हरियाणा के हिसार जिले में स्थित नागरिक अस्पताल (सिविल अस्पताल) परिसर से एक बेहद संवेदनशील और चिंताजनक मामला सामने आया है। मंगलवार सुबह अस्पताल के पार्क में स्थित झाड़ियों के पास एक करीब 8 माह का विकसित भ्रूण लावारिस अवस्था में पड़ा मिला। इस घटना के सार्वजनिक होते ही अस्पताल प्रशासन और वहां मौजूद मरीजों व तीमारदारों के बीच सनसनी फैल गई। सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारी और स्थानीय पुलिस की टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू की।
प्राप्त विवरण के अनुसार, घटना की जानकारी सबसे पहले अस्पताल के कर्मचारियों को मिली, जिन्होंने पार्क के एक कोने में भ्रूण को देखा। इसके तुरंत बाद डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. सुभाष खतरेजा को सूचित किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पीएनडीटी (PNDT) नोडल अधिकारी एवं डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. अनामिका बिश्नोई स्वयं जांच दल के साथ मौके पर पहुंचीं। प्राथमिक निरीक्षण में यह स्पष्ट हुआ कि भ्रूण लगभग पूरी तरह विकसित हो चुका था और उसकी आयु करीब 8 महीने के आसपास आंकी गई है।
| विवरण | तथ्य और जानकारी |
|---|---|
| स्थान | नागरिक अस्पताल पार्क, हिसार (हरियाणा) |
| भ्रूण की अनुमानित आयु | लगभग 8 माह (विकसित अवस्था) |
| जांच अधिकारी | डॉ. अनामिका बिश्नोई (डिप्टी सिविल सर्जन) |
| प्रथम सूचनाकर्ता | डॉ. सुभाष खतरेजा (डिप्टी सिविल सर्जन) |
| संभावित कारण | अवैध प्रसव या प्री-टर्म होम डिलीवरी |
| पुलिस कार्रवाई | सीसीटीवी फुटेज और रिकॉर्ड की जांच जारी |
अवैध डिलीवरी और सामाजिक पहलुओं पर गहराता संदेह
स्वास्थ्य विभाग की शुरुआती जांच में यह अंदेशा जताया गया है कि यह मामला किसी अविवाहित युवती या सामाजिक लोक-लाज के भय से छिपाई गई गर्भावस्था का हो सकता है। डॉ. अनामिका बिश्नोई ने बताया कि भ्रूण का सिर बाहर की ओर दिख रहा था, जिससे यह संकेत मिलते हैं कि यह प्रसव अस्पताल की जगह किसी निजी स्थान या घर पर करने की कोशिश की गई होगी। प्रसव के बाद पकड़े जाने के डर से भ्रूण को अस्पताल परिसर के पार्क में फेंक दिया गया ताकि उसे लावारिस दिखाया जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि 8 महीने का भ्रूण लगभग जीवित रहने की स्थिति में होता है, ऐसे में इस तरह से उसे फेंक देना न केवल कानूनी अपराध है बल्कि मानवीय संवेदनाओं को भी झकझोर देने वाली घटना है। स्वास्थ्य विभाग अब जिले के उन सभी निजी क्लीनिकों और दाइयों के रिकॉर्ड खंगालने की योजना बना रहा है, जहां हाल के दिनों में इस तरह के संदिग्ध प्रसव की संभावना हो सकती है।
"हमें सूचना मिली थी कि पार्क में एक भ्रूण पड़ा है। मौके पर पहुंचने पर पाया कि यह करीब 8 महीने का विकसित भ्रूण है। ऐसा प्रतीत होता है कि यह किसी अविवाहित लड़की की प्री-टर्म डिलीवरी का मामला है जिसे छिपाने के लिए यहां फेंका गया है। पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है।" - डॉ. अनामिका बिश्नोई, डिप्टी सिविल सर्जन, हिसार।
पुलिस की कार्रवाई और सीसीटीवी कैमरों की निगरानी
हिसार पुलिस ने इस मामले में अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस टीम अस्पताल के एंट्री और एग्जिट पॉइंट्स पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की बारीकी से जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि मंगलवार तड़के या देर रात पार्क के आसपास किन व्यक्तियों की संदिग्ध आवाजाही रही थी। साथ ही, अस्पताल में भर्ती रही गर्भवती महिलाओं और हाल ही में डिस्चार्ज हुई पेशेंट्स के डेटा का भी मिलान किया जा रहा है।
अस्पताल प्रशासन ने भी अपनी आंतरिक सुरक्षा टीम को सतर्क कर दिया है। सुरक्षाकर्मियों से पूछताछ की जा रही है कि क्या उन्होंने किसी को पार्क की ओर जाते हुए देखा था। पुलिस का मानना है कि आरोपी ने अंधेरे का फायदा उठाकर भ्रूण को झाड़ियों में ठिकाने लगाया होगा ताकि वह आसानी से नजर न आ सके।
स्थानीय जनजीवन और स्वास्थ्य व्यवस्था पर प्रभाव
नागरिक अस्पताल जैसे सुरक्षित माने जाने वाले स्थान पर इस तरह की घटना होना सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। लोगों का कहना है कि प्रशासन को अवैध गर्भपात और असुरक्षित प्रसव को रोकने के लिए जमीनी स्तर पर और अधिक कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है। इस घटना ने एक बार फिर हरियाणा में भ्रूण संरक्षण और महिला स्वास्थ्य से जुड़े कानूनी प्रावधानों की सख्ती से पालना की आवश्यकता को रेखांकित किया है।
आगामी कानूनी कदम और प्रशासनिक रणनीति
आने वाले दिनों में पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम जिले के आशा वर्कर्स और एएनएम (ANM) के माध्यम से उन गर्भवती महिलाओं की सूची तैयार करेगी जिनकी डिलीवरी का समय नजदीक था लेकिन वे रिकॉर्ड से गायब हैं। भ्रूण का पोस्टमार्टम करवाया जाएगा ताकि मृत्यु के सही समय और कारणों का पता चल सके। यदि यह पाया जाता है कि भ्रूण को जीवित अवस्था में फेंका गया था, तो आरोपियों पर हत्या के प्रयास या हत्या जैसी गंभीर धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं। प्रशासन ने अपील की है कि यदि किसी के पास इस घटना से संबंधित कोई जानकारी हो, तो वह गुप्त रूप से पुलिस के साथ साझा करे।





