हरियाणा के परिवहन बुनियादी ढांचे और रेलवे कनेक्टिविटी के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक अध्याय शुरू होने जा रहा है। उत्तर रेलवे ने देश के सबसे व्यस्ततम रेलखंडों में शुमार 'दिल्ली-पानीपत-अंबाला' मार्ग को फोरलेन (चार लाइन) में तब्दील करने की महात्वाकांक्षी योजना पर काम तेज कर दिया है। लगभग 5,983 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना के तहत मौजूदा दो रेल पटरियों के साथ तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाई जाएगी। इस विस्तार का सीधा उद्देश्य ट्रेनों के परिचालन में आने वाली तकनीकी बाधाओं को दूर करना और यात्रियों के समय की बचत करना है।
वर्तमान में दिल्ली से अंबाला के बीच प्रतिदिन लगभग 200 मेल, एक्सप्रेस, सुपरफास्ट और पैसेंजर ट्रेनों का आवागमन होता है। पिछले एक दशक में इस रूट पर यात्रियों के दबाव में 40 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। केवल दो लाइनें होने के कारण अक्सर एक्सप्रेस ट्रेनों को रास्ता देने के लिए पैसेंजर ट्रेनों को छोटे स्टेशनों पर घंटों खड़ा रहना पड़ता है, जिससे दैनिक यात्रियों को भारी असुविधा होती है। नई लाइनों के निर्माण के बाद मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों के लिए अलग-अलग ट्रैक की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी, जिससे ट्रेनों की औसत गति में भी सुधार होगा।
भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया और प्रभावित क्षेत्र
इस वृहद परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए रेलवे ने भूमि अधिग्रहण की औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। उत्तर रेलवे की ओर से संबंधित जिला प्रशासनों को जमीन अधिग्रहण का प्रस्ताव भेजा गया है। सबसे पहले सोनीपत जिले की तीन प्रमुख तहसीलों—राई, सोनीपत और गन्नौर के गांवों के भूमि रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, अकेले सोनीपत जिले में लगभग 15.52 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता इस विस्तार के लिए होगी।
| जिला | तहसील/क्षेत्र | प्रमुख प्रभावित गांव |
|---|---|---|
| सोनीपत | राई, सोनीपत, गन्नौर | मुनीरपुर, सफियाबाद, अकबरपुर बारोटा, कालूपुर, हरसाना कलां, जगदीशपुर, जफरपुर, राजपुर। |
| पानीपत | समालखा, पानीपत | झटीपुर, दिवाना, सिवाह, काबड़ी, निजामपुर, कचरौली, बाबरपुर। |
| कर्नाल | घरौंडा, नीलोखेड़ी | कोहंड, बसताड़ा, झिवर हेड़ी, खरकाली, शामगढ़, डोडवा, टिखाना, पढ़ाना। |
| कुरुक्षेत्र | थानेसर, शाहाबाद | अमीन, सुंदरपुर, शादीपुर, धीरपुर, सराय सुखी, चरुनी जटां, ढोला माजरा, मोहरी। |
| अंबाला | अंबाला कैंट | मोहरा, शाहपुर, नन्हेड़ा, अंबाला कैंट क्षेत्र। |
प्रशासनिक तैयारी और आधिकारिक रुख
परियोजना की गंभीरता को देखते हुए जिला राजस्व अधिकारियों (DRO) ने संबंधित पटवारियों और तहसीलदारों से जमीन का विवरण मांग लिया है। जमीन के मालिकाना हक और वर्तमान उपयोग की जांच के बाद मुआवजा वितरण की प्रक्रिया निर्धारित की जाएगी। रेलवे ने स्पष्ट किया है कि यह विस्तार न केवल हरियाणा बल्कि पंजाब, हिमाचल प्रदेश, चंडीगढ़ और जम्मू-कश्मीर जाने वाले करोड़ों यात्रियों के लिए गेम-चेंजर साबित होगा।
"दिल्ली-अंबाला रेलमार्ग को चार लाइनों वाला बनाने का प्रस्ताव रेलवे की ओर से प्राप्त हुआ है। इसके लिए सोनीपत, राई और गन्नौर तहसीलों के अंतर्गत आने वाली जमीन का रिकॉर्ड जांचा जा रहा है। प्रक्रिया पूरी होते ही नियमानुसार आगामी कदम उठाए जाएंगे।"
- सुशील शर्मा, डीआरओ, सोनीपत
तकनीकी पहलू और निर्माण समयसीमा
परियोजना के प्रथम चरण के लिए रेलवे ने ₹3,612 करोड़ के टेंडर आमंत्रित किए हैं। इस चरण में सब्जी मंडी (दिल्ली) से अंबाला कैंट के बीच सिविल इंजीनियरिंग कार्य, सिग्नलिंग प्रणाली का आधुनिकीकरण, टेलीकम्युनिकेशन नेटवर्क और ओवरहेड इक्विपमेंट (OHE) की स्थापना की जाएगी। रेलवे ने निर्माण कार्य पूरा करने के लिए 48 महीने (4 वर्ष) का लक्ष्य निर्धारित किया है। टेंडर प्रक्रिया के लिए बोली लगाने की अंतिम तिथि 1 फरवरी तय की गई है, जिसके बाद निर्माण एजेंसियों का चयन कर जमीनी स्तर पर कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
स्थानीय जनजीवन और यात्रियों पर प्रभाव
इस फोरलेन रेलमार्ग के बनने से जीटी रोड बेल्ट के जिलों—सोनीपत, पानीपत, करनाल और कुरुक्षेत्र के आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी। दैनिक यात्रियों, विशेषकर नौकरीपेशा और छात्रों के लिए यात्रा सुगम होगी। वर्तमान में जो सफर 3 से 4 घंटे में पूरा होता है, नई लाइनों के चालू होने के बाद उसमें 30 से 45 मिनट की कमी आने की संभावना है। साथ ही, मालगाड़ियों के लिए अलग कॉरिडोर जैसा विकल्प मिलने से औद्योगिक क्षेत्रों में कच्चे माल और तैयार उत्पादों की आपूर्ति भी तेज होगी।





