चंडीगढ़ के राजनीतिक गलियारों में उस वक्त हलचल और तेज हो गई जब इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के राष्ट्रीय संरक्षक और पूर्व वित्त मंत्री प्रो. संपत सिंह ने राज्य की विद्युत व्यवस्था को लेकर एक सनसनीखेज खुलासा किया। पार्टी मुख्यालय पर आयोजित एक अहम प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए उन्होंने हरियाणा सरकार और विद्युत नियामक आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य के बिजली तंत्र में समानांतर वितरण प्रणाली लागू करने का निर्णय पूरी तरह से जनविरोधी है, जिसे सुनियोजित तरीके से जनता पर थोपा गया है।
प्रो. सिंह ने तीखा रुख अपनाते हुए कहा कि हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग ने अपने संवैधानिक और वैधानिक दायित्वों से मुंह मोड़ लिया है। वर्तमान में यह आयोग पूरी तरह से शासन व्यवस्था के इशारों पर काम करने वाली एक कठपुतली बनकर रह गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य केवल सार्वजनिक उपक्रमों को कमजोर करके मुनाफे का निजीकरण करना है। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर उन्होंने बिजली कर्मचारियों द्वारा शुरू किए गए विरोध प्रदर्शनों और हड़ताल को अपनी पार्टी की तरफ से पूर्ण समर्थन देने का ऐलान किया है।
विवाद के केंद्र में कंपनी की वित्तीय स्थिति और राजनीतिक करीबी के आरोप
प्रेस वार्ता के दौरान पूर्व वित्त मंत्री ने दावा किया कि यह पूरा सौदा एक केंद्रीय मंत्री के बेहद करीबी व्यक्ति की कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए तय किया गया था। जिस 'इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड' नामक नई कंपनी को 4700 करोड़ रुपये की विशाल परियोजना के लिए लाइसेंस दिया गया है, उसकी कुल चुकता पूंजी मात्र एक करोड़ रुपये दर्ज की गई है। हैरानी की बात यह है कि नियामक आयोग ने इस कंपनी का काल्पनिक बाजार मूल्य 4,085 करोड़ रुपये मान लिया, जबकि इसका वास्तविक ऑडिटेड बही मूल्य केवल 95 करोड़ रुपये था।
सरकार के शीर्ष मंत्रियों और मुख्यमंत्री द्वारा इस आदेश के खिलाफ अदालत में अपील करने के दावों कोरी बयानबाजी करार देते हुए उन्होंने इसे जनता की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश बताया। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि तुरंत प्रभाव से विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 108 का इस्तेमाल किया जाए और लिखित नीतिगत निर्देश जारी कर इस लाइसेंस प्रक्रिया पर पूरी तरह रोक लगाई जाए।
| मुद्दा / पहलू | विवरण एवं तथ्य |
|---|---|
| संबंधित कंपनी | इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड |
| लाइसेंस की अवधि | 25 वर्ष (समानांतर बिजली वितरण) |
| कंपनी की वास्तविक पूंजी | मात्र 1 करोड़ रुपये (ऑडिटेड बही मूल्य 95 करोड़) |
| परियोजना का आकार | लगभग 4700 करोड़ रुपये |
| संभावित वित्तीय हानि | दक्षिण हरियाणा बिजली निगम को सालाना 3,000 से 4,272 करोड़ रुपये तक का नुकसान |
मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए प्रो. सिंह ने कहा कि इस गंभीर मामले पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की चुप्पी दोनों दलों की आपसी मिलीभगत को साफ उजागर करती है। उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 1998 में भी विश्व बैंक की शर्तों के तहत बिजली निगमों के निजीकरण का दबाव बनाया गया था, जिसे तत्कालीन इनेलो सरकार ने जनता के हित में सिरे से खारिज कर दिया था। उनका मानना था कि सार्वजनिक संस्थाओं का मुख्य उद्देश्य जनकल्याण होना चाहिए, न कि चुनिंदा व्यावसायिक घरानों को लाभान्वित करना।
बिजली निगमों के अस्तित्व पर मंडराया संकट और उपभोक्ताओं पर बढ़ेगा बोझ
इस फैसले के दूरगामी परिणामों पर चर्चा करते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि समानांतर बिजली वितरण प्रणाली लागू होने से राज्य के सार्वजनिक बिजली निगमों, इंजीनियरों और कर्मचारियों के भविष्य पर गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। सबसे ज्यादा राजस्व देने वाले व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ता यदि निजी हाथों में चले गए, तो दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) जैसे संस्थान आर्थिक रूप से बेहद कमजोर हो जाएंगे।
आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि अकेला गुरुग्राम निगम के कुल राजस्व का लगभग 43 प्रतिशत हिस्सा उत्पन्न करता है, जहां लाइन लॉस भी बेहद कम है। इसके बावजूद, निजी लाइसेंसधारी शुरुआती दौर में गुरुग्राम जैसे विकसित क्षेत्र में बड़ा निवेश करने के बजाय ग्रामीण नूंह जैसे इलाकों में नाममात्र का निवेश कर रहे हैं। इससे क्रॉस-सब्सिडी का गंभीर वित्तीय संकट पैदा होगा, जिसकी भरपाई अंततः किसानों, छोटे दुकानदारों, घरेलू उपभोक्ताओं और समाज के गरीब तबके को अपनी जेब से चुकानी पड़ेगी।
"यह फैसला उन तमाम बलिदानों और आर्थिक सुधारों के साथ सीधा विश्वासघात है, जो पूर्व में बिजली निगमों को उबारने के लिए जनता के धन से किए गए थे। हम सार्वजनिक बिजली व्यवस्था की रक्षा के लिए अदालतों से लेकर सड़कों तक पूरी ताकत से संघर्ष करेंगे।" - प्रो. संपत सिंह, पूर्व वित्त मंत्री एवं इनेलो नेता
अंत में उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द ही इस दिशा में कोई ठोस सुधारात्मक कदम नहीं उठाया और संयुक्त संघर्ष मोर्चा के साथ सार्थक बातचीत शुरू नहीं की, तो यह विवाद और अधिक गहरा सकता है। इनेलो नेता ने स्पष्ट किया कि बिजली कर्मचारियों और किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए इस लड़ाई को कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर मजबूती के साथ लड़ा जाएगा।





