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जींद में प्रशासनिक सुस्ती पर डीसी का हंटर: बिजली निगम और बीडीपीओ सहित कई बड़े अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस, सीएम विंडो की शिकायतों में लापरवाही पड़ी भारी

जींद की उपायुक्त डॉ. वैशाली शर्मा ने सीएम विंडो की शिकायतों के समाधान में देरी और लापरवाही बरतने पर बिजली निगम, बैंक और बीडीपीओ समेत कई विभागों के अधिकारियों को।

नीरज अहलावत
वरिष्ठ पत्रकार एवं मुख्य संपादक
2 नवंबर 2026 को 12:12 pm बजे2 मिनट पठन0 व्यूज
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जींद में प्रशासनिक सुस्ती पर डीसी का हंटर: बिजली निगम और बीडीपीओ सहित कई बड़े अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस, सीएम विंडो की शिकायतों में लापरवाही पड़ी भारी
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फोटो: दैनिक रियलिटी विशेष डिजिटल डेस्कdainikreality.in

खबर की मुख्य बातें (Key Highlights)

  • •डीसी डॉ. वैशाली शर्मा ने सीएम विंडो की शिकायतों के प्रति उदासीनता पर कड़ा रुख अपनाया।
  • •बिजली निगम, बीडीपीओ, पीडब्ल्यूडी और बैंक मैनेजर समेत कई विभागों के अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी।
  • •मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के ड्रीम प्रोजेक्ट 'सीएम विंडो' की निगरानी में लापरवाही बर्दाश्त नहीं करने की चेतावनी।
  • •अधिकारियों को केवल पोर्टल पर खानापूर्ति के बजाय धरातल पर स्थायी समाधान और एटीआर अपलोड करने के निर्देश।

जींद जिले में प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली को चुस्त-दुरुस्त करने और आम जनता की शिकायतों के त्वरित निवारण के लिए जिला प्रशासन ने अब सख्त तेवर अपना लिए हैं। उपायुक्त (DC) डॉ. वैशाली शर्मा ने मुख्यमंत्री विंडो (CM Window) पर प्राप्त जनशिकायतों के निपटारे में कोताही बरतने और गैर-जिम्मेदाराना रवैया अपनाने वाले विभिन्न विभागों के अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। सोमवार को हुई समीक्षा बैठक के बाद डीसी ने कई बड़े अधिकारियों को कारण बताओ (Show-Cause) नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है।

प्रशासनिक अधिकारियों की यह लापरवाही उस समय उजागर हुई जब डीसी ने सीएम विंडो पोर्टल पर लंबित शिकायतों की गहनता से समीक्षा की। जांच में पाया गया कि कई अधिकारी शिकायतों को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं और समाधान की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी की जा रही है। डीसी डॉ. वैशाली शर्मा ने स्पष्ट किया कि सीएम विंडो आम नागरिकों की समस्याओं को सीधे सरकार तक पहुँचाने का एक सशक्त माध्यम है और इसमें किसी भी स्तर पर ढिलाई को सरकार के निर्देशों की अवहेलना माना जाएगा।

इन विभागों के अधिकारियों पर गिरी गाज, थमाए गए नोटिस

डीसी द्वारा जारी किए गए नोटिसों की जद में बिजली निगम से लेकर बैंकिंग और विकास खंड स्तर के अधिकारी आए हैं। प्रशासनिक रिपोर्ट के अनुसार, जिन अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं, उनमें ग्रामीण विकास, बुनियादी ढांचा और जन सेवा से जुड़े महत्वपूर्ण विभाग शामिल हैं। डीसी ने सख्त लहजे में कहा कि जनता की समस्याओं का समाधान करना अधिकारियों का प्राथमिक दायित्व है और वे अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकते।

विभाग का नामअधिकारी/पदस्थान/क्षेत्र
दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगमकार्यकारी अभियंता (XEN)जींद
विकास एवं पंचायत विभागबीडीपीओनरवाना एवं जुलाना
लोक निर्माण विभाग (B&R)कार्यकारी अभियंताजींद
नगर पालिका प्रशासनसचिवउचाना
भारतीय स्टेट बैंक (SBI)शाखा प्रबंधकजींद
दूरसंचार विभाग (BSNL)जीएम टेलीकॉमजींद
हैफेड (HAFED)जीएमजींद
आधार कार्ड जिला इकाईजिला कोऑर्डिनेटरजींद

एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) में फर्जीवाड़ा और खानापूर्ति पर रोक

समीक्षा के दौरान यह भी सामने आया कि कुछ अधिकारी केवल पोर्टल पर शिकायत का निपटारा दर्शाने के लिए खानापूर्ति कर रहे हैं। डीसी ने निर्देश दिए कि केवल पोर्टल पर स्टेटस अपडेट कर देना पर्याप्त नहीं है। समाधान की गुणवत्ता उच्च श्रेणी की होनी चाहिए और उससे संबंधित 'एक्शन टेकन रिपोर्ट' (ATR) को अनिवार्य रूप से साक्ष्यों के साथ अपलोड किया जाना चाहिए। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायतकर्ता की समस्या का वास्तविक समाधान हुआ है या नहीं।

"सीएम विंडो सरकार और प्रदेश की जनता के बीच विश्वास का एक पारदर्शी सेतु है। इसकी निगरानी स्वयं मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की जाती है। शिकायतों के निपटारे में लापरवाही, अनावश्यक देरी या निर्धारित प्रक्रिया की अनदेखी करने वाले किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा। सभी विभागाध्यक्ष नियमित रूप से लंबित मामलों की समीक्षा करें और गुणवत्तापूर्ण समाधान सुनिश्चित करें।" - डॉ. वैशाली शर्मा, उपायुक्त, जींद।

जनता की समस्याओं के प्रति जवाबदेही तय करने की कवायद

जींद प्रशासन की इस कार्रवाई से उन अधिकारियों में हड़कंप मच गया है जो अब तक शिकायतों को ठंडे बस्ते में डाल रहे थे। डीसी ने निर्देश दिए हैं कि सभी विभाग यह सुनिश्चित करें कि शिकायतकर्ता को बार-बार कार्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें। यदि किसी शिकायत के समाधान में तकनीकी अड़चन है, तो उसे स्पष्ट रूप से दर्ज किया जाए, लेकिन जानबूझकर की गई देरी पर विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

आगे की कार्रवाई और प्रशासनिक सुधार

कारण बताओ नोटिस जारी होने के बाद अब संबंधित अधिकारियों को एक निश्चित समय सीमा के भीतर अपना जवाब दाखिल करना होगा। यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, तो प्रशासन उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए राज्य सरकार और संबंधित मुख्यालयों को सिफारिश भेजेगा। आगामी दिनों में डीसी द्वारा औचक निरीक्षण और शिकायतों के रैंडम वेरिफिकेशन की योजना भी बनाई गई है ताकि जमीनी हकीकत का पता लगाया जा सके।

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नीरज अहलावत (Neeraj Ahlawat)

नीरज अहलावत (Neeraj Ahlawat)वरिष्ठ पत्रकार एवं संपादक

DainikReality.in | पानीपत, हरियाणा | 10+ वर्षों का डिजिटल पत्रकारिता अनुभव

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नीरज अहलावत हिंदी पत्रकारिता और डिजिटल समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और पाठकों तक उपयोगी जानकारी पहुंचाने को प्राथमिकता देते हैं। DainikReality.in पर उनका फोकस हरियाणा की खबरों, समसामयिक घटनाओं, सरकारी योजनाओं और रोजगार पर तथ्यपरक विश्लेषण प्रस्तुत करना है।

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