हरियाणा के फतेहाबाद जिले के अंतर्गत आने वाले टोहाना शहर में आवारा पशुओं और विशेषकर श्वानों का खौफ इस हद तक बढ़ चुका है कि अब रिहायशी इलाकों में पैदल चलना भी सुरक्षित नहीं रह गया है। ताजा घटनाक्रम रामनगर कॉलोनी का है, जहां रोजमर्रा की भांति सुबह के वक्त सैर करके अपने आशियाने की तरफ लौट रही एक स्थानीय महिला को आवारा श्वानों के आक्रामक तेवरों का सामना करना पड़ा। पीछे से अचानक हुए इस दुस्साहसिक हमले ने पीड़िता को मानसिक रूप से झकझोर कर रख दिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, हमले के बाद दहशत के साए में किसी तरह कुछ कदम आगे बढ़ने पर महिला को तीव्र चक्कर आ गए, जिसके परिणामस्वरुप वह संतुलन खोकर सड़क पर ही अचेत होकर गिर पड़ी। गनीमत यह रही कि उस वक्त आसपास कुछ राहगीर और स्थानीय लोग मौजूद थे, जिनकी त्वरित निगाहें इस हादसे पर पड़ गईं। बिना एक पल गंवाए नागरिकों ने अचेत महिला को संभाला और फौरन नजदीकी चिकित्सा केंद्र पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार देकर उसकी स्थिति को स्थिर किया।
घटना का सिलसिलेवार विवरण और स्थानीय चश्मदीदों के गंभीर आरोप
रामनगर की इस घटना के बाद से पूरी कॉलोनी के भीतर भय का वातावरण बना हुआ है और नागरिकों का गुस्सा प्रशासन के प्रति सातवें आसमान पर पहुंच गया है। प्रत्यक्षदर्शियों और कॉलोनी के प्रमुख निवासियों ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की है कि सुबह और शाम के समय जब बुजुर्ग, महिलाएं और छोटे बच्चे गलियों से गुजरते हैं, तो उनके मन में हर पल किसी अनहोनी का अंदेशा बना रहता है। आवारा श्वानों के झुंड अब इतने आक्रामक हो चुके हैं कि बिना उकसावे के भी राहगीरों को अपना निशाना बना रहे हैं।
स्थानीय बाशिंदों ने पुरानी घटनाओं का हवाला देते हुए बताया कि पूर्व में भी इस क्षेत्र से अत्यंत वीभत्स और डरावने मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें एक वृद्ध महिला के शव को आवारा कुत्तों द्वारा नोंचे जाने जैसी अमानवीय घटनाएं भी शामिल हैं। इसके बावजूद नगर पालिका और स्थानीय प्रशासन की नींद नहीं टूटी है, जिससे आम जनता खुद को पूरी तरह असहाय महसूस कर रही है।
| घटना का पहलू | विवरण / तथ्य |
|---|---|
| प्रभावित क्षेत्र | रामनगर, टोहाना (फतेहाबाद, हरियाणा) |
| मुख्य घटना | सैर से लौट रही महिला पर आवारा कुत्तिया का हमला |
| परिणाम | महिला का घबराकर सड़क पर अचेत होना व अस्पताल में उपचार |
| प्रमुख नागरिक | प्रदीप धीमान, सुनील, दिनेश एवं अन्य कॉलोनीवासी |
| निवासियों की मांग | आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने की अपील |
प्रशासनिक उदासीनता और नागरिकों की न्यायोचित मांग
क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि उन्होंने कई मर्तबा संबंधित विभागों और नगर निकाय के अधिकारियों के समक्ष इस गंभीर समस्या को उठाया है, परंतु हर बार केवल कोरे आश्वासन ही हाथ लगे हैं। धरातल पर न तो आवारा श्वानों की नसबंदी का कोई ठोस कार्यक्रम नजर आता है और न ही उन्हें पकड़कर किसी सुरक्षित शेड में शिफ्ट करने की कोई स्थायी व्यवस्था की गई है। प्रशासनिक सुस्ती के कारण नागरिकों का गुस्सा लगातार उग्र होता जा रहा है।
पीड़ित परिवार और रामनगर के त्रस्त निवासियों ने जिला प्रशासन के उच्च अधिकारियों और नगर पालिका परिषद से यह पुरजोर मांग की है कि इस मामले का तुरंत संज्ञान लिया जाए। क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अभियान चलाकर इन आक्रामक श्वानों को तुरंत प्रभाव से नियंत्रित किया जाए, ताकि भविष्य में किसी की जान पर बड़ा खतरा न आए और आम नागरिक भयमुक्त होकर अपने जीवन का निर्वाह कर सकें।
"हमारे इलाके में आवारा कुत्तों का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि बच्चों और बुजुर्गों का घर से बाहर निकलना मुहाल हो गया है। प्रशासन को किसी बड़े हादसे का इंतजार किए बिना तुरंत प्रभावी कदम उठाने चाहिए।" - स्थानीय निवासी
जनजीवन पर व्यापक असर और सुरक्षा को लेकर सुलगते सवाल
इस ताजा घटना ने एक बार फिर शहरी क्षेत्रों में बुनियादी नागरिक सुरक्षा और पशु नियंत्रण के दावों की पोल खोल दी है। हरियाणा की विभिन्न शहरी बस्तियों में आवारा पशुओं की बढ़ती संख्या लगातार जनजीवन को प्रभावित कर रही है। लोग अपने घरों के दरवाजों पर भी असुरक्षित महसूस करने लगे हैं। यदि समय रहते इन समस्याओं का वैज्ञानिक और मानवीय समाधान नहीं निकाला गया, तो यह लापरवाही किसी बड़े और अपूरणीय मानवीय संकट को जन्म दे सकती है।
आगामी दिनों में यदि प्रशासन द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती है, तो स्थानीय नागरिकों ने कड़ा रुख अपनाते हुए सामूहिक विरोध प्रदर्शन करने की चेतावनी भी दी है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस चेतावनी और जनहित के इस गंभीर मुद्दे पर कितनी जल्दी और कितनी संवेदनशीलता के साथ ठोस कदम उठाता है।




