हरियाणा के जींद शहर की वर्षों पुरानी पेयजल समस्या के स्थाई समाधान की दिशा में एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। जींद के गांव बडौदी में निर्माणाधीन विशाल जलघर प्रोजेक्ट (Canal Based Water Project) का लगभग 75 प्रतिशत कार्य पूरा कर लिया गया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार की यह महत्वाकांक्षी योजना अब अपने अंतिम चरण की ओर अग्रसर है। इस परियोजना के धरातल पर उतरने के बाद जींद शहरवासियों को साल 2027 के शुरुआती महीनों में भाखड़ा नहर का 'नीला पानी' (शुद्ध पेयजल) उपलब्ध होने लगेगा। वर्तमान में जींद के अधिकांश हिस्सों में भूजल स्तर गिरने और पानी के खारेपन के कारण नागरिकों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, जिसे यह प्रोजेक्ट पूरी तरह समाप्त कर देगा।
परियोजना की लागत और तकनीकी संरचना का विश्लेषण
जींद विधानसभा क्षेत्र के विकास कार्यों की समीक्षा करते हुए हरियाणा विधानसभा के डिप्टी स्पीकर डॉ. कृष्ण मिड्ढा ने बताया कि यह प्रोजेक्ट केवल एक जलघर नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक जीवनरेखा है। बडौदी गांव में लगभग 41 एकड़ की विशाल भूमि पर इस जलघर का निर्माण किया जा रहा है। कुल 350 करोड़ रुपये से अधिक के बजट वाली इस योजना को विभिन्न खंडों में विभाजित किया गया है। इसमें से लगभग 90 करोड़ रुपये केवल जलघर के बुनियादी ढांचे और टैंकों के निर्माण पर खर्च किए जा रहे हैं, जबकि 80 करोड़ रुपये शहर के भीतर वितरण प्रणाली को आधुनिक बनाने के लिए आवंटित हैं।
| मुख्य घटक | विवरण एवं आंकड़े |
|---|---|
| कुल प्रोजेक्ट लागत | ₹350 करोड़ से अधिक |
| कुल आवंटित भूमि | 41 एकड़ (गांव बडौदी) |
| मुख्य पाइपलाइन की लंबाई | 28 किलोमीटर (48 इंच व्यास) |
| शहर में पाइपलाइन नेटवर्क | 300 किलोमीटर |
| बूस्टिंग स्टेशनों की संख्या | 18 नए बूस्टर |
| स्रोत नहर | नरवाना-भाखड़ा ब्रांच |
| वर्तमान प्रगति | 75% कार्य पूर्ण |
बुनियादी ढांचे का निर्माण और वर्तमान प्रगति
तकनीकी विवरण के अनुसार, बडौदी जलघर में कुल चार विशाल वाटर टैंक बनाए जाने हैं, जिनमें से तीन टैंकों का निर्माण कार्य शत-प्रतिशत पूरा हो चुका है। शेष एक टैंक और वाटर ट्रीटमेंट प्लांट (WTP) का कार्य भी 75 प्रतिशत तक संपन्न हो गया है। सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा नरवाना-भाखड़ा ब्रांच से जलघर तक पानी लाना है, जिसके लिए 28 किलोमीटर लंबी और 48 इंच व्यास की भारी-भरकम पाइपलाइन बिछाई जा रही है। इसका कार्य भी तेजी से प्रगति पर है। इसके साथ ही, जींद शहर के आंतरिक हिस्सों में पानी की बर्बादी रोकने और समान दबाव से आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए 18 नए बूस्टर स्टेशन और 300 किलोमीटर लंबी वितरण पाइपलाइन बिछाने का कार्य समानांतर रूप से चल रहा है।
"बडौदी जलघर प्रोजेक्ट जींद के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा। यह परियोजना आगामी 50 वर्षों की जनसंख्या वृद्धि और पानी की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन की गई है। हमने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि गुणवत्ता से कोई समझौता न हो और इसे निर्धारित समय सीमा यानी 2027 की शुरुआत से पहले ही चालू करने का प्रयास किया जाए।" - डॉ. कृष्ण मिड्ढा, डिप्टी स्पीकर, हरियाणा विधानसभा।
जनजीवन और भविष्य की जरूरतों पर प्रभाव
जींद शहर में वर्तमान में नहरी पानी की आपूर्ति सीमित है और शहर का एक बड़ा हिस्सा अभी भी ट्यूबवेल और भूजल पर निर्भर है। भूजल में टीडीएस (TDS) की अधिक मात्रा के कारण स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं बनी रहती हैं। भाखड़ा नहर का पानी मिलने से न केवल स्वास्थ्य में सुधार होगा, बल्कि जलजनित बीमारियों में भी कमी आएगी। यह परियोजना मुख्यमंत्री की उन घोषणाओं का हिस्सा है जिसे समयबद्ध तरीके से पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। डिप्टी स्पीकर ने स्पष्ट किया कि सीएम नायब सिंह सैनी के मार्गदर्शन में जींद में सड़क, सीवरेज, स्वास्थ्य और शिक्षा के साथ-साथ बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा रहा है।
प्रशासनिक निगरानी और आगामी कदम
प्रशासनिक स्तर पर इस प्रोजेक्ट की साप्ताहिक निगरानी की जा रही है ताकि किसी भी प्रकार की तकनीकी बाधा को तुरंत दूर किया जा सके। जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) के इंजीनियरों को निर्देश दिए गए हैं कि पाइपलाइन बिछाने के दौरान उखाड़ी गई सड़कों की मरम्मत भी प्राथमिकता के आधार पर की जाए। आगामी महीनों में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के मशीनरी इंस्टॉलेशन और टेस्टिंग का काम शुरू होगा। यदि कार्य की यही गति बनी रही, तो संभावना है कि 2026 के अंत तक ट्रायल रन शुरू कर दिया जाए और नए साल 2027 के उपहार के रूप में जींद को भाखड़ा का पानी मिलना शुरू हो जाए।





