गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026
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हरियाणा पुलिस ने रचा इतिहास: नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन में देश में नंबर 1, फॉरेंसिक और डिजिटल जांच में मारी बाजी

हरियाणा पुलिस नए आपराधिक कानूनों (BNS, BNSS, BSA) को लागू करने में देश में शीर्ष पर रही। फॉरेंसिक जांच, डिजिटल साक्ष्य और ई-पेशी जैसी आधुनिक प्रणालियों से प्रदेश की।

नीरज अहलावत
वरिष्ठ पत्रकार एवं मुख्य संपादक
29 अक्टूबर 2026 को 07:25 am बजे2 मिनट पठन0 व्यूज
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हरियाणा पुलिस ने रचा इतिहास: नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन में देश में नंबर 1, फॉरेंसिक और डिजिटल जांच में मारी बाजी
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फोटो: दैनिक रियलिटी विशेष डिजिटल डेस्कdainikreality.in

खबर की मुख्य बातें (Key Highlights)

  • •हरियाणा पुलिस ने सितंबर 2026 के राष्ट्रीय डैशबोर्ड पर देशभर में प्रथम स्थान हासिल किया।
  • •7 वर्ष से अधिक सजा वाले अपराधों के लिए घटनास्थल पर 100% फॉरेंसिक टीम की उपस्थिति अनिवार्य।
  • •56,000 पुलिसकर्मियों का आईजीओटी पोर्टल पर पंजीकरण, 34,500 ने एआई-आधारित कोर्स किया पूरा।
  • •फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं में पदों की संख्या 351 से बढ़ाकर 1,044 की गई, 17 नई मोबाइल वैन को मंजूरी।

चंडीगढ़/हरियाणा: हरियाणा पुलिस ने देश की न्याय व्यवस्था में एक नया मील का पत्थर स्थापित किया है। केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए तीन नए आपराधिक कानूनों—भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA)—के प्रभावी क्रियान्वयन में हरियाणा पुलिस पूरे देश में अव्वल रही है। सितंबर 2026 के राष्ट्रीय डैशबोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, हरियाणा ने जांच प्रक्रिया, डिजिटल साक्ष्य संकलन और अदालती कार्यवाही के आधुनिकीकरण में अन्य सभी राज्यों को पीछे छोड़ते हुए पहला स्थान प्राप्त किया है।

यह उपलब्धि केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हरियाणा की कानून व्यवस्था में आए एक बड़े संरचनात्मक बदलाव का प्रतीक है। मुख्यमंत्री और गृह विभाग के दिशा-निर्देशों के तहत, पुलिस महानिदेशक (DGP) ने राज्य के हर जिले में नए कानूनों की बारीकियों को जमीन पर उतारने के लिए एक विशेष कार्ययोजना तैयार की थी। अब हत्या, डकैती और बलात्कार जैसे गंभीर अपराधों, जिनमें सात साल या उससे अधिक की सजा का प्रावधान है, उनमें फॉरेंसिक विशेषज्ञों की घटनास्थल पर मौजूदगी शत-प्रतिशत सुनिश्चित की जा रही है।

तकनीकी सशक्तिकरण और फॉरेंसिक जांच का नया ढांचा

नए कानूनों के तहत वैज्ञानिक साक्ष्यों को प्राथमिकता दी गई है। हरियाणा पुलिस ने इस दिशा में अपनी फॉरेंसिक क्षमताओं में अभूतपूर्व विस्तार किया है। जहां पहले फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं में स्वीकृत पदों की संख्या मात्र 351 थी, उसे अब बढ़ाकर 1,044 कर दिया गया है। इसका सीधा उद्देश्य जांच की गुणवत्ता में सुधार करना और अदालतों में साक्ष्यों की विश्वसनीयता को बढ़ाना है। प्रत्येक जिले में अब कम से कम एक मोबाइल फॉरेंसिक वैन चौबीसों घंटे तैनात रहती है, ताकि अपराध की सूचना मिलते ही साक्ष्यों को सुरक्षित किया जा सके।

विशेषता / श्रेणीविवरण और आंकड़े
राष्ट्रीय रैंकिंग (सितंबर 2026)प्रथम स्थान (हरियाणा पुलिस)
प्रशिक्षित पुलिसकर्मी56,000 (iGOT पोर्टल पंजीकृत)
एआई-आधारित प्रशिक्षण पूर्ण34,500 पुलिसकर्मी
फॉरेंसिक पदों की वृद्धि351 से बढ़कर 1,044
नई मोबाइल फॉरेंसिक इकाइयां17 को प्रशासनिक मंजूरी
अनिवार्य फॉरेंसिक विजिट7 साल से अधिक सजा वाले मामले (100%)

पुलिसकर्मियों का डिजिटल प्रशिक्षण और एआई का उपयोग

कानूनों को केवल किताबों में नहीं, बल्कि पुलिस की कार्यशैली में उतारने के लिए प्रशिक्षण पर भारी निवेश किया गया है। राज्य के करीब 56 हजार पुलिसकर्मियों को आईजीओटी (iGOT) कर्मयोगी पोर्टल पर पंजीकृत किया गया है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण पहलू आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग है। लगभग 34,500 पुलिस अधिकारियों और जवानों ने एआई-आधारित विशेष पाठ्यक्रम सफलतापूर्वक पूरे किए हैं, जो उन्हें जटिल अपराधों की डिजिटल जांच करने में सक्षम बनाते हैं।

डिजिटल साक्ष्य संकलन के लिए अब थानों में आधुनिक गैजेट्स और सॉफ्टवेयर उपलब्ध कराए गए हैं। भारतीय साक्ष्य अधिनियम के तहत अब वीडियो रिकॉर्डिंग और डिजिटल डेटा को कानूनी रूप से अधिक मजबूती मिली है, जिसका फायदा हरियाणा पुलिस बखूबी उठा रही है।

अदालती कार्यवाही में ई-पेशी और पारदर्शिता

नए कानूनों का एक मुख्य उद्देश्य न्याय प्रक्रिया में होने वाली देरी को कम करना है। हरियाणा ने 'ई-पेशी' (E-Peshi) व्यवस्था को तेजी से अपनाया है। अब कैदियों और गवाहों को भौतिक रूप से अदालत ले जाने के बजाय, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेशी की जा रही है। इससे न केवल पुलिस बल की बचत हो रही है, बल्कि सुरक्षा जोखिम भी कम हुए हैं। इसके अलावा, चार्जशीट दाखिल करने से लेकर अदालती सम्मन भेजने तक की प्रक्रिया को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट किया जा रहा है।

"हरियाणा पुलिस का देश में प्रथम स्थान पर आना हमारे निरंतर प्रशिक्षण और तकनीकी सुधारों का परिणाम है। हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि नए कानूनों का लाभ सीधे आम जनता को मिले और अपराधियों को वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर कड़ी सजा मिले।" - (वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, हरियाणा पुलिस मुख्यालय)

स्थानीय जनजीवन और सुरक्षा व्यवस्था पर प्रभाव

पानीपत, करनाल, रोहतक और गुरुग्राम जैसे बड़े शहरों से लेकर ग्रामीण अंचलों तक, इस नई व्यवस्था का गहरा प्रभाव देखने को मिल रहा है। स्थानीय नागरिकों के लिए अब न्याय पाना पहले की तुलना में अधिक पारदर्शी हो गया है। डिजिटल रिकॉर्डिंग के कारण पुलिस जांच में हेरफेर की गुंजाइश कम हुई है। पीड़ितों को अब केस की स्टेटस रिपोर्ट उनके मोबाइल पर डिजिटल माध्यम से प्राप्त हो रही है, जिससे उन्हें बार-बार थानों के चक्कर नहीं काटने पड़ते।

भविष्य की रणनीति और आगामी कदम

हरियाणा सरकार और पुलिस विभाग अब 17 नई मोबाइल फॉरेंसिक इकाइयों को जल्द से जल्द सड़कों पर उतारने की तैयारी में है। इसके साथ ही, जिला स्तर पर डिजिटल साक्ष्य केंद्रों की स्थापना की जा रही है। पुलिस का अगला लक्ष्य साइबर अपराधों और वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में नए कानूनों के तहत सजा की दर (Conviction Rate) को दोगुना करना है। आने वाले समय में, हरियाणा की यह 'डिजिटल पुलिसिंग' मॉडल पूरे देश के लिए एक नजीर साबित होगी।

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नीरज अहलावत (Neeraj Ahlawat)

नीरज अहलावत (Neeraj Ahlawat)वरिष्ठ पत्रकार एवं संपादक

DainikReality.in | पानीपत, हरियाणा | 10+ वर्षों का डिजिटल पत्रकारिता अनुभव

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नीरज अहलावत हिंदी पत्रकारिता और डिजिटल समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और पाठकों तक उपयोगी जानकारी पहुंचाने को प्राथमिकता देते हैं। DainikReality.in पर उनका फोकस हरियाणा की खबरों, समसामयिक घटनाओं, सरकारी योजनाओं और रोजगार पर तथ्यपरक विश्लेषण प्रस्तुत करना है।

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