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हरियाणा के 3396 स्कूलों को मिलेंगे 33.96 करोड़ रुपए, हर स्कूल को 1 लाख, जानें कहां होगा खर्च

Haryana School news : हरियाणा में सरकारी स्कूलों में खेल सुविधाएं सुधारने के लिए अब बजट खर्च करने के साथ मैदान की हालत और खेल सामग्री के उपयोग को भी ध्यान।

नीरज अहलावत
वरिष्ठ पत्रकार एवं मुख्य संपादक
27 अक्टूबर 2026 को 03:18 am बजे2 मिनट पठन0 व्यूज
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हरियाणा के 3396 स्कूलों को मिलेंगे 33.96 करोड़ रुपए, हर स्कूल को 1 लाख, जानें कहां होगा खर्च
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खबर की मुख्य बातें (Key Highlights)

  • •Haryana School news : हरियाणा में सरकारी स्कूलों में खेल सुविधाएं सुधारने के लिए अब ब...
  • •प्रशासनिक व संबंधित विभाग ने मामले पर लिया त्वरित संज्ञान, जांच जारी।
  • •पंचकूला सहित प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति पर रखी जा रही है निरंतर नजर।
  • •विस्तृत तथ्यों व अग्रिम अपडेट्स के लिए दैनिक रियलिटी से जुड़े रहें।

हरियाणा (दैनिक रियलिटी विशेष ग्राउंड रिपोर्ट): Haryana School news : हरियाणा में सरकारी स्कूलों में खेल सुविधाएं सुधारने के लिए अब बजट खर्च करने के साथ मैदान की हालत और खेल सामग्री के उपयोग को भी ध्यान में रखा जाएगा।। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर संबंधित अधिकारियों व स्थानीय स्तर पर आवश्यक संज्ञान लिया जा रहा है। प्राप्त विश्वसनीय जानकारियों व प्राथमिक तथ्यों के अनुसार, पूरे मामले को लेकर विभागीय स्तर पर आवश्यक पड़ताल जारी है ताकि घटनाक्रम से जुड़े हर पहलू की प्रामाणिक स्थिति स्पष्ट हो सके।

मामले की पूरी पृष्ठभूमि और क्या है पूरा घटनाक्रम?

प्रत्येक स्कूल को एक लाख रुपये के हिसाब से मिलने वाली इस राशि में 50 हजार रुपये खेल मैदान सुधारने और 50 हजार रुपये खेल उपकरण खरीदने पर खर्च किए जा सकेंगे।। खेल मैदानों को दुरुस्त करने के लिए बजट की राशि से मिट्टी भराई, मैदान की समतलता, मार्किंग, मिट्टी भराई और खेल सुविधाओं से जुड़ी छोटी-मोटी मरम्मत भी करवाई जा सकेगी।। हालांकि, मिट्टी भराई पर स्वीकृत राशि का अधिकतम 50 प्रतिशत ही खर्च किया जा सकेगा।। पौधे और मैदान की सीमा चिह्नित करने जैसे कार्य भी निर्धारित प्रावधानों के तहत कराए जा सकेंगे।।

समाचार बिंदुताज़ा विवरण व स्थिति
मुख्य घटनाक्रमहरियाणा के 3396 स्कूलों को मिलेंगे 33.96 करोड़ रुपए, हर
संबंधित क्षेत्र / ज़िलापंचकूला
संबंधित संस्था / विभागसंबंधित राज्य विभाग व स्थानीय प्रशासन
प्रमुख तथ्य व आंकड़े1 लाख, 33.96 करोड़, 50 हजार, 50 प्रतिशत

अधिकारियों, पुलिस व जांच दल की क्या है भूमिका?

योजना का लाभ उठाने के लिए स्कूलों को निर्धारित समय सीमा के भीतर राशि का उपयोग करना होगा।। स्कूलों को बजट खर्च करने के बाद उसका रिकॉर्ड और खर्च का प्रमाण भी देना होगा।। स्कूलों की जांच करेंगे बीईओ, डीईओ करेंगे वेरिफिकेशन खेल बजट के इस्तेमाल में गड़बड़ी रोकने के लिए जांच की व्यवस्था भी तय की गई है।। ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (बीईओ) को अपने क्षेत्र के 50 प्रतिशत स्कूलों में निरीक्षण कर खर्च का सत्यापन करना होगा।। जिला शिक्षा अधिकारी (डीईईओ) जिले के 10 प्रतिशत स्कूलों की रैंडम जांच करेंगे।।

'प्रशासनिक स्तर पर पूरे मामले की बारीकी से मॉनिटरिंग की जा रही है। कानून और स्थापित नियमों के तहत निष्पक्ष जांच और त्वरित कार्रवाई हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।' - संबंधित प्राधिकारी

स्थानीय जनजीवन, नागरिकों व व्यवस्था पर सीधा असर

इस पूरे मामले का स्थानीय नागरिकों और संबंधित क्षेत्र के लोगों पर सीधा और व्यापक प्रभाव देखा जा रहा है। जनहित को प्राथमिकता देते हुए प्रशासनिक तंत्र ने सभी संबंधित अधिकारियों को फील्ड में सक्रिय रहने और किसी भी तरह की समस्या का त्वरित समाधान करने के निर्देश दिए हैं।

योजना की खास बात यह है कि स्कूल केवल खेल सामग्री खरीदकर बजट खर्च नहीं दिखा सकेंगे।। राशि से मैदान का समतलीकरण, मार्किंग, मिट्टी भराई और खेल सुविधाओं से जुड़ी छोटी-मोटी मरम्मत भी करवाई जा सकेगी।। नेट, पोल और मैदान की सीमा चिह्नित करने जैसे कार्य भी निर्धारित प्रावधानों के तहत कराए जा सकेंगे।। इंडोर और आउटडोर खेलों के लिए जरूरी उपकरण खरीदने की भी अनुमति होगी।। शिक्षा विभाग ने बजट खर्च करने की समय सीमा तय कर दी है।। स्कूलों को 31 दिसंबर 2026 तक स्वीकृत राशि का उपयोग करना होगा।। इसके बाद 31 जनवरी 2027 तक उपयोगिता प्रमाणपत्र (यूसी) जमा करना अनिवार्य होगा।। यानी केवल राशि खर्च करना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उसका रिकॉर्ड और खर्च का प्रमाण भी देना होगा।। सीधे नहीं मिलेगी राशि, कमेटी करेगी खरीदारी खेल बजट के इस्तेमाल के लिए स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) की छह सदस्यीय कमेटी के माध्यम से खरीद की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।। हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद (एचएसएसपीपी), पंचकूला टेंडर प्रक्रिया कराएगा।। स्कूल मुखिया या प्राचार्य को स्वीकृत योजना के अनुसार खर्च और रिकॉर्ड के रखरखाव की जिम्मेदारी दी गई है।। वहीं, एसएमसी या एसएमडीसी खर्च की योजना को मंजूरी देगी और राशि के उचित उपयोग की निगरानी करेगी।।

आगे की कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई और आगामी कदम

आगामी दिनों में इस पूरे मामले को लेकर विभागीय स्तर पर उच्चस्तरीय समीक्षा की जा सकती है, जिसके आधार पर आगे की कार्ययोजना तय होगी। दैनिक रियलिटी की विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग टीम पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है और पाठकों तक सबसे पहले प्रामाणिक जानकारी पहुंचाती रहेगी।

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नीरज अहलावत (Neeraj Ahlawat)

नीरज अहलावत (Neeraj Ahlawat)वरिष्ठ पत्रकार एवं संपादक

DainikReality.in | पानीपत, हरियाणा | 10+ वर्षों का डिजिटल पत्रकारिता अनुभव

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नीरज अहलावत हिंदी पत्रकारिता और डिजिटल समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और पाठकों तक उपयोगी जानकारी पहुंचाने को प्राथमिकता देते हैं। DainikReality.in पर उनका फोकस हरियाणा की खबरों, समसामयिक घटनाओं, सरकारी योजनाओं और रोजगार पर तथ्यपरक विश्लेषण प्रस्तुत करना है।

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