हरियाणा के हिसार स्थित प्रतिष्ठित लाला लाजपत राय पशुचिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (LUVAS) ने युवाओं के लिए रोजगार का नया अवसर उपलब्ध कराया है। विश्वविद्यालय के पशुधन उत्पादन प्रबंधन विभाग के अंतर्गत संचालित एक विशेष शोध परियोजना के लिए पात्र उम्मीदवारों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। यह भर्ती पूरी तरह से कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पर की जा रही है, जो कि संबंधित प्रोजेक्ट की अवधि तक ही प्रभावी रहेगी। जो युवा सरकारी या अर्ध-सरकारी संस्थानों में अनुसंधान आधारित कार्यों से जुड़कर अपना करियर आगे बढ़ाना चाहते हैं, उनके लिए यह एक बेहतरीन मौका है।
जारी की गई आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, यह भर्ती 'फील्ड प्रोजेनी टेस्टिंग प्रोग्राम फॉर बफेलो इम्प्रूवमेंट (मुरा)' नामक योजना के तहत हो रही है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र स्तर पर पशुपालन और दुग्ध उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार करना है। पद के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 5 नवंबर 2026 निर्धारित की गई है। तय समय सीमा के बाद प्राप्त होने वाले किसी भी आवेदन पत्र पर विचार नहीं किया जाएगा, इसलिए अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि वे समय रहते अपनी आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें।
भर्ती से संबंधित मुख्य विवरण और पात्रता मानदंड
इस परियोजना के तहत प्रोजेक्ट असिस्टेंट के कुल 1 पद पर भर्ती की जानी है, जो कि अनारक्षित (General) श्रेणी के अंतर्गत आता है। इस पद के लिए शैक्षिक योग्यता की बात करें तो आवेदक के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से बीएससी (B.Sc.) की डिग्री या इंजीनियरिंग एवं टेक्नोलॉजी में 3 साल का डिप्लोमा होना अनिवार्य है। इसके अलावा, जिन उम्मीदवारों के पास विज्ञान विषय के साथ 10+2 की परीक्षा उत्तीर्ण होने के साथ-साथ वेटरनरी लेबोरेटरी टेक्नोलॉजी (DVLT) या डेयरी टेक्नोलॉजी (DIDT) में डिप्लोमा है, वे भी इस पद के लिए आवेदन करने के पात्र हैं।
आवेदकों की आयु सीमा न्यूनतम 18 वर्ष से लेकर अधिकतम 50 वर्ष तक तय की गई है, जिसकी गणना आवेदन की अंतिम तिथि यानी 5 नवंबर 2026 के आधार पर की जाएगी। चयन प्रक्रिया और पात्रता से जुड़ी अन्य विस्तृत जानकारियां विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध अधिसूचना में देखी जा सकती हैं।
| विशेषताएं | विवरण |
|---|---|
| संस्थान का नाम | लाला लाजपत राय पशुचिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (LUVAS), हिसार |
| विभाग | पशुधन उत्पादन प्रबंधन विभाग, पशु चिकित्सा विज्ञान महाविद्यालय |
| परियोजना का नाम | फील्ड प्रोजेनी टेस्टिंग प्रोग्राम फॉर बफेलो इम्प्रूवमेंट (मुरा) |
| पदों की संख्या | 01 पद (प्रोजेक्ट असिस्टेंट) |
| श्रेणी | सामान्य (General Category) |
| मासिक मानदेय | 20,000 रुपये + नियमानुसार एचआरए (HRA) |
| आयु सीमा | 18 वर्ष से 50 वर्ष (5 नवंबर 2026 तक) |
| आवेदन की अंतिम तिथि | 05 नवंबर 2026 (शाम 5:00 बजे तक) |
| आवेदन का माध्यम | ऑफ़लाइन (डाक, बाय हैंड या ईमेल द्वारा) |
आवेदन भेजने का तरीका और जरूरी निर्देश
इच्छुक उम्मीदवारों को विश्वविद्यालय की विज्ञप्ति में दिए गए निर्धारित प्रिफॉर्मा (आवेदन पत्र) को भरकर उसके साथ अपने सभी शैक्षणिक और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की स्व-प्रमाणित प्रतियां संलग्न करनी होंगी। पूर्ण रूप से भरे हुए आवेदन पत्र को प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, पशुधन उत्पादन प्रबंधन विभाग, पशु चिकित्सा विज्ञान महाविद्यालय, LUVAS, हिसार - 125004 के पते पर भेजना होगा। उम्मीदवार चाहें तो इसे सीधे डाक द्वारा भेज सकते हैं, विभाग में खुद जाकर जमा करवा सकते हैं या फिर आधिकारिक ईमेल आईडी पर डिजिटल रूप से भी भेज सकते हैं।
यह नियुक्ति पूरी तरह से अस्थायी और प्रोजेक्ट की अवधि पर निर्भर है। परियोजना समाप्त होने पर चयनित उम्मीदवार की सेवाएं स्वतः समाप्त मान ली जाएंगी। इसके अलावा, कार्य संतोषजनक न पाए जाने पर या फंडिंग एजेंसी से बजट मिलने में रुकावट आने पर भी अनुबंध को कभी भी समाप्त किया जा सकता है। चयनित अभ्यर्थी को यूनिवर्सिटी के नियमों के अनुसार कार्य करना होगा और किसी भी प्रकार के नियमित कर्मचारियों वाले लाभ (जैसे जीपीएफ या सीपीएफ) इस अनुबंध पर लागू नहीं होंगे।
"यह परियोजना क्षेत्र स्तर पर पशुधन सुधार और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। योग्य युवाओं को अनुसंधान कार्यों से जुड़ने का अवसर मिल रहा है, जिससे उन्हें फील्ड रिसर्च का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होगा।" - प्रशासनिक सूत्र, LUVAS हिसार
स्थानीय युवाओं और कृषि-शोध क्षेत्र पर प्रभाव
हरियाणा जैसे कृषि प्रधान राज्य में जहां पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है, इस तरह की परियोजनाएं युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खोलती हैं। हिसार और आसपास के जिलों के उन युवाओं के लिए यह एक सुनहरा अवसर है जो वेटनरी साइंसेज, डेयरी टेक्नोलॉजी या बायोलॉजिकल साइंसेज में अपनी पढ़ाई पूरी कर चुके हैं। इस पद पर कार्य करने से न केवल उन्हें व्यावहारिक अनुसंधान (Practical Research) का अनुभव मिलेगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में पशु पालकों के साथ सीधा संवाद स्थापित करने की उनकी कार्यकुशलता भी विकसित होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के प्रोजेक्ट्स से स्थानीय स्तर पर वैज्ञानिक तरीकों से पशुओं की नस्ल सुधारने में मदद मिलती है, जिससे अंततः प्रदेश के पशुपालकों और किसानों को आर्थिक लाभ पहुंचता है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आवेदन करने से पहले सभी उम्मीदवार अपनी योग्यताओं की भली-भांति जांच कर लें ताकि अंतिम समय में किसी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके।





