शनिवार, 31 अक्टूबर 2026
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नूंह का हरा प्याज दिल्ली की मंडियों में छाया, किसानों की आय बढ़ी; 8000 हेक्टेयर में बंपर पैदावार

नूंह का हरा प्याज दिल्ली की मंडियों में भारी मांग में है, जिससे किसानों को अच्छी कीमत मिल रही है।

नीरज अहलावत
वरिष्ठ पत्रकार एवं मुख्य संपादक
31 अक्टूबर 2026 को 11:57 am बजे2 मिनट पठन0 व्यूज
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नूंह का हरा प्याज दिल्ली की मंडियों में छाया, किसानों की आय बढ़ी; 8000 हेक्टेयर में बंपर पैदावार
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फोटो: दैनिक रियलिटी विशेष डिजिटल डेस्कdainikreality.in

खबर की मुख्य बातें (Key Highlights)

  • •नूंह का हरा प्याज दिल्ली की प्रमुख मंडियों में अत्यधिक मांग में है, किसानों को मिल रहा बेहतर मूल्य।
  • •जिले में लगभग 7,720 से 8,000 हेक्टेयर क्षेत्र में प्याज की खेती, जो किसानों की आय का मुख्य स्रोत है।
  • •बागवानी विभाग सूक्ष्म सिंचाई अपनाने वाले किसानों को ₹15,000 प्रति एकड़ तक का अनुदान प्रदान कर रहा है।
  • •कृषि विभाग आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देकर किसानों को सशक्त कर रहा है।

हरियाणा के नूंह जिले में उगाया जाने वाला हरा प्याज इन दिनों दिल्ली की थोक मंडियों में अपनी अनूठी पहचान बना रहा है, जिससे स्थानीय किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल रहा है। अनुकूल जलवायु और उपजाऊ मिट्टी के कारण नूंह में प्याज की खेती लगातार बढ़ रही है, और इस वर्ष भी लगभग 7,720 से 8,000 हेक्टेयर क्षेत्र में इसकी बंपर पैदावार दर्ज की गई है।

दैनिक रियलिटी की पड़ताल बताती है कि नूंह का यह हरा प्याज न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति दे रहा है, बल्कि हजारों किसानों के लिए आय का एक महत्वपूर्ण और स्थायी स्रोत बन गया है। दिल्ली की मंडियों में इसकी बढ़ती मांग ने किसानों को नई ऊर्जा दी है, जिससे वे आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।

घटना का पूरा विवरण और सिलसिलेवार घटनाक्रम

नूंह जिले की भौगोलिक स्थिति और जलवायु हरी प्याज की खेती के लिए विशेष रूप से उपयुक्त है। यहां की मिट्टी में मौजूद पोषक तत्व और मौसम का संतुलन प्याज की गुणवत्ता और पैदावार को बढ़ाने में सहायक होता है। यही कारण है कि जिले के कई गांवों में, जिनमें पाटूखेड़ी, रवा, बघोला, महूं, तिगांव और रनियाला शामिल हैं, किसान बड़े पैमाने पर प्याज उगाते हैं। फिरोजपुर-झिरका क्षेत्र भी प्याज उत्पादन का एक प्रमुख केंद्र बन गया है, जहां किसान अपनी फसल को सीधे मंडियों तक पहुंचाने के लिए वाहनों का उपयोग करते हैं।

छोटे किसान अपनी कम मात्रा वाली उपज को स्थानीय बाजारों में बेचकर भी लाभ कमाते हैं। इस कृषि गतिविधि ने पूरे मेवात क्षेत्र में रोजगार के कई अवसर पैदा किए हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। किसानों का रुझान अब सूक्ष्म सिंचाई विधियों की ओर बढ़ रहा है, जिससे पानी की खपत कम होती है और खेती की लागत में भी प्रभावी कमी आती है, जो उनके मुनाफे को और बढ़ाती है।

पहलूविवरण
प्याज की खेती का अनुमानित रकबा (नूंह)लगभग 7,720 से 8,000 हेक्टेयर
मुख्य बाजारदिल्ली की थोक मंडियां
जलवायु एवं मिट्टीप्याज की खेती के लिए अत्यंत अनुकूल
प्रमुख उत्पादक गांवपाटूखेड़ी, रवा, बघोला, महूं, तिगांव, रनियाला (फिरोजपुर-झिरका क्षेत्र भी शामिल)
सूक्ष्म सिंचाई पर अनुदान₹15,000 प्रति एकड़ तक (विभागीय योजना के तहत)
जिम्मेदार अधिकारीडॉ. अब्दुल रज्जाक, जिला बागवानी अधिकारी

अधिकारियों, पुलिस व जांच दल की भूमिका व बयान

जिला बागवानी अधिकारी डॉ. अब्दुल रज्जाक ने दैनिक रियलिटी को बताया कि नूंह में प्याज की खेती किसानों की आय का एक महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाग किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों और विशेष रूप से सूक्ष्म सिंचाई विधियों को अपनाने के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रहा है। विभाग का मानना है कि इन तकनीकों से न केवल पानी की बचत होती है, बल्कि फसल की गुणवत्ता और मात्रा में भी सुधार आता है, जिससे किसानों को अधिक लाभ मिलता है।

डॉ. रज्जाक ने यह भी जानकारी दी कि जो किसान नई तकनीकों या सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली का उपयोग करते हैं, उन्हें विभागीय योजना के तहत प्रति एकड़ 15 हजार रुपये तक का अनुदान प्रदान किया जाता है। यह पहल किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उन्हें पारंपरिक खेती से हटकर वैज्ञानिक पद्धतियों की ओर मोड़ने में सहायक सिद्ध हो रही है। बागवानी विभाग के अधिकारी नियमित रूप से खेतों का दौरा कर किसानों को फसल में लगने वाले कीटों और रोगों की रोकथाम के बारे में भी सलाह देते हैं।

नूंह जिले की जलवायु और मिट्टी प्याज की खेती के लिए विशेष रूप से अनुकूल है, यही कारण है कि यहां उत्पादित हरे प्याज की दिल्ली की मंडियों में लगातार मांग बनी रहती है। किसान अब आधुनिक कृषि तकनीकों और सूक्ष्म सिंचाई विधियों को अपनाकर अपनी खेती की लागत कम कर रहे हैं और बेहतर मुनाफा कमा रहे हैं। विभाग किसानों को हर संभव सहायता और अनुदान प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

— डॉ. अब्दुल रज्जाक, जिला बागवानी अधिकारी

स्थानीय जनजीवन, नागरिकों व व्यवस्था पर प्रभाव

नूंह में प्याज की सफल खेती का सीधा सकारात्मक प्रभाव स्थानीय जनजीवन और अर्थव्यवस्था पर देखा जा रहा है। किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार आया है, जिससे वे अपने परिवार का बेहतर ढंग से पालन-पोषण कर पा रहे हैं। कृषि क्षेत्र में यह समृद्धि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा कर रही है, चाहे वह खेती से जुड़े मजदूर हों, परिवहन सेवा प्रदाता हों या स्थानीय व्यापारी।

यह कृषि सफलता न केवल किसानों के लिए बल्कि पूरे मेवात क्षेत्र के लिए एक विकास मॉडल प्रस्तुत करती है। स्थानीय बाजारों में भी ताजे हरे प्याज की उपलब्धता बढ़ी है, जिससे उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण उत्पाद मिल रहे हैं। यह स्थिति क्षेत्र में कृषि-आधारित उद्योगों के विकास की संभावनाओं को भी बल देती है, जिससे भविष्य में और अधिक आर्थिक विकास की उम्मीद है।

आगे की कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई और आगामी कदम

बागवानी विभाग भविष्य में भी नूंह जिले के किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों और बागवानी योजनाओं के प्रति जागरूक करने के लिए प्रतिबद्ध है। विभाग की योजना है कि वह किसानों को वैज्ञानिक पद्धति से खेती करने, पानी का अधिकतम उपयोग करने और बेहतर गुणवत्ता व उत्पादन के लिए निरंतर प्रशिक्षण और मार्गदर्शन प्रदान करेगा। इसके अतिरिक्त, विभाग बाजार लिंकेज को मजबूत करने और किसानों को उनकी उपज के लिए स्थिर और लाभदायक बाजार तक पहुंच सुनिश्चित करने पर भी ध्यान केंद्रित करेगा।

अनुदान योजनाओं का विस्तार और नई कृषि प्रौद्योगिकियों का परिचय भी आगामी कदमों में शामिल होगा, ताकि नूंह के किसान राष्ट्रीय कृषि परिदृश्य में अपनी पहचान और मजबूत कर सकें। यह पहल न केवल नूंह को एक प्रमुख प्याज उत्पादक क्षेत्र के रूप में स्थापित करेगी, बल्कि हरियाणा के कृषि विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी।

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नीरज अहलावत (Neeraj Ahlawat)

नीरज अहलावत (Neeraj Ahlawat)वरिष्ठ पत्रकार एवं संपादक

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