हरियाणा पुलिस ने अपनी कार्यप्रणाली में एक क्रांतिकारी बदलाव लाते हुए देश भर में अपनी प्रशासनिक दक्षता का लोहा मनवाया है। केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए तीन नए आपराधिक कानूनों—भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA)—के प्रभावी क्रियान्वयन में हरियाणा ने राष्ट्रीय डैशबोर्ड पर शीर्ष स्थान हासिल किया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के मार्गदर्शन और पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल के नेतृत्व में राज्य पुलिस ने तकनीकी नवाचारों को अपनाकर न केवल न्याय प्रक्रिया को तेज किया है, बल्कि सरकारी खजाने को भी भारी बचत पहुंचाई है।
सितंबर 2026 के ताजा आंकड़ों के अनुसार, हरियाणा अब देश का ऐसा पहला राज्य बन गया है जिसने 1 जुलाई 2024 से प्रभावी हुए इन कानूनों को पूर्ण रूप से धरातल पर उतारा है। पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने इस उपलब्धि पर प्रकाश डालते हुए बताया कि राज्य में कानून व्यवस्था को आधुनिक, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए व्यापक स्तर पर बुनियादी ढांचे में सुधार किए गए हैं। इसमें ई-समन और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसी तकनीकों का उपयोग सबसे महत्वपूर्ण रहा है।
तकनीकी नवाचार और आर्थिक बचत का नया कीर्तिमान
हरियाणा पुलिस द्वारा अपनाई गई डिजिटल कार्यप्रणाली ने वित्तीय मोर्चे पर भी बड़े परिणाम दिए हैं। पुलिस विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, ई-समन प्रणाली के उपयोग से पिछले छह महीनों में लगभग 25.65 करोड़ रुपये के ईंधन की बचत हुई है। पहले समन तामील कराने के लिए पुलिस कर्मियों को भौतिक रूप से लंबी दूरियां तय करनी पड़ती थी, लेकिन अब डिजिटल माध्यम ने इसे सरल और सस्ता बना दिया है। इसी तरह, अदालती सुनवाई के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के बढ़ते उपयोग ने सात महीनों में 1.16 करोड़ रुपये का ईंधन बचाया है।
| प्रगति के मानक | उपलब्धि / आंकड़े |
|---|---|
| राष्ट्रीय डैशबोर्ड रैंकिंग | प्रथम स्थान (नंबर 1) |
| ई-समन से कुल ईंधन बचत | ₹25.65 करोड़ (6 माह) |
| वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बचत | ₹1.16 करोड़ (7 माह) |
| फॉरेंसिक पदों की संख्या | 351 से बढ़कर 1,044 हुई |
| ई-साक्ष्य ऐप रिकॉर्डिंग दर | 99.2 प्रतिशत |
| वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग क्यूबिकल | 2,145 स्थापित |
फॉरेंसिक जांच और वैज्ञानिक साक्ष्यों पर विशेष जोर
नए कानूनों की मूल भावना साक्ष्यों की वैज्ञानिकता पर टिकी है। हरियाणा पुलिस ने इसे गंभीरता से लेते हुए प्रावधान किया है कि सात वर्ष या उससे अधिक की सजा वाले प्रत्येक अपराध में फॉरेंसिक टीम का घटनास्थल पर पहुंचना अनिवार्य होगा। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं (FSL) में स्वीकृत पदों की संख्या को 351 से बढ़ाकर 1,044 कर दिया गया है। राज्य के प्रत्येक जिले में कम से कम एक मोबाइल फॉरेंसिक वैन तैनात की गई है और 17 नई मोबाइल यूनिट्स को भी मंजूरी दी गई है।
"हरियाणा पुलिस नए कानूनों के माध्यम से न्याय प्रणाली को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमने तकनीकी नवाचार और वैज्ञानिक जांच को प्राथमिकता दी है, जिससे न केवल समय की बचत हो रही है, बल्कि दोषसिद्धि की दर में भी सुधार की उम्मीद है।" - अजय सिंघल, पुलिस महानिदेशक, हरियाणा
पुलिस प्रशिक्षण और आधुनिक अदालत प्रणाली
अधिकारियों के अनुसार, राज्य के लगभग सभी पुलिस कर्मियों को नए कानूनों का सघन प्रशिक्षण दिया जा चुका है। 56,000 कर्मियों ने आईजीओटी (iGOT) पोर्टल पर पंजीकरण कराया है, जिनमें से 34,500 से अधिक कर्मियों ने एआई (AI) आधारित पाठ्यक्रम सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। अदालती कार्यवाही को सुगम बनाने के लिए प्रदेश भर में 2,145 वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग क्यूबिकल स्थापित किए गए हैं। वर्तमान में, लगभग 84.49 प्रतिशत कैदियों की पेशी जेलों से ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हो रही है, जिससे सुरक्षा जोखिम और परिवहन व्यय दोनों कम हुए हैं।
जीरो एफआईआर और त्वरित न्याय की दिशा में कदम
नए कानूनों के तहत हरियाणा में 'जीरो एफआईआर' की साप्ताहिक समीक्षा की जा रही है। व्यवस्था ऐसी बनाई गई है कि किसी भी जीरो एफआईआर को सामान्यतः 48 घंटों के भीतर नियमित एफआईआर में बदल दिया जाए। इसके अलावा, ई-साक्ष्य ऐप के माध्यम से 99.2 प्रतिशत फॉरेंसिक जांच की डिजिटल रिकॉर्डिंग की जा रही है, जिससे जांच प्रक्रिया में मानवीय हस्तक्षेप और हेरफेर की गुंजाइश न्यूनतम हो गई है। यह प्रणाली आम नागरिकों के लिए न्याय को अधिक सुलभ और विश्वसनीय बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।





