झज्जर के हसनपुर में आयोजित भव्य कृषि एवं पशुपालन मेले में इस बार पानीपत के गांव डिडवाड़ी निवासी प्रगतिशील पशुपालक और पद्मश्री से सम्मानित नरेंद्र सिंह के पशुओं ने अपनी असाधारण उपस्थिति से सभी का ध्यान आकर्षित किया। मेले में उनके प्रसिद्ध मुर्रा झोटे 'विधायक' ने 15 करोड़ रुपये की अनुमानित कीमत और 23 बार के चैंपियन होने के रिकॉर्ड के साथ मुख्य आकर्षण बनकर एक बार फिर सबको अचंभित कर दिया। केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी ने भी इस मेले का दौरा किया और स्टालों पर प्रदर्शित पशुधन की विस्तृत जानकारी प्राप्त की, विशेषकर नरेंद्र सिंह के उत्कृष्ठ पशुओं के प्रति उन्होंने गहरी रुचि दिखाई।
यह आयोजन न केवल पशुपालकों के लिए एक मंच प्रदान करता है, बल्कि यह हरियाणा की समृद्ध पशुधन परंपरा और नस्ल सुधार के प्रयासों को भी उजागर करता है। 'विधायक' जैसे चैंपियन झोटे की उपस्थिति ने मेले में आए हजारों किसानों और पशु प्रेमियों को प्रेरित किया। उसकी अद्वितीय विशेषताओं और लगातार सफलताओं ने यह साबित कर दिया कि सही देखभाल, वैज्ञानिक पशुपालन और अथक परिश्रम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में कितना बड़ा योगदान दिया जा सकता है।
घटना का पूरा विवरण और सिलसिलेवार घटनाक्रम
पद्मश्री नरेंद्र सिंह पिछले तीन दशकों से पशुपालन और मुर्रा नस्ल सुधार के क्षेत्र में सराहनीय कार्य कर रहे हैं। उनकी कड़ी मेहनत और पशुधन संरक्षण के प्रति अतुलनीय समर्पण के परिणामस्वरूप उन्हें अनगिनत राज्य और राष्ट्रीय पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। वर्ष 2019 में भारत सरकार ने उन्हें देश के प्रतिष्ठित 'पद्म श्री' पुरस्कार से सम्मानित किया था, जो पशुधन के क्षेत्र में उनके योगदान की एक बड़ी पहचान है। हसनपुर मेले में पहुंचे नरेंद्र सिंह का यह सफर और उनके असाधारण पशुधन, जिसमें 'विधायक' के साथ 'पल्सर' भैंस और 'केसरी' सांड भी शामिल थे, आज पूरे हरियाणा के पशुपालकों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं।
'विधायक' झोटा, जिसकी आयु साढ़े पांच वर्ष है, अब तक विभिन्न पशुधन प्रतियोगिताओं में 23 बार प्रथम स्थान प्राप्त कर चुका है। इसकी बाजार में अनुमानित कीमत 15 करोड़ रुपये आंकी गई है, जो इसे देश के सबसे महंगे पशुओं में से एक बनाती है। इससे पहले कुरुक्षेत्र में आयोजित एक पशु मेले में भी इसने 'चैंपियन ऑफ चैंपियंस' का खिताब अपने नाम किया था। हालांकि, 'विधायक' और नरेंद्र सिंह के अन्य विजेता पशुओं का सामान्य खान-पान साधारण ही रहता है, लेकिन प्रतियोगिताओं के दौरान 'विधायक' की डाइट में विशेष रूप से काजू और बादाम जैसे पौष्टिक तत्व शामिल किए जाते हैं, ताकि उसकी ऊर्जा और प्रदर्शन का स्तर उच्चतम बना रहे। यह विशेष देखभाल ही उसकी लगातार सफलताओं का एक महत्वपूर्ण कारक मानी जाती है।
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| झोटे का नाम | विधायक |
| नस्ल | मुर्रा |
| मालिक | पद्मश्री नरेंद्र सिंह |
| मालिक का गांव | डिडवाड़ी, पानीपत |
| अनुमानित कीमत | 15 करोड़ रुपये |
| वर्तमान आयु | 5.5 वर्ष |
| प्रतियोगिताओं में जीत | 23 बार प्रथम स्थान |
| पद्मश्री सम्मान वर्ष | 2019 |
| प्रमुख डाइट (प्रतियोगिता के दौरान) | काजू, बादाम |
| अन्य प्रसिद्ध पशु | पल्सर (भैंस), केसरी (सांड) |
अधिकारियों व विशेषज्ञों की भूमिका व विचार
केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी का हसनपुर कृषि मेले का दौरा और पशुपालकों से सीधा संवाद, सरकार की पशुधन विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने पद्मश्री नरेंद्र सिंह जैसे प्रगतिशील पशुपालकों के प्रयासों की सराहना की और कहा कि ऐसे उदाहरण अन्य किसानों को भी प्रेरित करते हैं। मंत्री ने जोर दिया कि पशुपालन न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, बल्कि यह किसानों की आय में वृद्धि करने और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने का एक सशक्त माध्यम भी है।
पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने भी मेले में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और पशुपालकों को नस्ल सुधार, स्वास्थ्य देखभाल और सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी दी। विशेषज्ञों का मानना है कि 'विधायक' जैसे उच्च गुणवत्ता वाले झोटे, मुर्रा नस्ल की आनुवंशिक क्षमता को प्रदर्शित करते हैं। ऐसे पशुओं का पालन-पोषण और उनके वीर्य का उपयोग नस्ल सुधार कार्यक्रमों में बेहद महत्वपूर्ण है, जिससे प्रदेश के अन्य पशुपालकों को भी लाभ मिल सकता है। यह मेला पशुपालकों को एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने और नवीनतम तकनीकों को अपनाने का अवसर भी प्रदान करता है।
स्थानीय जनजीवन, नागरिकों व व्यवस्था पर प्रभाव
'विधायक' जैसे चैंपियन झोटे की कहानी हरियाणा के पशुपालकों और आम जनजीवन पर गहरा सकारात्मक प्रभाव डालती है। यह न केवल गर्व का विषय है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुधन के महत्व को भी रेखांकित करता है। ऐसे सफल पशुपालक, जो अपनी मेहनत और लगन से करोड़ों की संपत्ति अर्जित करते हैं, वे युवाओं को कृषि और पशुपालन के क्षेत्र में नए सिरे से सोचने और करियर बनाने के लिए प्रेरित करते हैं। इससे पलायन रोकने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा करने में मदद मिलती है।
यह मेला और 'विधायक' की लोकप्रियता, हरियाणा को देश के 'मुर्रा कैपिटल' के रूप में स्थापित करने में भी सहायक है। यह राज्य की पशुधन क्षमता को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करता है। साथ ही, यह पशुपालकों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देता है, जिससे वे अपने पशुओं की गुणवत्ता और देखभाल में सुधार के लिए प्रोत्साहित होते हैं। इससे पशुधन उत्पादों की गुणवत्ता में भी वृद्धि होती है, जिसका सीधा लाभ उपभोक्ताओं को मिलता है।
आगे की कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई और आगामी कदम
हरियाणा सरकार और पशुपालन विभाग ऐसे कृषि एवं पशुपालन मेलों को नियमित रूप से आयोजित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इन मेलों के माध्यम से पशुपालकों को आधुनिक तकनीकों, उन्नत नस्लों और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जाती है। भविष्य में सरकार का लक्ष्य मुर्रा नस्ल के संरक्षण और संवर्धन के लिए और अधिक प्रभावी योजनाएं लाना है, जिसमें उच्च गुणवत्ता वाले वीर्य बैंक की स्थापना, पशु स्वास्थ्य कैंप और पशुपालकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम शामिल हैं। 'विधायक' जैसे असाधारण पशुओं को 'राष्ट्रीय पशुधन रत्न' जैसे सम्मानों से नवाजने और उनके डीएनए को संरक्षित करने पर भी विचार किया जा सकता है, ताकि उनकी आनुवंशिक श्रेष्ठता को भविष्य की पीढ़ियों तक पहुंचाया जा सके। यह कदम हरियाणा को पशुधन विकास के क्षेत्र में अग्रणी बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।



