हाल ही में जींद के जुलाना क्षेत्र के शादीपुर निवासी 42 वर्षीय सेना के हवलदार नरेश लाठर का लेह-लद्दाख में ड्यूटी के दौरान हृदय गति रुकने (हार्ट अटैक) से दुखद निधन हो गया। अत्यधिक ऊंचाई और शून्य से नीचे के तापमान वाले क्षेत्रों में शारीरिक बदलाव तेजी से होते हैं, जिसका सीधा असर कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम (हृदय प्रणाली) पर पड़ता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, उच्च पर्वतीय इलाकों में वायुमंडलीय दबाव कम होने और ऑक्सीजन की कमी (हाइपोक्सिया) के कारण दिल को शरीर में रक्त पंप करने के लिए अतिरिक्त जोर लगाना पड़ता है। यही वजह है कि ऐसे मौसम में कार्डियक अरेस्ट और साइलेंट अटैक की आशंका काफी बढ़ जाती है।
स्वास्थ्य समस्या / सुविधा के मुख्य लक्षण और कारण
उच्च पर्वतीय और अत्यधिक ठंडे इलाकों में हृदय संबंधी समस्याओं का मुख्य कारण कम वायुदाब और हाइपोक्सिया होता है। जब तापमान अचानक गिरता है, तो शरीर का तापमान बनाए रखने के लिए रक्त वाहिकाएं सिकुड़ (Vasoconstriction) जाती हैं। इससे ब्लड प्रेशर तेजी से बढ़ता है और हृदय की धमनियों पर दबाव अत्यधिक बढ़ जाता है। जो लोग पहले से किसी हृदय रोग से अनजान हैं या जिन्हें हाइपरटेंशन की समस्या है, उनमें यह स्थिति अचानक कार्डियक अरेस्ट का रूप ले सकती है।
इसके प्राथमिक लक्षणों में सीने में हल्का या तेज दबाव, सांस लेने में तकलीफ, असामान्य रूप से अधिक थकान, चक्कर आना, और बाएं हाथ या जबड़े में दर्द महसूस होना शामिल है। कई बार अधिक ऊंचाई पर लोग इन लक्षणों को सामान्य थकान या एल्टीट्यूड सिकनेस समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि यदि किसी भी व्यक्ति को ठंडे इलाके में सांस लेने में थोड़ी भी कठिनाई या सीने में भारीपन महसूस हो, तो इसे तुरंत मेडिकल इमरजेंसी माना जाना चाहिए।
| स्वास्थ्य बिंदु | विशेषज्ञ सलाह व सावधानियां |
|---|---|
| उच्च रक्तचाप (High BP) | ठंडे मौसम में नियमित बीपी जांचें और दवा बिना डॉक्टर की सलाह के न छोड़ें। |
| हाइपोक्सिया (ऑक्सीजन कमी) | ऊंचाई पर जाने से पहले एक्लिमेटाइजेशन (शरीर को ढालने की प्रक्रिया) जरूर पूरी करें। |
| डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) | ठंड में प्यास कम लगती है, फिर भी गुनगुना पानी नियमित अंतराल पर पीते रहें। |
| अत्यधिक शारीरिक श्रम | अचानक भारी वजन उठाने या तीव्र शारीरिक परिश्रम से बचें, धीरे-धीरे गति बढ़ाएं। |
डॉक्टरों व चिकित्सा विशेषज्ञों की जरूरी सलाह
कार्डियोलॉजिस्ट्स (हृदय रोग विशेषज्ञों) का स्पष्ट रूप से मानना है कि अत्यधिक ठंड या अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अपनी दिनचर्या में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। 40 वर्ष की आयु पार कर चुके व्यक्तियों को हर छह महीने में ईसीजी (ECG), टीएमटी (TMT) और लिपिड प्रोफाइल जैसी जांचें जरूर करानी चाहिए। इससे धमनियों में किसी भी प्रकार के ब्लॉक या कार्डियक जोखिम का समय रहते पता लगाया जा सकता है।
चिकित्सकों का यह भी सुझाव है कि यदि आप किसी पर्वतीय या अत्यधिक ठंडे क्षेत्र में ड्यूटी पर हैं या यात्रा कर रहे हैं, तो शरीर को अचानक तापमान परिवर्तन के संपर्क में न लाएं। गर्म कपड़ों की परतें पहनें ताकि शरीर का तापमान नियंत्रित रहे। किसी भी प्रकार की असुविधा होने पर तुरंत पल्स ऑक्सीमीटर से ऑक्सीजन स्तर जांचें और नजदीकी मेडिकल सेंटर से संपर्क करें। CPR (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) का प्राथमिक ज्ञान होना भी आपात स्थिति में किसी की जान बचा सकता है।
अस्पताल में उपलब्ध सुविधाएं और ओपीडी सेवाएं
हरियाणा के प्रमुख नागरिक अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और मिलिट्री हॉस्पिटल्स में कार्डियोलॉजी विभाग की ओपीडी सेवाएं उपलब्ध हैं। यहां ईसीजी, 2D इको (2D Echo), और कार्डियक ट्रोपोनिन-आई (Trop-I) जैसे जरूरी ब्लड टेस्ट्स की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। इन जांचों के जरिए मरीज के दिल की सेहत की सटीक स्थिति का आंकलन किया जा सकता है।
इमरजेंसी सेवाओं के तहत अस्पतालों में एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट (ALS) एम्बुलेंस और आईसीयू सुविधाएं चौबीसों घंटे चालू रहती हैं। कार्डियक अरेस्ट की स्थिति में शुरुआती 'गोल्डन आवर' में मरीज को थ्रोम्बोलाइटिक थेरेपी या जरूरी प्राथमिक उपचार देकर जीवन रक्षा की संभावनाएं कई गुना बढ़ाई जा सकती हैं।
खान-पान, दिनचर्या और घरेलू सावधानियां
शीत ऋतु और अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हृदय को स्वस्थ रखने के लिए खान-पान का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। अपने दैनिक आहार में सोडियम (नमक) की मात्रा संतुलित रखें और संतृप्त वसा (Saturated Fat) तथा प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों से दूरी बनाएं। ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर खाद्य पदार्थ, हरी पत्तेदार सब्जियां, सूप और सूखे मेवे दिल के स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभदायक माने जाते हैं।
दिनचर्या में सुबह-सवेरे अत्यधिक ठंड में अचानक भारी व्यायाम करने से बचें। इसके बजाय इनडोर हल्की स्ट्रेचिंग, योग और प्राणायाम करें, जिससे फेफड़ों की कार्यक्षमता और रक्त संचार दुरुस्त रहता है। धूम्रपान और शराब का सेवन तुरंत बंद कर देना चाहिए, क्योंकि यह धमनियों को सिकोड़कर दिल के दौरे के जोखिम को कई गुना बढ़ा देता है।





