फरीदाबाद के प्रतिष्ठित बीके सिविल अस्पताल में एक चौंकाने वाला वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है, जहां महीनों से निष्क्रिय खड़ी चार एम्बुलेंसों के नाम पर कथित तौर पर लगभग 50 लाख रुपये का डीजल खरीदा गया। इस गंभीर घोटाले का खुलासा तब हुआ जब पंचकूला स्थित मुख्यालय ने एम्बुलेंसों के फ्यूल कार्ड लेनदेन की गहन जांच की। मामले की गंभीरता को देखते हुए, सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 20 अक्टूबर को एक उच्च-स्तरीय जांच कमेटी का गठन किया है, जिसे 15 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।
यह घोटाला सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। जांच में सामने आया है कि जिन एम्बुलेंसों के लिए लाखों रुपये का ईंधन खरीदा गया, वे अपनी निर्धारित पार्किंग या वर्कशॉप से हिली तक नहीं थीं। इस धोखाधड़ी में शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी की जा रही है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
घटना का पूरा विवरण और सिलसिलेवार घटनाक्रम
विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस पूरे मामले की परतें तब खुलीं जब पंचकूला मुख्यालय ने एम्बुलेंसों में उपयोग होने वाले फ्यूल कार्ड के माध्यम से होने वाले लेनदेन का एक विस्तृत ऑडिट किया। इस जांच के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि कई एम्बुलेंस, जो वास्तव में निष्क्रिय पड़ी थीं, उनके नाम पर नियमित रूप से पेट्रोल पंपों से डीजल खरीदा जा रहा था। यह सिलसिला एक-दो बार नहीं, बल्कि लगातार कई महीनों तक जारी रहा, जिससे अनुमानित तौर पर 50 लाख रुपये का ईंधन खरीदा गया।
विशेष रूप से, HR38GV3491 और HR38GV9863 नंबर की दो एम्बुलेंस पिछले तीन से चार महीनों से अस्पताल की मोर्चरी के पास खड़ी थीं। इसके बावजूद, उनके फ्यूल कार्ड से 11 अक्टूबर तक डीजल भरवाने की प्रविष्टियाँ दर्ज की गईं। इसी प्रकार, HR38Z0951 और HR38GV1670 नंबर की अन्य दो एम्बुलेंस क्रमशः जनवरी और अगस्त से एक एजेंसी की वर्कशॉप में मरम्मत के लिए खड़ी थीं, लेकिन उनके फ्यूल कार्ड से भी 16 सितंबर और 11 अक्टूबर तक डीजल खरीदे जाने का रिकॉर्ड मिला है। यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि निष्क्रिय वाहनों के नाम पर फर्जी बिलिंग की जा रही थी।
| एम्बुलेंस नंबर | वर्तमान स्थिति | कब से निष्क्रिय | फ्यूल कार्ड से अंतिम एंट्री | अनुमानित घोटाला राशि |
|---|---|---|---|---|
| HR38GV3491 | मोर्चरी के पास खड़ी | 3-4 महीने | 11 अक्टूबर तक | ~50 लाख रुपये (कुल) |
| HR38GV9863 | मोर्चरी के पास खड़ी | 3-4 महीने | 11 अक्टूबर तक | |
| HR38Z0951 | एजेंसी वर्कशॉप में | जनवरी से | 16 सितंबर तक | |
| HR38GV1670 | एजेंसी वर्कशॉप में | अगस्त से | 11 अक्टूबर तक |
अधिकारियों, पुलिस व जांच दल की भूमिका व बयान
इस गंभीर अनियमितता के सामने आने के बाद, स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। डिप्टी सिविल सर्जन (एनएचएम) विनय गुप्ता ने 16 अक्टूबर को ही आरटीएस फ्लीट मैनेजर को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया था। इस नोटिस में डीजल भरवाने का पूरा ब्योरा, लेनदेन की विस्तृत जानकारी और इस प्रक्रिया के लिए जिम्मेदार सभी कर्मचारियों के नाम मांगे गए हैं। प्रत्येक एम्बुलेंस के हिसाब से डीजल भरवाने की तारीख, मात्रा, कीमत, पेट्रोल पंप का नाम और संबंधित कर्मचारियों की जानकारी स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
बीके अस्पताल के सीएमओ डॉ. जयंत आहूजा ने मामले की गंभीरता को समझते हुए 20 अक्टूबर को एक जांच कमेटी का गठन किया, जिसे 15 दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के निदेशक वीरेंद्र यादव भी इस पूरे घटनाक्रम पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं। सोमवार को बीके अस्पताल के दौरे के दौरान उन्होंने मीडिया को बताया कि जांच कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद ही इस मामले में आगे की ठोस कार्रवाई की जाएगी।
"हमने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल एक जांच कमेटी का गठन किया है। कमेटी को 15 दिनों के भीतर पूरी जांच कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट मिलने के बाद, दोषियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।"– डॉ. जयंत आहूजा, सिविल सर्जन, बीके सिविल अस्पताल, फरीदाबाद
स्थानीय जनजीवन, नागरिकों व व्यवस्था पर प्रभाव
यह घोटाला केवल वित्तीय अनियमितता का मामला नहीं है, बल्कि यह सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता और प्रशासनिक जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। जब एम्बुलेंस जैसी जीवनरक्षक सेवाएं प्रदान करने वाले विभाग में इस तरह के भ्रष्टाचार के मामले सामने आते हैं, तो आम जनता का सरकारी तंत्र पर से विश्वास उठने लगता है। 50 लाख रुपये की यह राशि, जिसका कथित तौर पर दुरुपयोग किया गया, मरीजों की सुविधाओं में सुधार, नई एम्बुलेंसों की खरीद, या अन्य आवश्यक चिकित्सा उपकरणों पर खर्च की जा सकती थी, जिससे हजारों लोगों को सीधा लाभ मिलता।
पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने भी इस घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं, जो दर्शाता है कि यह मामला राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का विषय बन गया है। यह घटना दर्शाती है कि सरकारी विभागों में आंतरिक नियंत्रण और ऑडिट प्रक्रियाओं को और मजबूत करने की तत्काल आवश्यकता है, ताकि सार्वजनिक धन का दुरुपयोग रोका जा सके और जनता के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।
आगे की कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई और आगामी कदम
जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर इस मामले में आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई तय की जाएगी। इसमें जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच, आपराधिक मुकदमा दर्ज करना, और वित्तीय वसूली जैसे कदम शामिल हो सकते हैं। स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों को उम्मीद है कि यह जांच न केवल दोषियों को बेनकाब करेगी, बल्कि भविष्य में ऐसी अनियमितताओं को रोकने के लिए एक मजबूत तंत्र स्थापित करने में भी मदद करेगी। इस घटना से सबक लेते हुए, फ्यूल कार्ड प्रबंधन और एम्बुलेंस संचालन की प्रक्रियाओं की समीक्षा की जाएगी ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।





