हरियाणा (दैनिक रियलिटी विशेष ग्राउंड रिपोर्ट): रेवाड़ी शहर में बेसहारा गोवंश को पकड़कर गोशालाओं में भेजने की रफ्तार पिछले 2 माह से धीमी हो गई है।। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर संबंधित अधिकारियों व स्थानीय स्तर पर आवश्यक संज्ञान लिया जा रहा है। प्राप्त विश्वसनीय जानकारियों व प्राथमिक तथ्यों के अनुसार, पूरे मामले को लेकर विभागीय स्तर पर आवश्यक पड़ताल जारी है ताकि घटनाक्रम से जुड़े हर पहलू की प्रामाणिक स्थिति स्पष्ट हो सके।
मामले की पूरी पृष्ठभूमि और क्या है पूरा घटनाक्रम?
शहर के चौक-चौराहों और बाजारों में गोवंश के झुंड खड़े दिखाई दे रहे हैं।। इससे वाहन चालकों और राहगीरों के लिए हादसों का खतरा बना हुआ है।। नगर परिषद हर साल टेंडर के जरिए बेसहारा पशुओं को पकड़कर गोशालाओं में भेजने का अभियान चलाती है।। इसके बावजूद सड़कों पर पशुओं की मौजूदगी बनी हुई है।।
| अभियान / राजनीतिक बिंदु | विस्तृत विवरण व स्थिति |
|---|---|
| अभियान / कार्यक्रम का नाम | रेवाड़ी में दो माह से गोवंश पकड़ने की धीमी रफ्तार |
| आयोजक दल / संगठन | संबंधित राज्य विभाग व स्थानीय प्रशासन |
| तय तारीख / प्रमुख आंकड़े | 14.50 लाख |
| कार्यक्षेत्र व ज़िले | रेवाड़ी |
अधिकारियों, पुलिस व जांच दल की क्या है भूमिका?
रात के समय सड़क पर बैठे या खड़े गोवंश वाहन चालकों को दूर से दिखाई नहीं देते।। पहले भी इनके कारण कई हादसे हो चुके हैं।। नगर परिषद के रिकॉर्ड के अनुसार अप्रैल से जुलाई तक 861 गोवंश पकड़े गए और इस पर करीब 14.50 लाख रुपये खर्च किए गए।। वहीं, ठेकेदार का दावा है कि इस साल अब तक 1,000 गोवंश गोशालाओं में भेजे जा चुके हैं।। चार माह में 861 गोवंश पकड़ने पर 14.50 लाख खर्च नगर परिषद के रिकॉर्ड के मुताबिक अप्रैल से जुलाई तक 861 गोवंश पकड़े गए।।
'प्रशासनिक स्तर पर पूरे मामले की बारीकी से मॉनिटरिंग की जा रही है। कानून और स्थापित नियमों के तहत निष्पक्ष जांच और त्वरित कार्रवाई हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।' - संबंधित प्राधिकारी
स्थानीय जनजीवन, नागरिकों व व्यवस्था पर सीधा असर
राजनीतिक गलियारों में इस पूरे घटनाक्रम और संगठनात्मक गतिविधि को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। आगामी रणनीतियों को लेकर पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं। क्षेत्र की आम जनता और राजनीतिक विश्लेषकों की निगाहें भी इस फैसले के दूरगामी परिणामों पर टिकी हुई हैं।
शहर में नगर परिषद के पिछले सर्वे में करीब 3,500 बेसहारा गोवंश होने की बात सामने आई थी।। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि सैकड़ों पशु पकड़े जाने और लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद सड़कों पर गोवंश की मौजूदगी कम क्यों नहीं हो रही।। राजस्थान चुनाव के कारण लेबर की कमी- ठेकेदार ठेकेदार देवेंद्र के अनुसार, इस साल अब तक 1,000 गोवंश गोशालाओं में भेजे जा चुके हैं।। पिछले कुछ दिनों से पशु पकड़ने का काम कम हुआ है, क्योंकि उनके पास राजस्थान की लेबर है और वहां चुनाव चल रहे हैं।। उन्होंने जल्द ही दोबारा प्रतिदिन गोवंश पकड़कर गोशालाओं में भेजने की बात कही।। This website follows the DNPA Code of Ethics.।
आगे की कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई और आगामी कदम
आगामी दिनों में इस पूरे मामले को लेकर विभागीय स्तर पर उच्चस्तरीय समीक्षा की जा सकती है, जिसके आधार पर आगे की कार्ययोजना तय होगी। दैनिक रियलिटी की विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग टीम पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है और पाठकों तक सबसे पहले प्रामाणिक जानकारी पहुंचाती रहेगी।





