हरियाणा (दैनिक रियलिटी विशेष ग्राउंड रिपोर्ट): करनाल जिला में मधुबन थाना क्षेत्र के बसताड़ा टोल प्लाजा पर इनोवा गाड़ी से तीन आईईडी, हथियार, कारतूस और नकदी के साथ पकड़े गए आरोपी परमिंदर सिंह उर्फ पिंदर को अदालत से राहत नहीं मिली।। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर संबंधित अधिकारियों व स्थानीय स्तर पर आवश्यक संज्ञान लिया जा रहा है। प्राप्त विश्वसनीय जानकारियों व प्राथमिक तथ्यों के अनुसार, पूरे मामले को लेकर विभागीय स्तर पर आवश्यक पड़ताल जारी है ताकि घटनाक्रम से जुड़े हर पहलू की प्रामाणिक स्थिति स्पष्ट हो सके।
मामले की पूरी पृष्ठभूमि और क्या है पूरा घटनाक्रम?
इस दौरान दिल्ली नंबर की सफेद इनोवा को रोककर तलाशी ली गई।। गाड़ी से तीन आईईडी, दो मैगजीन, 31 जिंदा कारतूस, छह मोबाइल फोन और 1.30 लाख रुपए नकद मिले थे।। पुलिस ने गाड़ी में सवार परमिंदर सिंह उर्फ पिंदर, गुरप्रीत सिंह उर्फ गोपी, अमनदीप सिंह उर्फ दीप और भूपिंदर सिंह को गिरफ्तार किया था।। इस संबंध में मधुबन थाने में एफआईआर दर्ज हुई थी।।
| न्यायिक बिंदु | अदालत व मामले का विवरण |
|---|---|
| संबंधित न्यायालय / पीठ | पंचकूला ज़िला एवं सत्र न्यायालय |
| मुकदमा / याचिका संदर्भ | करनाल में पकड़े गए आतंकियों को नहीं मिली जमानत |
| प्रमुख आंकड़े / राशि / तथ्य | 31 अक्टूबर, 5 मई, 1.30 लाख, 24 मई |
| अदालत का ताज़ा आदेश | याचिका / अर्जी अदालत द्वारा खारिज, ट्रायल जारी |
अधिकारियों, पुलिस व जांच दल की क्या है भूमिका?
इसमें विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धारा 4 और 5, यूएपीए की धारा 13, 18 और 20 तथा आर्म्स एक्ट की धारा 25 लगाई गई थी।। गृह मंत्रालय के आदेश पर एनआईए ने संभाली जांच केंद्रीय गृह मंत्रालय, नई दिल्ली के 24 मई 2022 के आदेश के बाद एनआईए ने इसी दिन मामला दर्ज कर जांच शुरू की।। जांच एजेंसी के अनुसार, पाकिस्तान में बैठा हरविंदर सिंह संधू उर्फ रिंदा प्रतिबंधित आतंकी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल (बीकेआई) के नेटवर्क के जरिए भारत में आतंकी गतिविधियों की साजिश रच रहा था।। आरोप है कि सीमा पार से ड्रोन के माध्यम से विस्फोटक, हथियार और गोला-बारूद भेजे जाते थे, जिनका इस्तेमाल आतंकी हमलों और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के लिए होना था।। गोपी ने परमिंदर को नेटवर्क से जोड़ा, भूपिंदर की भी भर्ती कराई एनआईए की जांच के मुताबिक, रिंदा ने गुरप्रीत सिंह उर्फ गोपी को अपने नेटवर्क में शामिल किया था।।
'प्रशासनिक स्तर पर पूरे मामले की बारीकी से मॉनिटरिंग की जा रही है। कानून और स्थापित नियमों के तहत निष्पक्ष जांच और त्वरित कार्रवाई हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।' - संबंधित प्राधिकारी
स्थानीय जनजीवन, नागरिकों व व्यवस्था पर सीधा असर
न्यायिक प्रक्रिया के तहत अदालत द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों, दोनों पक्षों की दलीलों और कानूनी प्रावधानों को गंभीरता से परखा गया। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस अदालती निर्देश का सीधा प्रभाव केस की आगामी सुनवाई और आगे की कानूनी कार्यवाही पर पड़ेगा। संबंधित पक्षों की निगाहें अब अदालत के आगामी आदेशों पर टिकी हैं।
इसके बाद गोपी ने मार्च 2022 में परमिंदर सिंह उर्फ पिंदर को जोड़ा।। परमिंदर पर आगे भूपिंदर सिंह को भी नेटवर्क में भर्ती करने का आरोप है।। जांच में सितंबर 2021 से अप्रैल 2022 के बीच पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए पिस्तौल, हथगोले, आईईडी और नशीले पदार्थों की कई खेप मिलने की बात सामने आई।। इन खेपों को अलग-अलग स्थानों पर पहुंचाया गया।। परमिंदर और गोपी पर सीमा के पास नए ठिकाने तलाशने का भी आरोप लगाया गया, ताकि आगे हथियार और नशीले पदार्थ पहुंचाए जा सकें।। 2024 में तय हुए थे आरोपी के खिलाफ आरोप जांच पूरी होने के बाद एनआईए ने अदालत में चालान पेश किया था।। 30 जनवरी 2024 को अदालत ने परमिंदर के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी, आर्म्स एक्ट की धारा 25(1-एए), यूएपीए की धारा 18, 20, 23 और 39 तथा विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धारा 4 और 5 के तहत आरोप तय किए थे।। बचाव पक्ष ने लंबी हिरासत और सह आरोपी की जमानत का दिया हवाला परमिंदर की ओर से अधिवक्ता बृज भूषण ने कहा कि आरोपी 5 मई 2022 से जेल में है।। जांच पूरी हो चुकी है और चालान भी पेश किया जा चुका है।। कुल 164 गवाहों में से 72 महत्वपूर्ण गवाहों की गवाही हो चुकी है।। मुकदमे की सुनवाई पूरी होने में अभी लंबा समय लग सकता है, इसलिए आरोपी को जेल में रखने का कोई लाभ नहीं है।। बचाव पक्ष ने सह आरोपी सुखबीर सिंह उर्फ जशन को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से मिली जमानत का हवाला देकर समानता के आधार पर राहत मांगी।। एनआईए ने सात अन्य मामलों का भी किया उल्लेख एनआईए के विशेष लोक अभियोजक गगनदीप सिंह वासु ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी को हथियारों और विस्फोटकों के साथ मौके पर पकड़ा गया था।। उस पर आतंकी नेटवर्क में सक्रिय भूमिका निभाने, अन्य आरोपियों की भर्ती करने और हथियारों की खेप के लिए ठिकाने तलाशने के आरोप हैं।। एजेंसी ने बताया कि आरोपी के खिलाफ लुधियाना, जालंधर और फिरोजपुर में आर्म्स एक्ट, एनडीपीएस, लूट और धोखाधड़ी सहित सात अन्य मामले दर्ज हैं।। इनमें फिरोजपुर का एक मामला यूएपीए के तहत लंबित है।। हिरासत अवधि पर बचाव पक्ष ने पांच साल पांच महीने, जबकि एनआईए ने चार साल पांच महीने बताई।। एजेंसी ने यह भी कहा कि 164 में से 72 महत्वपूर्ण गवाहों की गवाही हो चुकी है, लेकिन सीआरपीसी की धारा 164 के तहत बयान देने वाले संरक्षित गवाहों की गवाही बाकी है।। अलग भूमिका के कारण सह आरोपी की जमानत का लाभ नहीं विशेष न्यायाधीश (एनआईए) विजयंत सहगल ने सुप्रीम कोर्ट के एनआईए बनाम जाहूर अहमद शाह वटाली (2019) और गुरविंदर सिंह बनाम पंजाब राज्य (2024) के फैसलों का उल्लेख किया।। अदालत ने कहा कि यूएपीए के मामलों में जमानत पर विचार करते समय आरोपों के प्रथम दृष्टया सही होने की स्थिति देखी जाती है।। परमिंदर के खिलाफ साक्ष्य और गवाहों के बयान उसकी कथित भूमिका दर्शाते हैं।। सुखबीर सिंह उर्फ जशन की भूमिका अलग होने के कारण उसे मिली जमानत का लाभ परमिंदर को नहीं दिया जा सकता।। अदालत ने हिरासत अवधि और मुकदमे की स्थिति को देखते हुए भी जमानत का कोई असाधारण आधार नहीं पाया और याचिका खारिज कर दी।। साथ ही स्पष्ट किया कि जमानत पर की गई टिप्पणियां मुकदमे के अंतिम फैसले को प्रभावित नहीं करेंगी।। 19 अक्टूबर को पेश हुई थी जमानत याचिका जमानत याचिका बीती 19 अक्टूबर को पेश और दर्ज हुई थी।। इस पर 31 अक्टूबर को फैसला सुनाया गया।। आरोपी की ओर से अधिवक्ता बृज भूषण और एनआईए की ओर से विशेष लोक अभियोजक गगनदीप सिंह वासु ने पैरवी की।। This website follows the DNPA Code of Ethics.।
आगे की कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई और आगामी कदम
आगामी दिनों में इस पूरे मामले को लेकर विभागीय स्तर पर उच्चस्तरीय समीक्षा की जा सकती है, जिसके आधार पर आगे की कार्ययोजना तय होगी। दैनिक रियलिटी की विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग टीम पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है और पाठकों तक सबसे पहले प्रामाणिक जानकारी पहुंचाती रहेगी।





