उत्तर प्रदेश की ढांचागत तस्वीर को बदलने के लिए राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) ने प्रदेश में 932 किलोमीटर लंबे 8 नए लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण को हरी झंडी दे दी है। इस महापरियोजना पर कुल 67,800 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस पहल का मुख्य उद्देश्य राज्य में पहले से मौजूद बड़े एक्सप्रेसवे जैसे आगरा-लखनऊ, पूर्वांचल, बुंदेलखंड और निर्माणाधीन गंगा एक्सप्रेसवे को आपस में जोड़कर एक एकीकृत 'एक्सप्रेसवे ग्रिड' तैयार करना है।
इस नई योजना के तहत न केवल बड़े शहरों की दूरी कम होगी, बल्कि पिछड़े क्षेत्रों को भी मुख्य आर्थिक गलियारे से जोड़ा जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि दिल्ली-एनसीआर से लेकर उत्तराखंड, बिहार और मध्य प्रदेश की सीमाओं तक वाहनों का आवागमन निर्बाध और तेज गति से हो सके। इसमें ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट्स पर विशेष ध्यान दिया गया है ताकि पर्यावरण और गति के बीच संतुलन बना रहे।
8 नए लिंक एक्सप्रेसवे और उनकी विस्तृत रूपरेखा
इस परियोजना के तहत सबसे महत्वपूर्ण खंड जालौन में बनने वाला 118.9 किलोमीटर लंबा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे है। यह बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे को सीधे झाँसी के बीडा इंडस्ट्रियल सिटी से जोड़ेगा। इसके निर्माण पर करीब 7,968 करोड़ रुपये (जमीन अधिग्रहण सहित) खर्च होने का अनुमान है। इसके अलावा, जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए एक 6-लेन का विशेष लिंक मार्ग बनाया जाएगा, जिससे पश्चिमी यूपी और दिल्ली-एनसीआर के यात्रियों को हवाई अड्डे तक पहुंचने में न्यूनतम समय लगेगा।
| लिंक एक्सप्रेसवे का नाम | अनुमानित लंबाई (KM) | अनुमानित लागत (करोड़ में) | मुख्य जुड़ाव |
|---|---|---|---|
| जालौन-झाँसी ग्रीनफील्ड | 118.9 | 7,968 | बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से बीडा सिटी |
| आगरा-लखनऊ से पूर्वांचल लिंक | - | 4,776 | लखनऊ-गाजीपुर-बिहार रूट |
| फर्रुखाबाद लिंक | 91 | 6,000 | आगरा-लखनऊ से गंगा एक्सप्रेसवे |
| हरिद्वार लिंक एक्सप्रेसवे | 146 | 10,500 | पश्चिमी यूपी से उत्तराखंड बॉर्डर |
| विंध्य-सोनभद्र एक्सप्रेसवे | - | 25,000 | प्रयागराज से एमपी बॉर्डर (सिंगरौली) |
| वाराणसी-गाजीपुर लिंक | 117 | 8,000 | पूर्वांचल से विंध्य एक्सप्रेसवे |
| चित्रकूट लिंक | 15 | 800 | बुंदेलखंड से एमपी बॉर्डर |
दिल्ली-एनसीआर से उत्तराखंड और बिहार तक का सफर होगा सुगम
इस ग्रिड के तैयार होने से दिल्ली और नोएडा के निवासियों के लिए उत्तराखंड जाना बेहद आसान हो जाएगा। 146 किलोमीटर लंबा हरिद्वार लिंक एक्सप्रेसवे गंगा एक्सप्रेसवे को रुड़की और हरिद्वार से जोड़ेगा। वहीं, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ने के बाद दिल्ली से बिहार की ओर जाने वाले वाहनों को लखनऊ शहर के ट्रैफिक में फंसे बिना सीधा रास्ता मिलेगा। इसके अलावा, फर्रुखाबाद लिंक के माध्यम से इटावा, मैनपुरी, कन्नौज और शाहजहांपुर जैसे जिले सीधे हाई-स्पीड कॉरिडोर का हिस्सा बन जाएंगे।
औद्योगिक गलियारे और आर्थिक विकास पर प्रभाव
सरकार की इस योजना का एक बड़ा हिस्सा विंध्य क्षेत्र और बुंदेलखंड को औद्योगिक रूप से समृद्ध करना है। प्रयागराज से मिर्जापुर और भदोही होते हुए सोनभद्र तक जाने वाला 25,000 करोड़ का एक्सप्रेसवे मध्य प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों जैसे सिंगरौली तक सीधी पहुंच प्रदान करेगा। इससे न केवल माल ढुलाई की लागत कम होगी, बल्कि इन क्षेत्रों में नए उद्योगों की स्थापना के लिए निवेशकों को आकर्षित किया जा सकेगा। वाराणसी-गाजीपुर क्षेत्र में प्रस्तावित 6-लेन लिंक रोड से पूर्वांचल के कृषि और व्यापारिक उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाना आसान होगा।
प्रशासनिक तैयारी और आगामी चरण
उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) अब इन परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को तेज करने जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, अधिकांश प्रोजेक्ट्स को ग्रीनफील्ड श्रेणी में रखा गया है ताकि घनी आबादी वाले क्षेत्रों को प्रभावित किए बिना नए मार्ग बनाए जा सकें। वित्तीय प्रबंधन के लिए राज्य सरकार बजट आवंटन के साथ-साथ अन्य वित्तीय संस्थानों से सहयोग लेने पर भी विचार कर रही है। अगले कुछ महीनों में इन परियोजनाओं के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है।





