गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026
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शिक्षा की अलख जगाने वाले साहित्यकार दीपचंद निर्मोही का निधन, मरणोपरांत देहदान कर पेश की मानवता की मिसाल

पानीपत के प्रख्यात शिक्षाविद् एवं चेतना परिवार के संस्थापक दीपचंद निर्मोही का निधन। उनकी अंतिम इच्छानुसार पार्थिव शरीर चिकित्सा शोध हेतु खानपुर मेडिकल कॉलेज को दान।

नीरज अहलावत
वरिष्ठ पत्रकार एवं मुख्य संपादक
29 अक्टूबर 2026 को 01:30 pm बजे2 मिनट पठन0 व्यूज
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शिक्षा की अलख जगाने वाले साहित्यकार दीपचंद निर्मोही का निधन, मरणोपरांत देहदान कर पेश की मानवता की मिसाल
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फोटो: दैनिक रियलिटी विशेष डिजिटल डेस्कdainikreality.in

खबर की मुख्य बातें (Key Highlights)

  • •प्रख्यात लेखक एवं शिक्षाविद् दीपचंद निर्मोही ने 28 अक्टूबर को निजी अस्पताल में ली अंतिम सांस।
  • •दिवंगत साहित्यकार का पार्थिव शरीर चिकित्सा शोध हेतु खानपुर मेडिकल कॉलेज को समर्पित किया गया।
  • •झुग्गी-झोपड़ियों के बच्चों के लिए 'चेतना स्कूल' की श्रृंखला शुरू कर शिक्षा को घर-घर पहुंचाया।
  • •30 अक्टूबर को पानीपत के आर्य कॉलेज में उनकी स्मृति में 'प्रेरणा सभा' का होगा आयोजन।

हरियाणा के पानीपत जिले में शिक्षा, साहित्य और समाजसेवा के एक स्वर्णिम अध्याय का अंत हो गया है। प्रख्यात शिक्षाविद्, प्रखर लेखक और चेतना परिवार के संस्थापक श्री दीपचंद निर्मोही का 28 अक्टूबर को एक निजी अस्पताल में उपचार के दौरान निधन हो गया। वे पिछले 10 दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे। उनके निधन की खबर से न केवल पानीपत, बल्कि पूरे प्रदेश के साहित्यिक और सामाजिक हलकों में शोक की लहर दौड़ गई है। निर्मोही जी ने न केवल जीवित रहते हुए समाज को शिक्षा का उजियारा दिया, बल्कि मृत्यु के पश्चात भी अपनी देह दान कर चिकित्सा विज्ञान और मानवता के प्रति अपनी अटूट निष्ठा का प्रमाण दिया।

निर्मोही जी की अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए उनके परिवार ने जनसेवा दल के सहयोग से उनके पार्थिव शरीर को खानपुर मेडिकल कॉलेज के सुपुर्द किया। यह देहदान आने वाले समय में चिकित्सा की पढ़ाई कर रहे दर्जनों छात्र-छात्राओं के शोध और अध्ययन में सहायक सिद्ध होगा। उनके इस साहसिक और परोपकारी निर्णय की हर ओर सराहना हो रही है।

साहित्यिक एवं सामाजिक जीवन का सफरनामा

प्रमुख विवरणतथ्य एवं जानकारी
नामश्री दीपचंद निर्मोही
जन्म स्थानमुजफ्फरनगर (उत्तर प्रदेश)
मुख्य पहचानशिक्षाविद्, लेखक, संस्थापक - चेतना परिवार
प्रमुख कृतियाँसूरज का सफर, कालजयी महात्मा गांधी, इंदिरा गांधी, अल्ताफ हुसैन हाली
सामाजिक योगदानझुग्गी-झोपड़ी के बच्चों हेतु निःशुल्क शिक्षा एवं महिला स्वावलंबन
अंतिम योगदानदेहदान (खानपुर मेडिकल कॉलेज)

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में जन्मे दीपचंद निर्मोही का जीवन संघर्ष और सिद्धांतों की मिसाल रहा। मात्र 17 वर्ष की अल्पायु में, जब वे दसवीं कक्षा के छात्र थे, उन्होंने हिंदी सत्याग्रह आंदोलन में सक्रिय भागीदारी की और जेल भी गए। उनके पिता बाबूराम जी ने सन्यास ग्रहण कर स्वामी दयावंत का नाम अपनाया था, जिससे निर्मोही जी को बचपन से ही सादगी और सेवा के संस्कार मिले। पानीपत आने के बाद उन्होंने आर्य वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में एक शिक्षक के रूप में अपनी यात्रा शुरू की और बाद में उसी संस्थान में प्रधानाचार्य के पद से सेवानिवृत्त हुए।

'चेतना परिवार' और वंचितों के लिए शिक्षा का मिशन

सेवानिवृत्ति के बाद अधिकांश लोग आराम को प्राथमिकता देते हैं, लेकिन निर्मोही जी ने अपनी दूसरी पारी को समाज के सबसे निचले तबके के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने अपनी धर्मपत्नी कमला आर्य के साथ मिलकर उन बच्चों को शिक्षित करने का बीड़ा उठाया जो कूड़ा बीनने या झुग्गी-झोपड़ियों में रहने को मजबूर थे। इसी संकल्प से 'चेतना स्कूल' की श्रृंखला का जन्म हुआ।

"दीपचंद निर्मोही जी का जीवन सादगी की पराकाष्ठा था। 80 से अधिक की आयु में भी वे अपनी साइकिल पर सवार होकर पानीपत की बस्तियों में जाते थे ताकि कोई बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। उनका जाना समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति है।" - चेतना परिवार के सदस्य

निर्मोही जी ने केवल बच्चों को ही नहीं, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सिलाई, कढ़ाई, ब्यूटी पार्लर और कंप्यूटर शिक्षा के निःशुल्क केंद्र स्थापित किए। उनके परिवार में उनकी धर्मपत्नी कमला आर्य, बेटी सुरेखा और तीन पुत्र सत्यप्रिय, देव प्रिय व विवेक हैं, जो उनके इस सेवा मिशन को आगे बढ़ा रहे हैं।

30 अक्टूबर को आर्य कॉलेज में 'प्रेरणा सभा'

चेतना परिवार की प्रबंध न्यासी निर्मल दत्त ने बताया कि दिवंगत दीपचंद निर्मोही के प्रेरणादायक जीवन और समाजसेवा को याद करने के लिए आगामी 30 अक्टूबर, शुक्रवार को एक विशेष 'प्रेरणा सभा' का आयोजन किया जाएगा। यह सभा दोपहर 1 से 3 बजे तक जी.टी. रोड स्थित आर्य कॉलेज के ओ.पी. सिंगला सभागार में होगी। इस सभा में विभिन्न सामाजिक संगठनों, शिक्षाविदों और साहित्यकारों द्वारा उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी।

साहित्यिक जगत में अमूल्य योगदान

निर्मोही जी एक बहुआयामी लेखक थे। उन्होंने 'सूरज का सफर', 'इसलिए कि मैं औरत हूं', 'कालजयी संत महर्षि दयानंद सरस्वती' और 'विश्व की सर्वाधिक संघर्षशील महिला इंदिरा गांधी' जैसी महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखीं। वे हरिजन सेवक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहे और उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर अनेक साहित्य अकादमियों द्वारा सम्मानित किया गया। उनकी लेखनी हमेशा समाज के वंचित वर्गों और महापुरुषों के आदर्शों के इर्द-गिर्द रही।

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नीरज अहलावत (Neeraj Ahlawat)

नीरज अहलावत (Neeraj Ahlawat)वरिष्ठ पत्रकार एवं संपादक

DainikReality.in | पानीपत, हरियाणा | 10+ वर्षों का डिजिटल पत्रकारिता अनुभव

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नीरज अहलावत हिंदी पत्रकारिता और डिजिटल समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और पाठकों तक उपयोगी जानकारी पहुंचाने को प्राथमिकता देते हैं। DainikReality.in पर उनका फोकस हरियाणा की खबरों, समसामयिक घटनाओं, सरकारी योजनाओं और रोजगार पर तथ्यपरक विश्लेषण प्रस्तुत करना है।

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