विदेश की धरती पर बेहतर भविष्य तलाशने गए हरियाणा के एक और नौजवान की सड़क दुर्घटना में जान चली गई है। उपमंडल के अंतर्गत आने वाले रतक गांव के एक साधारण परिवार पर उस वक्त दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, जब उन्हें कनाडा से उनके इकलौते बेटे की मौत की मनहूस खबर मिली। इस हृदयविदारक घटना के सामने आने के बाद से ही पूरे ग्रामीण अंचल में मातम का माहौल है और सांत्वना देने वालों का तांता लगा हुआ है। मृतक के घर में कोहराम मचा हुआ है तथा माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृत युवक की पहचान जसकीरत सिंह के रूप में हुई है, जो पिछले लगभग दो वर्षों से कनाडा में रहकर अपनी पढ़ाई के साथ-साथ आजीविका के लिए काम भी कर रहा था। उसके पिता भूपेंद्र सिंह ने बेहद टूटे हुए शब्दों में बताया कि उनके पास कुल पांच एकड़ कृषि भूमि है, जिससे परिवार का जीवनयापन बेहद कठिनाई से चल पाता है। बेटे के उज्ज्वल भविष्य की खातिर उन्होंने अपने रिश्तेदारों से हाथ फैलाकर और विभिन्न स्रोतों से लगभग 35 लाख रुपए का भारी कर्ज जुटाया था, ताकि उनका बेटा विदेश जाकर अपने पैरों पर खड़ा हो सके और परिवार की तंगहाली को दूर कर सके।
सड़क पर काल बनकर आई दूसरी गाड़ी, मौके पर ही थम गईं सांसें
यह भीषण हादसा शनिवार को उस वक्त घटित हुआ जब जसकीरत सिंह अपने कुछ दोस्तों के साथ कार में सवार होकर किसी कार्य से जा रहा था। शुरुआती विवरणों के मुताबिक, उनकी गाड़ी सड़क पर सामान्य गति से आगे बढ़ रही थी, तभी अचानक विपरीत दिशा यानी गलत रूट से आ रही एक तेज रफ्तार कार ने उनकी गाड़ी को बेहद जबरदस्त टक्कर मार दी। यह टक्कर इतनी भयंकर थी कि जसकीरत की गाड़ी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और उन्हें संभलने का मौका तक नहीं मिला।
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार, टक्कर इतनी भीषण थी कि जसकीरत सिंह की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। वाहन के परखच्चे उड़ चुके थे। हालांकि उनके साथ मौजूद अन्य साथियों को भी गंभीर चोटें आईं जिन्हें तुरंत नजदीकी चिकित्सा केंद्र ले जाया गया। इस अचानक हुई दुर्घटना ने भूपेंद्र सिंह और उनके पूरे परिवार के उन तमाम सपनों को एक ही झटके में चकनाचूर कर दिया, जिन्हें उन्होंने अपनी सीमित आय और कड़े संघर्ष के बीच बुना था।
| विवरण | तथ्य एवं जानकारी |
|---|---|
| मृतक का नाम | जसकीरत सिंह |
| मूल निवास | गांव रतक, हरियाणा |
| विदेश जाने का समय | जनवरी 2024 (स्टडी वीजा) |
| परिवार की कृषि भूमि | करीब 5 एकड़ |
| विदेश भेजने का खर्च/कर्ज | लगभग 35 लाख रुपए |
| दुर्घटना का कारण | गलत दिशा से आ रही कार की टक्कर |
परिवार की आर्थिक स्थिति और विदेश भेजने का कड़ा संघर्ष
भूपेंद्र सिंह का परिवार पारंपरिक खेती-किसानी से जुड़ा हुआ है और पांच एकड़ जमीन से होने वाली आमदनी केवल बुनियादी जरूरतों को ही बमुश्किल पूरा कर पाती है। ऐसे में 35 लाख जैसी बड़ी रकम का इंतजाम करना इस परिवार के लिए किसी बड़े इम्तिहान से कम नहीं था। गांव के लोगों का कहना है कि जसकीरत बेहद मेहनतकश और समझदार लड़का था, जो अपने वृद्ध माता-पिता के संघर्षों को अच्छी तरह समझता था। विदेश की जमीन पर पहुंचकर उसने अपनी पढ़ाई के साथ काम करना इसलिए शुरू किया था ताकि वह जल्द से जल्द अपने सिर पर चढ़ा हुआ भारी कर्ज चुका सके।
लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। कर्ज की भारी किस्तें चुकाने और परिवार का सहारा बनने से पहले ही वह क्रूर मौत के मुंह में समा गया। अब इस परिवार के सामने दोहरी मार है—एक तरफ इकलौते बेटे के खोने का ऐसा असहनीय दर्द जिससे कभी उबरा नहीं जा सकता, तो दूसरी तरफ रिश्तेदारों से लिया गया वो लाखों रुपए का कर्ज जिसे अब कैसे चुकाया जाएगा, यह किसी पहेली से कम नहीं है।
हमारा सब कुछ उजड़ गया है। बेटे को पढ़ाने और उसका भविष्य संवारने के लिए हमने जमीन गिरवी रखने और रिश्तेदारों से उधार लेकर 35 लाख रुपए जुटाए थे। हमें क्या पता था कि विदेश की धरती हमारे इकलौते चिराग को हमेशा के लिए हमसे छीन लेगी। - भूपेंद्र सिंह, मृतक के पिता
स्थानीय जनजीवन और युवाओं में विदेश जाने के क्रेज पर गहरा असर
इस दुखद घटना ने एक बार फिर हरियाणा के ग्रामीण इलाकों में लगातार बढ़ रहे विदेश पलायन और उसके पीछे छिपे भयानक आर्थिक व मानसिक दबावों को सतह पर ला दिया है। आज प्रदेश के अधिकांश गांवों में युवा बेहतर अवसरों की तलाश में अपनी जमीनों को दांव पर लगाकर या भारी-भरकम कर्ज लेकर विदेश का रुख कर रहे हैं। इस रास्ते में आने वाली अनिश्चितताएं और सड़क हादसों जैसी अनहोनी कई हंसते-खेलते परिवारों को पूरी तरह तबाह कर देती हैं।
रतक गांव और आसपास के इलाकों में इस दुर्घटना के बाद से शोक की लहर है। हर कोई इस बात से स्तब्ध है कि कैसे एक मध्यमवर्गीय परिवार ने अपनी सारी पूंजी दांव पर लगाकर अपने बेटे को भेजा था और अंत में उन्हें केवल पार्थिव शरीर का इंतजार करना पड़ रहा है। स्थानीय सामाजिक संगठनों और पंचायत प्रतिनिधियों ने सरकार से मांग की है कि ऐसे मामलों में विदेशों में फंसे शवों को भारत लाने और पीड़ित परिवारों की प्रशासनिक स्तर पर हरसंभव मदद की जानी चाहिए।
प्रशासनिक औपचारिकताएं और पार्थिव शरीर को वतन लाने की प्रक्रिया
हादसे के बाद से ही स्थानीय प्रशासन और मृतक के परिजनों द्वारा कनाडा स्थित भारतीय दूतावास (Indian Embassy) के साथ लगातार संपर्क साधा जा रहा है। कनाडा पुलिस और अस्पताल प्रशासन की ओर से पोस्टमार्टम व अन्य कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। परिजनों की सबसे बड़ी प्राथमिकता इस समय जसकीरत सिंह के पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द उनके पैतृक गांव रतक वापस लाने की है, ताकि उसकी अंतिम विदाई अपने परिवार और प्रियजनों के बीच संपन्न हो सके।





