हरियाणा (दैनिक Reality विशेष ग्राउंड रिपोर्ट): चंडीगढ़: डायबिटीज यानी मधुमेह को अक्सर लोग केवल ब्लड शुगर बढ़ने की बीमारी समझते हैं, लेकिन इसका असर शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों के साथ आंखों पर भी पड़ता है. लंबे समय तक शुगर का स्तर बढ़ा रहने से रेटिना की रक्त वाहिकाएं क्षतिग्रस्त हो सकती हैं और आंखों की रोशनी जाने तक की नौबत आ सकती है. भारत में एक करोड़ से ज्यादा मधुमेह मरीजों को डायबिटिक रेटिनोपैथी होने का खतरा है. चिंता की बात यह है कि शुरुआती चरण में बीमारी के स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते. मरीज को परेशानी का अहसास तब होता है, जब आंखों की रोशनी प्रभावित होने लगती है.शुरुआती जांच से 90 फीसदी अंधता रोकना संभव: मधुमेह दिवस से पहले ग्रेवाल आई इंस्टीट्यूट (GEI), मेडिसिटी, न्यू चंडीगढ़ ने लोगों को आंखों की नियमित जांच के प्रति जागरूक करने की अपील की है. मंगलवार को चंडीगढ़ प्रेस क्लब में संस्थान की जागरूकता मुहिम चिराग के तहत आयोजित प्रेस वार्ता में विशेषज्ञों ने बताया कि समय पर बीमारी की पहचान और उपचार से डायबिटीज के कारण होने वाली 90 फीसदी से अधिक अंधता को रोका जा सकता है. डॉक्टरों ने कहा कि, आंखों की रोशनी सामान्य होने का मतलब यह नहीं है कि रेटिना पूरी तरह स्वस्थ है. डायबिटीज का पता चलने से पहले खराब हो सकता है रेटिना: दैनिक रियलिटी से बातचीत के दौरान दौरान GEI के सीईओ एवं मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. एसपीएस ग्रेवाल ने कहा, टाइप-2 डायबिटीज के कई मरीजों में शुगर का पता चलने के समय ही रेटिना की बीमारी मौजूद हो सकती है. कई लोगों को वर्षों तक यह जानकारी नहीं होती कि वे मधुमेह से पीड़ित हैं. इस दौरान आंखों पर बीमारी का असर शुरू हो सकता है. इसलिए डायबिटीज की पहचान होने पर आंखों की जांच को प्राथमिकता देनी चाहिए. बदलती जीवनशैली, शारीरिक गतिविधियों में कमी और खानपान की गलत आदतों के कारण मधुमेह के मामले बढ़ रहे हैं. ऐसे में नियमित स्वास्थ्य जांच बेहद जरूरी है. 84.8 फीसदी मरीजों ने कभी नहीं कराई रेटिना की जांच: वही, GEI के डायरेक्टर (रेटिना सर्विसेज) डॉ. मंगत राम डोगरा ने दैनिक रियलिटी से बातचीत के दौरान बताया कि, साल 2022 में द लैंसेट ग्लोबल हेल्थ में प्रकाशित SMART India अध्ययन के अनुसार भारत में डायबिटीज के 12.5 फीसदी मरीज डायबिटिक रेटिनोपैथी से प्रभावित हैं. देश में मधुमेह के मरीजों की बड़ी संख्या को देखते हुए एक करोड़ से अधिक लोगों के इस बीमारी की चपेट में होने की आशंका है. उन्होंने वर्ष 2025 में BMJ Open में प्रकाशित ग्रामीण उत्तर प्रदेश के सर्वे का हवाला देते हुए बताया कि, 50 वर्ष या इससे अधिक उम्र के 84.8 फीसदी ऐसे मरीजों ने कभी रेटिना की जांच नहीं कराई थी, जिन्हें पहले से डायबिटीज थी. गंभीर डायबिटिक रेटिनोपैथी से पीड़ित पाए गए मरीजों में से केवल 15.4 फीसदी को उपचार मिला था. टाइप-1 और टाइप-2 मरीजों के लिए जांच का अलग समय: डॉ. डोगरा ने आगे बताया कि, टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों को बीमारी का पता चलते ही आंखों की जांच करानी चाहिए. वहीं, टाइप-1 डायबिटीज के मरीजों को बीमारी की पहचान के पांच साल के भीतर पहली रेटिना जांच कराने की सलाह दी जाती है. इसके बाद सामान्य तौर पर हर साल जांच जरूरी होती है. नियमित जांच से बीमारी को गंभीर होने से पहले पहचाना जा सकता है और समय रहते उपचार शुरू किया जा सकता है. धुंधला दिखना और काले धब्बे दिखना खतरे के संकेत: डॉ. डोगरा ने कहा कि, लंबे समय तक ब्लड शुगर बढ़ा रहने से रेटिना की छोटी रक्त वाहिकाएं खराब होने लगती हैं. इसके कारण आंखों के सामने काले धब्बे या फ्लोटर्स दिखाई दे सकते हैं. नजर धुंधली होना और अचानक देखने की क्षमता कम होना भी इसके चेतावनी संकेत हैं. ऐसे लक्षण दिखाई देने पर बिना देरी किए नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए. बीमारी के शुरुआती चरण में लक्षण नहीं दिखना भी बड़ी चुनौती है. लेजर और इंजेक्शन से किया जा सकता है उपचार: वहीं, GEI की सीनियर कंसल्टेंट (विट्रियो रेटिना एवं यूवाइटिस) डॉ. मनप्रीत बराड़ ने बताया कि, आधुनिक जांच तकनीकों से डायबिटिक रेटिनोपैथी की शुरुआती अवस्था में पहचान संभव है. समय पर इलाज मिलने से आंखों की रोशनी बचाने में मदद मिलती है. ब्लड शुगर नियंत्रित रखने के साथ नियमित रेटिना जांच जरूरी है. जरूरत पड़ने पर लेजर थेरेपी और आंखों में इंजेक्शन जैसे उपचार किए जा सकते हैं. गर्भवती मधुमेह मरीजों और गर्भधारण की योजना बना रही महिलाओं को भी रेटिना की जांच करानी चाहिए. 2050 तक भारत में 15.67 करोड़ हो सकते हैं डायबिटीज मरीज: डॉक्टरों ने बताया कि, साल 2024 में दुनिया में 20 से 79 वर्ष की उम्र के करीब 58.9 करोड़ लोग डायबिटीज से पीड़ित थे. भारत में यह संख्या लगभग 8.98 करोड़ थी. अनुमान है कि वर्ष 2050 तक देश में मधुमेह मरीजों की संख्या बढ़कर 15.67 करोड़ हो सकती है. विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की कि वे शुगर की नियमित जांच कराएं और डायबिटीज होने पर आंखों की जांच को भी अपनी स्वास्थ्य देखभाल का अनिवार्य हिस्सा बनाएं. शुगर बढ़ते ही आंखों पर भी पड़ रहा असर, हर 5 में से 1 मरीज को रेटिना की बीमारी का खतरा, डॉक्टर्स बोले- "समय पर इलाज से टल सकता है खतरा" लड़कों से कम एक्टिव रहतीं लड़कियां; दुनिया के 24 करोड़ किशोर नहीं करते एक्सरसाइज दिवाली से पहले शेयर बाजार गुलजार, निफ्टी में पिछले छह सालों में सबसे अधिक साप्ताहिक उछाल दीपोत्सव 2026: धनतेरस, दिवाली और भाई दूज तक बरसेगी कृपा, जानें कब, कैसे और किस मुहूर्त में करें पूजा नूंह में 13 हजार किलो खराब पनीर नष्ट, मिलावटखोरों पर लगातार कस रहा है शिकंजा। स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग द्वारा जनसुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए यह महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।
स्वास्थ्य समस्या / सुविधा के मुख्य लक्षण और कारण
इस पहल से क्षेत्र के नागरिकों को दैनिक आवागमन, प्रशासनिक कार्यों और मूलभूत सुविधाओं में बड़ा लाभ मिलेगा। संबंधित अधिकारियों को समय सीमा के भीतर सभी औपचारिकताएं पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
| स्वास्थ्य बिंदु | विशेषज्ञ सलाह व सावधानियां |
|---|---|
| योजना / जनसुविधा | शुगर बढ़ते ही आंखों पर भी पड़ रहा असर, हर 5 में से 1 मरीज को |
| संबंधित विभाग | राज्य प्रशासन व स्थानीय प्राधिकरण |
| नागरिक लाभ | सुगम आवागमन व बेहतर सुविधाएं |
डॉक्टरों व चिकित्सा विशेषज्ञों की जरूरी सलाह
स्थानीय नागरिकों और विभिन्न संगठनों ने प्रशासन के इस कदम का स्वागत करते हुए इसे जनहित में एक सार्थक प्रयास बताया है।
अस्पताल में उपलब्ध सुविधाएं और ओपीडी सेवाएं
आगामी दिनों में इस व्यवस्था के क्रियान्वयन की उच्चस्तरीय समीक्षा की जाएगी ताकि आम जनता को किसी भी तरह की असुविधा न हो।
खान-पान, दिनचर्या और घरेलू सावधानियां
विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि कार्यों की गुणवत्ता और समय-सीमा का विशेष ध्यान रखा जाए।





