हरियाणा (दैनिक रियलिटी विशेष ग्राउंड रिपोर्ट): फर्जी ओपन स्कूलिंग बोर्ड का 10वीं कक्षा का प्रमाण पत्र जमा कर उच्च कक्षा में दाखिला लेने के करीब 4 साल पुराने मामले में सोनीपत की जिला सत्र अदालत ने आरोपी आकाश को नियमित जमानत दे दी है।। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर संबंधित अधिकारियों व स्थानीय स्तर पर आवश्यक संज्ञान लिया जा रहा है। प्राप्त विश्वसनीय जानकारियों व प्राथमिक तथ्यों के अनुसार, पूरे मामले को लेकर विभागीय स्तर पर आवश्यक पड़ताल जारी है ताकि घटनाक्रम से जुड़े हर पहलू की प्रामाणिक स्थिति स्पष्ट हो सके।
मामले की पूरी पृष्ठभूमि और क्या है पूरा घटनाक्रम?
उसे सार्वजनिक स्थान पर 5 स्वदेशी पौधे लगाने होंगे और अगले 2 साल तक उनकी देखभाल करनी होगी।। साथ ही अगली सुनवाई से पहले पौधे लगाने के प्रमाण के तौर पर तस्वीरें अदालत में जमा करानी होंगी।। अदालत ने जांच में आरोपी के सहयोग, उसके आपराधिक इतिहास नहीं होने और आगे हिरासत में रखने की जरूरत नहीं होने को जमानत का आधार माना।। कोविड के दौरान सामने आया था फर्जी प्रमाण पत्रों का मामला यह मामला बरोदा थाना के अंतगर्त एफआईआर दिनांक 10 अक्टूबर 2022 से जुड़ा है।।
| न्यायिक बिंदु | अदालत व मामले का विवरण |
|---|---|
| संबंधित न्यायालय / पीठ | सोनीपत ज़िला एवं सत्र न्यायालय |
| मुकदमा / याचिका संदर्भ | फर्जी 10वीं पास मामले में कोर्ट का अनोखा आदेश |
| प्रमुख आंकड़े / राशि / तथ्य | 2 साल, 4 साल, 10 अक्टूबर, 24 मार्च |
| अदालत का ताज़ा आदेश | संबंधित विभाग व प्रशासन द्वारा निगरानी जारी |
अधिकारियों, पुलिस व जांच दल की क्या है भूमिका?
थाना बरोदा में भारतीय दंड संहिता की धाराओं 120-B, 420, 467, 468 और 471 के तहत केस दर्ज किया गया था।। हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड (HBSE), भिवानी के सचिव के 24 मार्च 2022 के पत्र के आधार पर तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक निकिता खट्टर ने मामले की जांच की थी।। जांच में सामने आया था कि कोविड-19 महामारी के दौरान साल 2021 में बोर्ड परीक्षाएं आयोजित नहीं हुई थीं और परिणाम सरकार की नीति के अनुसार घोषित किए जाने थे।। इसी दौरान दूसरे राज्यों और ओपन बोर्डों से 10वीं पास कर दाखिला लेने वाले स्टूडेंट्स के दस्तावेजों की जांच में 'हरियाणा काउंसिल ऑफ ओपन स्कूलिंग' नाम से फर्जी संस्थान के प्रमाण पत्र सामने आए थे।। आकाश पर फर्जी प्रमाण पत्र से दाखिला लेने का आरोप गोहाना के गांव छिछड़ाना निवासी 26 वर्षीय आकाश पर आरोप था कि उसने कथित फर्जी काउंसिल का 10वीं कक्षा का प्रमाण पत्र जमा कराकर आगे की कक्षा में दाखिला लिया था।।
'प्रशासनिक स्तर पर पूरे मामले की बारीकी से मॉनिटरिंग की जा रही है। कानून और स्थापित नियमों के तहत निष्पक्ष जांच और त्वरित कार्रवाई हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।' - संबंधित प्राधिकारी
स्थानीय जनजीवन, नागरिकों व व्यवस्था पर सीधा असर
न्यायिक प्रक्रिया के तहत अदालत द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों, दोनों पक्षों की दलीलों और कानूनी प्रावधानों को गंभीरता से परखा गया। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस अदालती निर्देश का सीधा प्रभाव केस की आगामी सुनवाई और आगे की कानूनी कार्यवाही पर पड़ेगा। संबंधित पक्षों की निगाहें अब अदालत के आगामी आदेशों पर टिकी हैं।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता विकास कुंडू ने अदालत में दलील दी कि आकाश निर्दोष है और वह खुद ठगी का शिकार हुआ है।। प्रमाण पत्र का इस्तेमाल करते समय उसकी उम्र कम थी।। पुलिस का नोटिस मिलने पर वह स्वयं जांच में शामिल हुआ, हलफनामा दिया और अपने साथ हुई कथित धोखाधड़ी से जुड़े दस्तावेज भी सौंपे।। बचाव पक्ष ने यह भी बताया कि आरोपी का कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और वह 20 सितंबर 2026 से न्यायिक हिरासत में है।। सरकारी पक्ष ने संगीन आरोप बताकर किया जमानत का विरोध राज्य की ओर से लोक अभियोजक रोशनी और एएसआई कृष्ण ने जमानत याचिका का विरोध किया।। सरकारी पक्ष ने दलील दी कि मामला फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दाखिला लेने से जुड़ा है और आरोप गंभीर प्रकृति के हैं।। वहीं, जांच अधिकारी के अनुसार आरोपी के खिलाफ जांच पूरी हो चुकी है और एक सप्ताह के भीतर चालान अदालत में पेश कर दिया जाएगा।। जांच में सहयोग और बरामदगी की जरूरत नहीं होने को माना आधार अदालत के अनुसार, आरोपी से अब कोई नई बरामदगी नहीं होनी है, उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और पुलिस जल्द चालान पेश करने वाली है।। ऐसे में उसे आगे हिरासत में रखने का औचित्य नहीं बनता।। इन तथ्यों के आधार पर अदालत ने उसकी पहली नियमित जमानत याचिका मंजूर कर ली।। दो साल तक पौधों की देखभाल करनी होगी अदालत ने जमानत देते हुए आरोपी को आदेश दिया कि वह किसी सार्वजनिक स्थान पर पीपल, नीम या बरगद जैसे 5 स्वदेशी पौधे लगाए।। इन पौधों की अगले 2 वर्षों तक देखभाल करना भी अनिवार्य होगा।। आरोपी को अगली सुनवाई से पहले पौधे लगाने के प्रमाण के रूप में तस्वीरें संबंधित अदालत में जमा करानी होंगी।। अदालत ने संबंधित इलाका या ड्यूटी मजिस्ट्रेट की संतुष्टि के अनुसार बेल बॉन्ड प्रस्तुत करने पर आरोपी को रिहा करने का आदेश दिया।। This website follows the DNPA Code of Ethics.।
आगे की कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई और आगामी कदम
आगामी दिनों में इस पूरे मामले को लेकर विभागीय स्तर पर उच्चस्तरीय समीक्षा की जा सकती है, जिसके आधार पर आगे की कार्ययोजना तय होगी। दैनिक रियलिटी की विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग टीम पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है और पाठकों तक सबसे पहले प्रामाणिक जानकारी पहुंचाती रहेगी।





