दुष्यंत का बड़ा कबूलनामा: 'BJP से गठबंधन गलती नहीं, मजबूरी थी' - सत्ता जाने के बाद अब छलका JJP का दर्द
हरियाणा के पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने जींद में JJP के छठे स्थापना दिवस पर बड़ा राजनीतिक धमाका किया है। उन्होंने पहली बार स्वीकार किया कि भाजपा के साथ गठबंधन उनकी 'पसंद' नहीं बल्कि 'मजबूरी' थी। हार के बाद अब दुष्यंत ने युवाओं और किसानों को साधने के लिए कौन सा नया दांव चला है? क्या JJP फिर से खड़ी हो पाएगी? पढ़िए वरिष्ठ पत्रकार नीरज अहलावत की यह इन-डेप्थ रिपोर्ट।
दुष्यंत का बड़ा कबूलनामा: 'BJP से गठबंधन गलती नहीं, मजबूरी थी' - सत्ता जाने के बाद अब छलका JJP का दर्द
खबर का सार (Quick Read)
- गठबंधन पर सफाई: दुष्यंत चौटाला ने जींद रैली में साफ कहा कि 2019 में भाजपा के साथ सरकार बनाना उनका शौक नहीं, बल्कि वक्त की 'मजबूरी' थी।
- हार पर मंथन: दुष्यंत ने माना कि पिछले चुनावों में मिली करारी शिकस्त (0 सीटें) से पार्टी को धक्का लगा है, लेकिन अब वे 'नई फसल' तैयार करेंगे।
- युवाओं पर दांव: भविष्य की राजनीति के लिए बड़ा ऐलान—अगले चुनावों में JJP 50% टिकट 40 साल से कम उम्र के युवाओं को देगी।
- हुड्डा और भाजपा निशाने पर: कांग्रेस (भूपेंद्र हुड्डा) और भाजपा दोनों पर तीखे हमले किए, साथ ही किसानों के लिए MSP और मनरेगा की वकालत की।
- नई रणनीति: पार्टी को फिर से खड़ा करने के लिए अब वे देवीलाल की विचारधारा और जमीनी संघर्ष का सहारा लेंगे।
राजनीति में जब सत्ता हाथ से फिसलती है, तब नेताओं को अक्सर अपनी 'गलतियां' और 'मजबूरियां' याद आने लगती हैं। आज हरियाणा की सियासत का केंद्र बिंदु जींद रहा, जहाँ जननायक जनता पार्टी (JJP) अपना छठा स्थापना दिवस मना रही थी। लेकिन यह जश्न से ज्यादा 'प्रायश्चित' और अस्तित्व बचाने की 'जद्दोजहद' का मंच लग रहा था।
हरियाणा की राजनीति में किंगमेकर बनकर उभरे और फिर अर्श से फर्श पर (शून्य सीट) आ गिरे दुष्यंत चौटाला ने आज चुप्पी तोड़ी। उनके शब्दों में सत्ता जाने का मलाल और जनता, खासकर जाट वोट बैंक से दूर होने की छटपटाहट साफ महसूस की जा सकती थी।
सत्ता का सुख या 'मजबूरी' का दुख?
दुष्यंत चौटाला ने मंच से जो सबसे बड़ा बयान दिया, वह भाजपा के साथ उनके साढ़े चार साल के रिश्ते को लेकर था। उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं की आंखों में देखते हुए कहा कि भाजपा के साथ जाना उनकी कोई दिली तमन्ना नहीं थी।
"भाजपा के साथ गठबंधन हमारी कोई चॉइस (पसंद) नहीं थी, वो एक मजबूरी थी। हमें प्रदेश को स्थिरता देने के लिए वह कड़वा घूंट पीना पड़ा था।"
दुष्यंत का यह बयान बताता है कि वे अब उस 'दाग' को धोने की कोशिश कर रहे हैं, जो भाजपा की गोद में बैठने के कारण उनकी 'किसान हितैषी' छवि पर लगा था। उन्होंने इसे एक किसान के उदाहरण से समझाया— "जैसे ओलावृष्टि से फसल खराब होने पर किसान खेत नहीं छोड़ता बल्कि दोबारा हल जोतता है, वैसे ही हम फिर से मेहनत करेंगे।"
Neeraj's Take: सवाल तो बनता है!
(वरिष्ठ पत्रकार नीरज अहलावत का विश्लेषण)
आखिर अब ही क्यों याद आई 'मजबूरी'?
दुष्यंत जी, सवाल यह है कि जब साढ़े चार साल तक आप लाल बत्ती की गाड़ी में घूम रहे थे, जब आपके पास आबकारी और पंचायत जैसे मलाईदार मंत्रालय थे, तब यह 'मजबूरी' जनता को क्यों नहीं दिखी?
राजनीतिक विश्लेषक के तौर पर मैं इसे 'डैमेज कंट्रोल' से ज्यादा कुछ नहीं मानता। सच्चाई यह है कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों में जनता ने JJP को पूरी तरह नकार दिया। अब जब जनाधार खिसक चुका है, तो 'मजबूरी' का राग अलापना एक इमोशनल कार्ड खेलने जैसा है। जनता समझदार है; वह जानती है कि सत्ता में हिस्सेदारी 'मजबूरी' में नहीं, 'सहमति' से ली जाती है। आज का यह बयान हताशा का प्रतीक है या वापसी का रोडमैप, यह तो वक्त बताएगा, लेकिन इतना तय है कि खोया हुआ भरोसा जीतना इतना आसान नहीं होगा।
युवाओं को 50% हिस्सेदारी: नया शगूफा या हकीकत?
अपनी गिरती हुई साख को बचाने के लिए दुष्यंत ने अपना पुराना 'युवा कार्ड' फिर से खेला है। उन्होंने घोषणा की है कि भविष्य में होने वाले चुनावों में पार्टी 50 प्रतिशत टिकट उन युवाओं को देगी, जिनकी उम्र 40 वर्ष से कम है।
यह ऐलान बताता है कि दुष्यंत समझ चुके हैं कि बुजुर्ग और खाप पंचायतों का भरोसा शायद अब उन पर उतना नहीं रहा, इसलिए वे नई फौज तैयार करना चाहते हैं। इसके साथ ही उन्होंने महिला सशक्तिकरण और खिलाड़ियों के सम्मान की बात कहकर हर वर्ग को छूने की कोशिश की।
हुड्डा और भाजपा: दोनों पर वार
मंच से दुष्यंत ने न सिर्फ अपनी सफाई दी, बल्कि अपने विरोधियों को भी लपेटा।
- कांग्रेस पर वार: उन्होंने भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर तंज कसते हुए कहा कि वे भाजपा की 'बी-टीम' हैं और ईडी (ED) के डर से खुलकर नहीं बोलते।
- भाजपा पर वार: उन्होंने मौजूदा नायब सैनी सरकार को घेरते हुए कहा कि कानून व्यवस्था चरमरा गई है और किसान त्रस्त है।
दुष्यंत ने मांग की कि केंद्र सरकार फसलों पर MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) की गारंटी दे और मनरेगा की दिहाड़ी बढ़ाई जाए। यह वही मुद्दे हैं जिन पर किसान आंदोलन के दौरान दुष्यंत चुप रहे थे, और जिसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा।
Key Facts: JJP के स्थापना दिवस की मुख्य बातें
- स्थान: जींद, हरियाणा (जाट राजनीति का केंद्र)।
- मुख्य घोषणा: भविष्य में 40 साल से कम उम्र के युवाओं को 50% टिकट।
- बड़ा बयान: भाजपा से गठबंधन को 'मजबूरी' बताया।
- तुलना: पार्टी की स्थिति की तुलना 'ओलावृष्टि से खराब हुई फसल' से की।
- मुख्य मांगें: MSP पर कानून, मनरेगा मजदूरी में बढ़ोतरी।
- मौजूदा स्थिति: 2019 में 10 सीटें जीतने वाली JJP 2024 में 0 पर सिमट गई है।
निष्कर्ष: क्या फिर से उग पाएगी 'फसल'?
दुष्यंत चौटाला ने आज जींद की धरती से बीज तो डाल दिया है, लेकिन हरियाणा की राजनीतिक जमीन अभी उनके लिए बंजर नजर आ रही है। "गठबंधन को मजबूरी" बताना एक सियासी पैंतरा हो सकता है, लेकिन जनता यह नहीं भूलेगी कि जब किसान सड़कों पर थे, तब JJP सत्ता के गलियारों में थी।
रास्ता कठिन है। दुष्यंत को अब सोशल इंजीनियरिंग और इमोशनल कार्ड से आगे बढ़कर, जमीन पर पसीना बहाना होगा। वरना, इतिहास गवाह है कि क्षेत्रीय दल जब एक बार रसातल में जाते हैं, तो वापसी में दशकों लग जाते हैं।