हरियाणा (दैनिक रियलिटी विशेष ग्राउंड रिपोर्ट): Haryana School news : हरियाणा में सरकारी स्कूलों में खेल सुविधाएं सुधारने के लिए अब बजट खर्च करने के साथ मैदान की हालत और खेल सामग्री के उपयोग को भी ध्यान में रखा जाएगा।। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर संबंधित अधिकारियों व स्थानीय स्तर पर आवश्यक संज्ञान लिया जा रहा है। प्राप्त विश्वसनीय जानकारियों व प्राथमिक तथ्यों के अनुसार, पूरे मामले को लेकर विभागीय स्तर पर आवश्यक पड़ताल जारी है ताकि घटनाक्रम से जुड़े हर पहलू की प्रामाणिक स्थिति स्पष्ट हो सके।
मामले की पूरी पृष्ठभूमि और क्या है पूरा घटनाक्रम?
प्रत्येक स्कूल को एक लाख रुपये के हिसाब से मिलने वाली इस राशि में 50 हजार रुपये खेल मैदान सुधारने और 50 हजार रुपये खेल उपकरण खरीदने पर खर्च किए जा सकेंगे।। खेल मैदानों को दुरुस्त करने के लिए बजट की राशि से मिट्टी भराई, मैदान की समतलता, मार्किंग, मिट्टी भराई और खेल सुविधाओं से जुड़ी छोटी-मोटी मरम्मत भी करवाई जा सकेगी।। हालांकि, मिट्टी भराई पर स्वीकृत राशि का अधिकतम 50 प्रतिशत ही खर्च किया जा सकेगा।। पौधे और मैदान की सीमा चिह्नित करने जैसे कार्य भी निर्धारित प्रावधानों के तहत कराए जा सकेंगे।।
| समाचार बिंदु | ताज़ा विवरण व स्थिति |
|---|---|
| मुख्य घटनाक्रम | हरियाणा के 3396 स्कूलों को मिलेंगे 33.96 करोड़ रुपए, हर |
| संबंधित क्षेत्र / ज़िला | पंचकूला |
| संबंधित संस्था / विभाग | संबंधित राज्य विभाग व स्थानीय प्रशासन |
| प्रमुख तथ्य व आंकड़े | 1 लाख, 33.96 करोड़, 50 हजार, 50 प्रतिशत |
अधिकारियों, पुलिस व जांच दल की क्या है भूमिका?
योजना का लाभ उठाने के लिए स्कूलों को निर्धारित समय सीमा के भीतर राशि का उपयोग करना होगा।। स्कूलों को बजट खर्च करने के बाद उसका रिकॉर्ड और खर्च का प्रमाण भी देना होगा।। स्कूलों की जांच करेंगे बीईओ, डीईओ करेंगे वेरिफिकेशन खेल बजट के इस्तेमाल में गड़बड़ी रोकने के लिए जांच की व्यवस्था भी तय की गई है।। ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (बीईओ) को अपने क्षेत्र के 50 प्रतिशत स्कूलों में निरीक्षण कर खर्च का सत्यापन करना होगा।। जिला शिक्षा अधिकारी (डीईईओ) जिले के 10 प्रतिशत स्कूलों की रैंडम जांच करेंगे।।
'प्रशासनिक स्तर पर पूरे मामले की बारीकी से मॉनिटरिंग की जा रही है। कानून और स्थापित नियमों के तहत निष्पक्ष जांच और त्वरित कार्रवाई हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।' - संबंधित प्राधिकारी
स्थानीय जनजीवन, नागरिकों व व्यवस्था पर सीधा असर
इस पूरे मामले का स्थानीय नागरिकों और संबंधित क्षेत्र के लोगों पर सीधा और व्यापक प्रभाव देखा जा रहा है। जनहित को प्राथमिकता देते हुए प्रशासनिक तंत्र ने सभी संबंधित अधिकारियों को फील्ड में सक्रिय रहने और किसी भी तरह की समस्या का त्वरित समाधान करने के निर्देश दिए हैं।
योजना की खास बात यह है कि स्कूल केवल खेल सामग्री खरीदकर बजट खर्च नहीं दिखा सकेंगे।। राशि से मैदान का समतलीकरण, मार्किंग, मिट्टी भराई और खेल सुविधाओं से जुड़ी छोटी-मोटी मरम्मत भी करवाई जा सकेगी।। नेट, पोल और मैदान की सीमा चिह्नित करने जैसे कार्य भी निर्धारित प्रावधानों के तहत कराए जा सकेंगे।। इंडोर और आउटडोर खेलों के लिए जरूरी उपकरण खरीदने की भी अनुमति होगी।। शिक्षा विभाग ने बजट खर्च करने की समय सीमा तय कर दी है।। स्कूलों को 31 दिसंबर 2026 तक स्वीकृत राशि का उपयोग करना होगा।। इसके बाद 31 जनवरी 2027 तक उपयोगिता प्रमाणपत्र (यूसी) जमा करना अनिवार्य होगा।। यानी केवल राशि खर्च करना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उसका रिकॉर्ड और खर्च का प्रमाण भी देना होगा।। सीधे नहीं मिलेगी राशि, कमेटी करेगी खरीदारी खेल बजट के इस्तेमाल के लिए स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) की छह सदस्यीय कमेटी के माध्यम से खरीद की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।। हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद (एचएसएसपीपी), पंचकूला टेंडर प्रक्रिया कराएगा।। स्कूल मुखिया या प्राचार्य को स्वीकृत योजना के अनुसार खर्च और रिकॉर्ड के रखरखाव की जिम्मेदारी दी गई है।। वहीं, एसएमसी या एसएमडीसी खर्च की योजना को मंजूरी देगी और राशि के उचित उपयोग की निगरानी करेगी।।
आगे की कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई और आगामी कदम
आगामी दिनों में इस पूरे मामले को लेकर विभागीय स्तर पर उच्चस्तरीय समीक्षा की जा सकती है, जिसके आधार पर आगे की कार्ययोजना तय होगी। दैनिक रियलिटी की विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग टीम पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है और पाठकों तक सबसे पहले प्रामाणिक जानकारी पहुंचाती रहेगी।





