रविवार, 1 नवंबर 2026
जींदब्रेकिंग

जींद के दिग्गज हॉकी खिलाड़ी मास्टर धर्मपाल लाठर का निधन, मेजर ध्यानचंद के शिष्य ने 1971 में दिलाया था गोल्ड

जींद के शादीपुर निवासी पूर्व राष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी मास्टर धर्मपाल लाठर का 85 वर्ष की आयु में निधन।

नीरज अहलावत
वरिष्ठ पत्रकार एवं मुख्य संपादक
1 नवंबर 2026 को 08:18 am बजे2 मिनट पठन0 व्यूज
शेयर करें:
जींद के दिग्गज हॉकी खिलाड़ी मास्टर धर्मपाल लाठर का निधन, मेजर ध्यानचंद के शिष्य ने 1971 में दिलाया था गोल्ड
दैनिकरियलिटी
जींद
दैनिक रियलिटी विशेष कवरेज
dainikreality.in
फोटो: दैनिक रियलिटी विशेष डिजिटल डेस्कdainikreality.in

खबर की मुख्य बातें (Key Highlights)

  • •जींद के जुलाना क्षेत्र के गांव शादीपुर के रहने वाले थे पूर्व राष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी मास्टर धर्मपाल लाठर।
  • •हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद से पटियाला में प्राप्त किया था विशेष खेल प्रशिक्षण और मार्गदर्शन।
  • •वर्ष 1971 में हरियाणा की टीम की कप्तानी करते हुए प्रदेश की झोली में डाला था ऐतिहासिक गोल्ड मेडल।
  • •खेल के प्रति समर्पण के कारण राजकीय विद्यालय में पीटीआई के पद पर रहकर सैकड़ों खिलाड़ियों को तराशा।

हरियाणा के खेल इतिहास के एक स्वर्णिम अध्याय का आज समापन हो गया। प्रदेश के स्थापना दिवस के अवसर पर जींद जिले के जुलाना क्षेत्र से एक अत्यंत दुखद समाचार प्राप्त हुआ है। भारतीय हॉकी के गौरवशाली युग के साक्षी और पूर्व राष्ट्रीय खिलाड़ी मास्टर धर्मपाल लाठर का 85 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। वह पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनके निधन की सूचना मिलते ही खेल जगत, स्थानीय प्रशासन और जुलाना क्षेत्र के ग्रामीण अंचलों में शोक की लहर दौड़ गई है। धर्मपाल लाठर केवल एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि उस दौर के प्रतिनिधि थे जब भारतीय हॉकी पूरी दुनिया में अपना लोहा मनवाती थी।

मेजर ध्यानचंद के सानिध्य में निखरा था खेल कौशल

मास्टर धर्मपाल लाठर की खेल यात्रा भारतीय हॉकी के उस दौर की याद दिलाती है जब संसाधन सीमित थे लेकिन जज्बा असीमित। उन्हें दुनिया के महानतम हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद से पटियाला के राष्ट्रीय खेल संस्थान (NIS) में प्रशिक्षण प्राप्त करने का दुर्लभ सौभाग्य मिला था। मेजर ध्यानचंद के मार्गदर्शन में उन्होंने न केवल खेल की बारीकियां सीखीं, बल्कि अनुशासन और टीम भावना को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाया। उनके खेल कौशल की चर्चा आज भी पुराने खिलाड़ियों के बीच प्रमुखता से की जाती है।

विशेषताविवरण
खिलाड़ी का नाममास्टर धर्मपाल लाठर
मूल निवासगांव शादीपुर, जुलाना (जींद)
खेल विधाहॉकी (राष्ट्रीय स्तर)
प्रशिक्षक (कोच)मेजर ध्यानचंद (हॉकी के जादूगर)
प्रमुख उपलब्धि1971 राष्ट्रीय चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल
हरियाणा टीम कप्तानी1969 से 1974 (दो वर्ष कप्तान रहे)
पेशासेवानिवृत्त पीटीआई, शिक्षा विभाग

1971 का वह ऐतिहासिक स्वर्ण पदक और कप्तानी का दौर

धर्मपाल लाठर के पोते नीरज ने उनके गौरवशाली अतीत को याद करते हुए बताया कि उनके दादा वर्ष 1969 से 1974 तक निरंतर हरियाणा राज्य की हॉकी टीम का मुख्य हिस्सा रहे। इस पांच साल के कार्यकाल के दौरान उन्होंने दो वर्षों तक टीम की कमान संभाली और कप्तानी की। उनके नेतृत्व में ही वर्ष 1971 में हरियाणा की टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल जीता था। यह वह समय था जब हरियाणा में खेलों के प्रति आज जैसी जागरूकता और सरकारी सुविधाएं नहीं थीं, फिर भी उन्होंने अपनी मेहनत के दम पर प्रदेश का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया।

खेल से शिक्षा जगत तक का सफर: युवाओं के प्रेरणास्रोत

उनकी खेल प्रतिभा और उपलब्धियों को देखते हुए हरियाणा सरकार ने उन्हें शिक्षा विभाग में पीटीआई (Physical Training Instructor) के पद पर नियुक्त किया था। उन्होंने राजकीय विद्यालयों में अपनी सेवाएं देते हुए न केवल छात्रों को शारीरिक रूप से सुदृढ़ बनाया, बल्कि ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले युवाओं को खेलों की ओर प्रेरित किया। उनके सिखाए हुए कई खिलाड़ी आज विभिन्न सरकारी सेवाओं और खेल संस्थानों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वह हमेशा युवाओं से कहते थे कि खेल केवल मेडल जीतने के लिए नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण के लिए खेला जाना चाहिए।

परिवार और समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति

धर्मपाल लाठर अपने पीछे एक भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके परिवार में 70 वर्षीया पत्नी अंगूरी देवी, दो बेटे यशपाल और रजनीश, बहुएं सुदेश और निर्मला, पोते नीरज और विवेक, पोत्रवधुएं अंजू और अन्नू तथा पड़पोता यशित शामिल हैं। उनके अंतिम संस्कार में क्षेत्र के कई दिग्गज खिलाड़ियों, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने हिस्सा लिया और उन्हें नम आंखों से विदाई दी। स्थानीय लोगों का कहना है कि धर्मपाल लाठर के निधन से शादीपुर गांव ने अपना एक अनमोल रत्न खो दिया है, जिसकी भरपाई संभव नहीं है।

आगामी पीढ़ी के लिए विरासत

मास्टर धर्मपाल लाठर का जीवन संघर्ष और सफलता की एक ऐसी कहानी है जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। ऐसे समय में जब हॉकी फिर से भारत में अपनी खोई हुई पहचान वापस पा रही है, धर्मपाल लाठर जैसे दिग्गजों का योगदान सदैव याद रखा जाएगा। जुलाना और जींद के खेल संगठनों ने उनके सम्मान में शोक सभाएं आयोजित करने और उनकी स्मृति में स्थानीय खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन करने का विचार व्यक्त किया है ताकि उनकी खेल भावना को जीवित रखा जा सके।

इस खबर को अपने दोस्तों व ग्रुप्स में शेयर करें:
व्हाट्सएप
नीरज अहलावत (Neeraj Ahlawat)

नीरज अहलावत (Neeraj Ahlawat)वरिष्ठ पत्रकार एवं संपादक

DainikReality.in | पानीपत, हरियाणा | 10+ वर्षों का डिजिटल पत्रकारिता अनुभव

लेखक प्रोफाइल व सभी खबरें →

नीरज अहलावत हिंदी पत्रकारिता और डिजिटल समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और पाठकों तक उपयोगी जानकारी पहुंचाने को प्राथमिकता देते हैं। DainikReality.in पर उनका फोकस हरियाणा की खबरों, समसामयिक घटनाओं, सरकारी योजनाओं और रोजगार पर तथ्यपरक विश्लेषण प्रस्तुत करना है।

संपादकीय प्राथमिकता:निष्पक्ष खबरेंतथ्यपरक जानकारीसरल हिंदीपाठकों का विश्वास
जींद के दिग्गज हॉकी खिलाड़ी मास्टर धर्मपाल लाठर का निधन, मेजर ध्यानचंद के शिष्य ने 1971 में दिलाया था गोल्ड | दैनिक रियलिटी