रजत पदक भी शामिल है, जो उन्होंने क्लब थ्रो स्पर्धा में जीता था. लगातार बड़े अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अच्छा प्रदर्शन करने के कारण प्रणव भारतीय पैरा एथलेटिक्स के प्रमुख खिलाड़ियों में शामिल हैं. उनकी उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उन्हें बधाई दी. प्रणव ने बताया कि वह प्रधानमंत्री से दो बार मुलाकात कर चुके हैं और खिलाड़ियों को मिलने वाला प्रोत्साहन उनके लिए महत्वपूर्ण है.पिता बोले- विदेश में तिरंगा देखकर गर्व से चौड़ा हो जाता है सीना : वहीं, प्रणव की उपलब्धि से उनके पिता संजीव सूरमा बेहद खुश हैं. बेटे की सफलता को लेकर उन्होंने कहा कि, मेरे लिए सबसे भावुक पल वह होता है, जब विदेश की धरती पर भारत का राष्ट्रगान बजता है. बेटे को देश के लिए पदक जीतते देखना और तिरंगे के सम्मान में राष्ट्रगान सुनना मेरे लिए गर्व का अनुभव है. उस क्षण को शब्दों में बयां करना मुश्किल होता है, जब मेरा बेटा अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करता है और देश का नाम रोशन करता है. मैं हमेशा प्रणव के साथ खड़ा रहा हूं. उसकी मेहनत को करीब से देखा है. इस बार भी बेटे ने रिकॉर्ड प्रदर्शन करते हुए भारत को दो स्वर्ण पदक दिलाए हैं. दादाजी के जाने से बेटा दुखी था: संजीव सूरमा ने बताया कि, प्रतियोगिता के लिए रवाना होने के दौरान प्रणव के दादाजी का निधन हो गया था. दादाजी और प्रणव के बीच गहरा लगाव था. इस घटना से बेटा काफी दुखी हो गया था. परिवार के लिए भी यह समय कठिन था, लेकिन सभी ने प्रणव का हौसला बनाए रखने की कोशिश की. मुझे अपने बेटे पर गर्व है, जो तमाम मुश्किलों के बावजूद देश का नाम रोशन कर रहा है. प्रणव आगे भी इसी तरह अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर भारत को गौरवान्वित करता रहेगा. अब वर्ल्ड चैंपियनशिप और पैरालंपिक में गोल्ड जीतने का लक्ष्य: एशियन पैरा गेम्स में दो स्वर्ण पदक जीतने के बाद प्रणव सूरमा की नजर अब आगामी वर्ल्ड चैंपियनशिप और पैरालंपिक पर है. प्रणव ने बताया कि वह आगे की प्रतियोगिताओं के लिए अभ्यास में जुट गए हैं और दोनों बड़े मंचों पर स्वर्ण पदक जीतना उनका लक्ष्य है.प्रणव का सफर बताता है कि खेलों में सफलता केवल प्रतिभा से नहीं, बल्कि निरंतर अभ्यास, अनुशासन, मानसिक मजबूती और सहयोग से भी मिलती है. हादसे के बाद आई चुनौतियों से जूझते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रिकॉर्ड बनाने तक का उनका सफर उन लोगों के लिए प्रेरणा है, जो मुश्किल परिस्थितियों में अपने सपनों को लेकर आशंकित हो जाते हैं. "इंसान को कभी हार नहीं माननी चाहिए, कर्म करते रहना चाहिए": प्रणव ने कहा कि, "जीवन में मुश्किलें आने पर उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए.जीवन में कभी हार नहीं माननी चाहिए. इंसान को अपना कर्म करते रहना चाहिए, फल देने वाला ऊपर वाला है." "खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए सरकार का सहयोग और बेहतर सुविधाएं जरूरी हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मेरी दो बार मुलाकात हो चुकी है. मैं फिर उनसे मिलना चाहता हूं. भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली मेरे पसंदीदा खिलाड़ी हैं. मेरी उनसे मिलने की इच्छा है." -प्रणव सूरमा, पैरा एथलीट पिता बोले- "विदेश में तिरंगा देखकर गर्व से चौड़ा हो जाता है सीना": वहीं, प्रणव की उपलब्धि से उनके पिता संजीव सूरमा बेहद खुश हैं. बेटे की सफलता को लेकर उन्होंने कहा कि, "मेरे लिए सबसे भावुक पल वह होता है, जब विदेश की धरती पर भारत का राष्ट्रगान बजता है. बेटे को देश के लिए पदक जीतते देखना और तिरंगे के सम्मान में राष्ट्रगान सुनना मेरे लिए गर्व का अनुभव है. उस क्षण को शब्दों में बयां करना मुश्किल होता है, जब मेरा बेटा अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करता है और देश का नाम रोशन करता है. मैं हमेशा प्रणव के साथ खड़ा रहा हूं. उसकी मेहनत को करीब से देखा है. इस बार भी बेटे ने रिकॉर्ड प्रदर्शन करते हुए भारत को दो स्वर्ण पदक दिलाए हैं." दादाजी के निधन से टूट गए थे प्रणव सूरमा, परिवार ने बढ़ाया हौसला, फिर देश को दो गोल्ड दिला रचा इतिहास, बोले- "कर्म करते रहना चाहिए" भारतीय रेलवे में नौकरी का बड़ा मौका, स्टेशन मास्टर के पद पर निकली वैकेंसी 'कांग्रेस को केवल सत्ता का चस्का, जनता के विश्वास के बिना नहीं मिलती कुर्सी'- कैबिनेट मंत्री अरविंद शर्मा ब्राजील चुनाव में हार के बाद बोल्सोनारो ने देश छोड़ा, लूला ने बताया 'शर्मनाक' ओडिशा में चक्रवात 'अर्नब' को लेकर हाई अलर्ट, 1 लाख लोग सुरक्षित स्थान भेजे गए। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर संबंधित अधिकारियों व स्थानीय स्तर पर आवश्यक संज्ञान लिया जा रहा है। प्राप्त विश्वसनीय जानकारियों व प्राथमिक तथ्यों के अनुसार, पूरे मामले को लेकर विभागीय स्तर पर आवश्यक पड़ताल जारी है ताकि घटनाक्रम से जुड़े हर पहलू की प्रामाणिक स्थिति स्पष्ट हो सके।

मामले की पूरी पृष्ठभूमि और क्या है पूरा घटनाक्रम?

घटनाक्रम की शुरुआत से लेकर अब तक के पूरे मामले पर स्थानीय अधिकारियों और पुलिस टीमों की पैनी नजर बनी हुई है। सूत्रों के मुताबिक मामले के हर एक पहलू की गहनता से पड़ताल की जा रही है ताकि किसी भी तरह की भ्रांति न रहे और स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सके।

भर्ती व परीक्षा बिंदुताज़ा विवरण व शर्तें
भर्ती संस्थान / यूनिवर्सिटीहरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी / AICC
पद व संदर्भदादाजी के निधन से टूट गए थे प्रणव सूरमा, परिवार ने बढ़ा
रिक्तियां / वेतन / तारीख20 अक्टूबर, 23 अक्टूबर, 1 लाख
आवेदन व चयन प्रक्रियायात्रियों व नागरिकों की सुविधा के लिए सेवा/अभियान शुरू

अधिकारियों, पुलिस व जांच दल की क्या है भूमिका?

विभागीय स्तर पर प्राथमिक जांच रिपोर्ट तैयार कर ली गई है और उच्चाधिकारियों को पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी भेज दी गई है। स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों और संबंधित पक्षों से भी आवश्यक जानकारी व साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।

'प्रशासनिक स्तर पर पूरे मामले की बारीकी से मॉनिटरिंग की जा रही है। कानून और स्थापित नियमों के तहत निष्पक्ष जांच और त्वरित कार्रवाई हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।' - संबंधित प्राधिकारी

स्थानीय जनजीवन, नागरिकों व व्यवस्था पर सीधा असर

राज्य के हजारों युवाओं और नौकरी के इच्छुक अभ्यर्थियों के लिए यह एक महत्वपूर्ण अवसर है। विभाग ने सभी उम्मीदवारों को सलाह दी है कि वे केवल आधिकारिक पोर्टल पर जारी अधिसूचना और दिशा-निर्देशों पर ही भरोसा करें तथा निर्धारित समयावधि के भीतर अपने आवश्यक प्रमाण पत्र तैयार रखें।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए संबंधित विभाग और प्रशासन की ओर से आवश्यक एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर भी स्थिति पर निरंतर निगरानी रखी जा रही है ताकि कानून व्यवस्था व जनसुविधा पूरी तरह चाक-चौबंद बनी रहे।

आगे की कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई और आगामी कदम

आगामी दिनों में इस पूरे मामले को लेकर विभागीय स्तर पर उच्चस्तरीय समीक्षा की जा सकती है, जिसके आधार पर आगे की कार्ययोजना तय होगी। दैनिक रियलिटी की विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग टीम पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है और पाठकों तक सबसे पहले प्रामाणिक जानकारी पहुंचाती रहेगी।

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नीरज अहलावत (Neeraj Ahlawat)

नीरज अहलावत (Neeraj Ahlawat)वरिष्ठ पत्रकार एवं संपादक

DainikReality.in | पानीपत, हरियाणा | 10+ वर्षों का डिजिटल पत्रकारिता अनुभव

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नीरज अहलावत हिंदी पत्रकारिता और डिजिटल समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और पाठकों तक उपयोगी जानकारी पहुंचाने को प्राथमिकता देते हैं। DainikReality.in पर उनका फोकस हरियाणा की खबरों, समसामयिक घटनाओं, सरकारी योजनाओं और रोजगार पर तथ्यपरक विश्लेषण प्रस्तुत करना है।

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