हरियाणा के ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़े बदलाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है। केंद्र सरकार ने हरियाणा की चार प्रमुख सरकारी बिजली कंपनियों को शेयर बाजार (Stock Market) में सूचीबद्ध करने के लिए राज्य प्रशासन को कड़े निर्देश जारी किए हैं। इस कदम का मुख्य उद्देश्य इन निगमों की वित्तीय स्थिति को सुदृढ़ करना और राज्य के बजट पर उनकी निर्भरता को कम करना है। हालांकि, सरकार के इस फैसले ने प्रदेश के बिजली गलियारों में हलचल मचा दी है, जहां कर्मचारी संगठन इसे निजीकरण की आहट मानकर लामबंद होने लगे हैं।
केंद्र का हस्तक्षेप और मुख्य सचिव को पत्र
केंद्रीय विद्युत सचिव पंकज अग्रवाल ने 19 अक्तूबर को हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी को एक औपचारिक पत्र लिखकर बिजली कंपनियों की लिस्टिंग प्रक्रिया में आ रही बाधाओं को जल्द से जल्द दूर करने का आग्रह किया है। केंद्र का मानना है कि यदि ये कंपनियां शेयर बाजार में उतरती हैं, तो वे सीधे बाजार से निवेश जुटा सकेंगी, जिससे प्रदेश की बिजली वितरण और उत्पादन व्यवस्था का आधुनिकीकरण संभव हो सकेगा।
| निगम का नाम | संक्षिप्त नाम | मुख्य जिम्मेदारी |
|---|---|---|
| उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम | UHBVN | उत्तरी जिलों में बिजली वितरण |
| दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम | DHBVN | दक्षिणी जिलों में बिजली वितरण |
| हरियाणा विद्युत उत्पादन निगम | HPGCL | बिजली का उत्पादन |
| हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम | HVPNL | बिजली का ट्रांसमिशन |
लिस्टिंग के पीछे का आर्थिक तर्क और लाभ
केंद्रीय विद्युत मंत्रालय के अनुसार, शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने से इन कंपनियों के कामकाज में अभूतपूर्व पारदर्शिता और जवाबदेही आएगी। वर्तमान में ये कंपनियां अपनी वित्तीय जरूरतों के लिए काफी हद तक राज्य सरकार के अनुदान और ऋण पर निर्भर हैं। लिस्टिंग के बाद, ये निगम स्वतंत्र रूप से पूंजी जुटा सकेंगे, जिससे नई तकनीक को अपनाने और बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। इससे उपभोक्ताओं को बेहतर सेवा मिलने की उम्मीद है, हालांकि इसके दूरगामी परिणामों पर बहस जारी है।
"हम इस कदम का कड़ा विरोध करते हैं। शेयर बाजार में लिस्टिंग करना असल में सरकारी संपत्तियों को निजी हाथों में सौंपने की पहली सीढ़ी है। 3 नवंबर को ऊर्जा मंत्री अनिल विज के साथ होने वाली बैठक में हम अपनी चिंताओं को मजबूती से रखेंगे।" - रविंद्र घनघस, प्रवक्ता, हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा
राह में मौजूद दो बड़ी तकनीकी बाधाएं
केंद्र सरकार ने अपने पत्र में दो विशिष्ट मुद्दों का उल्लेख किया है जो इस प्रक्रिया को बाधित कर रहे हैं। पहला, कृषि उपभोक्ताओं के लिए एक अलग बिजली वितरण कंपनी (Agri-DISCOM) बनाने का प्रस्ताव अभी तक पूरी तरह से जमीन पर नहीं उतरा है। दूसरा, एचपीजीसीएल (HPGCL) और एचवीपीएनएल (HVPNL) जैसी कंपनियों में लिस्टिंग की प्रक्रिया को वैज्ञानिक और कानूनी रूप से आगे बढ़ाने के लिए अभी तक किसी पेशेवर सलाहकार (Consultant) की नियुक्ति नहीं की गई है। सरकार को इन दोनों मोर्चों पर तत्काल कार्रवाई करने को कहा गया है।
कर्मचारियों का विरोध और आगामी रणनीति
हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने इस फैसले के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कर्मचारी नेताओं का तर्क है कि लाभ कमाने वाली सरकारी कंपनियों को बाजार के हवाले करना जनता के हित में नहीं है। उनका मानना है कि इससे बिजली की दरें बढ़ सकती हैं और कर्मचारियों की सेवा शर्तों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। आगामी 3 नवंबर को ऊर्जा मंत्री अनिल विज के साथ होने वाली बैठक इस मामले में निर्णायक साबित हो सकती है, जिसमें कर्मचारी अपनी मांगों और विरोध का चार्टर पेश करेंगे।
भविष्य की रूपरेखा और प्रशासनिक कदम
राज्य सरकार अब केंद्र के पत्र के आलोक में अपनी अगली रणनीति तैयार कर रही है। मुख्य सचिव कार्यालय से संबंधित विभागों को डेटा तैयार करने और तकनीकी बाधाओं को दूर करने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए जा सकते हैं। यदि हरियाणा सरकार इस दिशा में आगे बढ़ती है, तो यह प्रदेश के सरकारी उपक्रमों के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा, जो सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों के प्रबंधन के तरीके को पूरी तरह बदल सकता है।





