दीपावली का पावन पर्व अंधकार पर प्रकाश की विजय और सुख-समृद्धि के आगमन का प्रतीक है। देशभर में आज श्रद्धा और उल्लास के साथ मां महालक्ष्मी और विघ्नहर्ता भगवान गणेश की आराधना की जा रही है। मंदिरों से लेकर घरों तक दीपों की कतारें और रंगोली की सजावट सांस्कृतिक वैभव को दर्शा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दीपावली की रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और अपने भक्तों को सुख-शांति का आशीर्वाद प्रदान करती हैं।
पर्व / धार्मिक अवसर का महत्व और शुभ मुहूर्त
इस वर्ष कार्तिक मास की अमावस्या तिथि का आरंभ 8 नवंबर को सुबह 11 बजकर 27 मिनट से हो रहा है, जो अगले दिन 9 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगी। शास्त्रों के अनुसार, दीपावली का पूजन प्रदोष काल युक्त अमावस्या में करना सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, आज शाम लक्ष्मी पूजन के लिए मुख्य मुहूर्त केवल 2 घंटे 3 मिनट की अवधि का रहेगा, जो शाम 6 बजकर 6 मिनट से शुरू होकर रात 8 बजकर 9 मिनट तक रहेगा।
इसी अवधि के दौरान प्रदोष काल और वृषभ काल का भी शुभ संयोग बन रहा है। प्रदोष काल शाम 5 बजकर 40 मिनट से रात 8 बजकर 9 मिनट तक रहेगा। मान्यता है कि स्थिर लग्न (वृषभ काल) में की गई पूजा से महालक्ष्मी का घर में स्थायी वास होता है। इसलिए, व्यापारियों और गृहस्थों के लिए यह समय आत्मिक शांति और आर्थिक उन्नति की दृष्टि से अत्यंत पावन है।
| धार्मिक बिंदु | शुभ मुहूर्त, विधि व विवरण |
|---|---|
| लक्ष्मी पूजन मुख्य मुहूर्त | शाम 06:06 से रात 08:09 तक |
| प्रदोष काल समय | शाम 05:40 से रात 08:09 तक |
| वृषभ काल (स्थिर लग्न) | शाम 06:06 से रात 08:09 तक |
| नई दिल्ली में पूजन समय | शाम 05:32 से रात 08:05 तक |
| मुंबई में पूजन समय | शाम 06:11 से रात 08:31 तक |
| कोलकाता में पूजन समय | शाम 05:00 से रात 07:22 तक |
पूजा विधि, अनुष्ठान और पारंपरिक नियम
लक्ष्मी पूजन के लिए पवित्रता और श्रद्धा सर्वोपरि है। पूजा स्थल पर लाल वस्त्र बिछाकर मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और माता सरस्वती की प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं। कलश स्थापना के साथ पूजा का संकल्प लिया जाता है। षोडशोपचार विधि से पूजन करते हुए फल, फूल, नैवेद्य और विशेष रूप से खील-बताशे अर्पित किए जाते हैं। पारंपरिक रूप से दक्षिणवर्ती शंख और श्रीयंत्र का पूजन भी इस दिन विशेष फलदायी माना गया है।
अनुष्ठान के दौरान 'ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद' मंत्र का जाप करना और लक्ष्मी चालीसा का पाठ करना शुभ होता है। पूजा के पश्चात घर के मुख्य द्वार और कोनों में दीप प्रज्वलित किए जाते हैं। मान्यता है कि तेल और घी के दीपकों का प्रकाश नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त कर सकारात्मकता का संचार करता है। परिवार के सभी सदस्य मिलकर आरती करते हैं और सामूहिक कल्याण की प्रार्थना करते हैं।
मंदिरों व तीर्थ स्थलों पर विशेष प्रबंध
आज दीपावली के अवसर पर देश के प्रमुख तीर्थ स्थलों और मंदिरों में विशेष आध्यात्मिक छटा बिखरी हुई है। अयोध्या के राम मंदिर से लेकर काशी विश्वनाथ और दक्षिण के प्रसिद्ध मंदिरों में विशेष आरती और पुष्प सज्जा की गई है। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिरों में दर्शन के समय को बढ़ाया गया है और सुरक्षा के साथ-साथ सुगम दर्शन के लिए सांस्कृतिक स्वयंसेवकों की तैनाती की गई है।
मथुरा और वृंदावन के मंदिरों में 'छप्पन भोग' का आयोजन किया जा रहा है, वहीं कई शक्तिपीठों में मध्यरात्रि को महानिशा पूजा का विधान संपन्न होगा। मंदिरों में भजन-कीर्तन और वैदिक मंत्रोच्चार से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया है। तीर्थों पर दीपदान की परंपरा के तहत नदियों के घाटों को लाखों दीयों से रोशन किया गया है, जो एक अलौकिक दृश्य प्रस्तुत कर रहा है।
श्रद्धालुओं के लिए पावन संदेश और परंपरा
दीपावली केवल धन के वैभव का पर्व नहीं है, बल्कि यह अंतर्मन के अंधकार को मिटाकर ज्ञान का प्रकाश फैलाने का संदेश देता है। भारतीय संस्कृति में 'तमसो मा ज्योतिर्गमय' का जो मूल मंत्र है, वह इस पर्व की आत्मा है। श्रद्धालुओं को चाहिए कि वे पूजन के साथ-साथ समाज के वंचित वर्गों के साथ भी खुशियां साझा करें। दान-पुण्य और परोपकार इस पर्व की महत्ता को और अधिक बढ़ा देते हैं।
परंपरागत रूप से इस दिन अपने पूर्वजों का स्मरण करना और घर की स्वच्छता बनाए रखना अनिवार्य माना गया है। आने वाली पीढ़ी को इन सांस्कृतिक मूल्यों से परिचित कराना ही इस पर्व की सार्थकता है। सात्विक भाव से की गई आराधना और संयमित जीवन शैली ही मां लक्ष्मी की कृपा का वास्तविक आधार है। सभी श्रद्धालु इस पावन पर्व को सद्भाव और प्रेम के साथ मनाएं।





