हरियाणा (दैनिक रियलिटी विशेष ग्राउंड रिपोर्ट): हरियाणा में बिजली सेक्टर में प्राइवेट कंपनी को पैरेलल लाइसेंस दिए जाने के फैसले को पब्लिक इंटरेस्ट में रद्द करने को लेकर हरियाणा सरकार की तरफ से संबंधित बॉडी HERC को मेल की गई है।। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर संबंधित अधिकारियों व स्थानीय स्तर पर आवश्यक संज्ञान लिया जा रहा है। प्राप्त विश्वसनीय जानकारियों व प्राथमिक तथ्यों के अनुसार, पूरे मामले को लेकर विभागीय स्तर पर आवश्यक पड़ताल जारी है ताकि घटनाक्रम से जुड़े हर पहलू की प्रामाणिक स्थिति स्पष्ट हो सके।
मामले की पूरी पृष्ठभूमि और क्या है पूरा घटनाक्रम?
बिजली कर्मचारियों के साथ हड़ताल के दूसरे बैठक में सरकार और बिजली कर्मचारियों मे सहमति बनी।। मीटिंग के तुरंत बाद सरकार ने एक पत्र जारी किया था।। जिसमें लिखा था कि राज्य सरकार के राजस्व पर पड़ने वाले वित्तीय प्रभावों और उपभोक्ता हित तथा जनहित को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार नीतिगत रूप से तथा राज्य में उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए, विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 108 की उपधारा (1) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए आयोग को निर्देश देती है कि वह हरियाणा राज्य में कहीं भी समानांतर वितरण लाइसेंस सृजित, संचालित या प्रभावी न करे।। आगे पत्र में लिखा था कि ये निर्देश हरियाणा के माननीय मुख्यमंत्री की स्वीकृति से जारी किए गए हैं और धारा 108 के अंतर्गत राज्य सरकार के इन निर्देशों को आयोग के संज्ञान में लाएं।।
| समाचार बिंदु | ताज़ा विवरण व स्थिति |
|---|---|
| मुख्य घटनाक्रम | हरियाणा में निजी-कंपनी के पैरेलल लाइसेंस पर रोक की तैया |
| संबंधित क्षेत्र / ज़िला | हरियाणा (संबंधित क्षेत्र) |
| संबंधित संस्था / विभाग | संबंधित राज्य विभाग व स्थानीय प्रशासन |
| प्रमुख तथ्य व आंकड़े | 50 हजार |
अधिकारियों, पुलिस व जांच दल की क्या है भूमिका?
हड़ताल के दूसरे दिन जारी हुआ था पत्र बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के दूसरे ही दिन सरकार बैकफुट पर आ गई और सरकार ने कर्मचारियों को मीटिंग के लिए बुलाकर इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 की धारा 108 का इस्तेमाल पर प्राइवेट कंपनी के पेरेलल लाइसेंस को रद्द करने और इसको लेकर लेकर एचईआरसी को लिखने पर सहमति जताई जिसके बाद कर्मचारियों ने अपनी हड़ताल समाप्त कर दी।। वहीं कर्मचारियों की तरफ से दावा किया गया था कि करीब 50 हजार कर्मचारी हड़ताल पर थे।। शुरुआत में धारा 108 पर नहीं बनी थी सहमति शुरुआत से ही कर्मचारी लगातार मांग कर रहे थे कि सरकार संबंधित एक्ट की धारा 108 के तहत अपनी प्रदश शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए पेरेलल लाइसेंस को रद्द कर सकती है और सरकार ये तुरंत करना चाहिए लेकिन तब इसको लेकर सहमति नहीं बनी लेकिन जब विरोध बढ़ गया तो सरकार को बात मानना पड़ी।। प्रवक्ता बोले- 10 दिन के अंदर रद्द किया जाएगा लेटर बिजली संयुक्त मोर्चा के प्रवक्ता रविंद्र घणगस ने कहा कि हमें उम्मीद है एचईआरसी तुरंत सरकार की भेजी गई ईमेल पर संज्ञान लेगी और 10 दिन के अंदर लाइसेंस को रद्द कर दिया जाएगा।। चूंकि यह पॉलिसी मैटर है तो इसमें देर नहीं लगनी चाहिए।।
'प्रशासनिक स्तर पर पूरे मामले की बारीकी से मॉनिटरिंग की जा रही है। कानून और स्थापित नियमों के तहत निष्पक्ष जांच और त्वरित कार्रवाई हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।' - संबंधित प्राधिकारी
स्थानीय जनजीवन, नागरिकों व व्यवस्था पर सीधा असर
इस पूरे मामले का स्थानीय नागरिकों और संबंधित क्षेत्र के लोगों पर सीधा और व्यापक प्रभाव देखा जा रहा है। जनहित को प्राथमिकता देते हुए प्रशासनिक तंत्र ने सभी संबंधित अधिकारियों को फील्ड में सक्रिय रहने और किसी भी तरह की समस्या का त्वरित समाधान करने के निर्देश दिए हैं।
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आगे की कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई और आगामी कदम
आगामी दिनों में इस पूरे मामले को लेकर विभागीय स्तर पर उच्चस्तरीय समीक्षा की जा सकती है, जिसके आधार पर आगे की कार्ययोजना तय होगी। दैनिक रियलिटी की विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग टीम पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है और पाठकों तक सबसे पहले प्रामाणिक जानकारी पहुंचाती रहेगी।





