हरियाणा के शिक्षा विभाग में पिछले दो दशकों से अपनी सेवाएं दे रहे हजारों अतिथि अध्यापकों (Guest Teachers) के लिए दिवाली के बाद एक निराशाजनक खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने आधिकारिक तौर पर स्पष्ट कर दिया है कि प्रदेश के विभिन्न सरकारी स्कूलों में कार्यरत 10,557 गेस्ट टीचर्स को नियमित (Regularize) नहीं किया जा सकता है। यह निर्णय सरकार और राजकीय अनुबंधित अध्यापक संघ के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद सार्वजनिक किया गया है, जिससे प्रदेश भर के शिक्षक परिवारों में भारी रोष व्याप्त है।
सरकार और संघ के बीच वार्ता रही बेनतीजा
सोमवार को चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर के साथ राजकीय अनुबंधित अध्यापक संघ के प्रतिनिधियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में शिक्षकों ने अपनी 21 साल की लंबी सेवा का हवाला देते हुए नियमितीकरण की मांग पुरजोर तरीके से उठाई। हालांकि, सरकार की ओर से शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव विजय दहिया ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वर्तमान नियमों और कानूनी पेचीदगियों के कारण गेस्ट टीचर्स की सेवाओं को नियमित करने का कोई प्रावधान नहीं है। विभाग का कहना है कि इस मामले में पहले ही विस्तृत 'स्पीकिंग ऑर्डर' जारी किए जा चुके हैं, जो नियमितीकरण की राह में तकनीकी बाधाओं को स्पष्ट करते हैं।
| विवरण | महत्वपूर्ण तथ्य |
|---|---|
| कुल प्रभावित शिक्षक | 10,557 गेस्ट टीचर्स |
| सेवा का समय | लगभग 21 वर्ष (2005 से कार्यरत) |
| सरकार का मुख्य निर्णय | नियमितीकरण संभव नहीं, केवल सेवा सुरक्षा |
| रिटायरमेंट आयु सीमा | 58 वर्ष तक नौकरी की सुरक्षा दी गई |
| आंदोलन की आगामी तिथि | 14 और 15 नवंबर (कुरुक्षेत्र प्रदर्शन) |
भर्ती प्रक्रिया और अदालती आदेश बने बड़ी बाधा
शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बैठक के दौरान उन तकनीकी कारणों का विस्तार से उल्लेख किया, जिनकी वजह से इन शिक्षकों को पक्का नहीं किया जा सकता। विभाग के अनुसार, वर्ष 2005 में जब इन गेस्ट टीचर्स की नियुक्ति की गई थी, तब स्कूलों में शिक्षकों की तात्कालिक कमी को पूरा करने के लिए केवल 'पीरियड' के आधार पर भुगतान का नियम था। उस समय न तो किसी केंद्रीकृत चयन प्रक्रिया (Centralized Selection Process) को अपनाया गया और न ही राज्य के आरक्षण नियमों का पूर्ण पालन हुआ था।
"नियमों के अनुसार अतिथि अध्यापकों की सेवाएं नियमित करने का प्रावधान नहीं है। इस संबंध में विभाग द्वारा पहले ही स्पष्ट स्पीकिंग ऑर्डर जारी किए जा चुके हैं। हालांकि, सरकार ने इन शिक्षकों को 58 वर्ष की आयु तक सेवा सुरक्षा प्रदान की है, ताकि उनकी जीविका प्रभावित न हो।" - विजय दहिया, प्रधान सचिव, शिक्षा विभाग।
शिक्षक संघ का पलटवार: भेदभाव का लगाया आरोप
दूसरी ओर, राजकीय अनुबंधित अध्यापक संघ ने सरकार के इन तर्कों को सिरे से खारिज कर दिया है। संघ के महासचिव भूपेंद्र सिंह का कहना है कि 16 और 18 जून 2014 की नियमितीकरण नीतियों में ऐसी कोई शर्त नहीं थी जो गेस्ट टीचर्स को अपात्र घोषित करे। संघ का आरोप है कि सरकार जानबूझकर नकारात्मक स्पीकिंग ऑर्डर जारी कर रही है। उन्होंने तर्क दिया कि यदि इसी नीति के तहत कॉलेज कैडर के अतिथि प्राध्यापकों को नियमित किया जा सकता है, तो स्कूली शिक्षकों के साथ यह भेदभाव क्यों किया जा रहा है? शिक्षकों का दावा है कि उनकी नियुक्तियां मेरिट के आधार पर हुई थीं और वे सभी योग्यताएं पूरी करते हैं।
आंदोलन की राह पर गेस्ट टीचर्स: कुरुक्षेत्र बनेगा केंद्र
सरकार के इस कड़े रुख के बाद अतिथि अध्यापकों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। कुरुक्षेत्र के लघु सचिवालय में लंबे समय से चल रहा धरना अब बड़े प्रदर्शन का रूप लेने जा रहा है। संघ ने घोषणा की है कि 14 और 15 नवंबर को कुरुक्षेत्र में राज्य स्तरीय प्रदर्शन किया जाएगा, जिसमें प्रदेश भर से हजारों शिक्षक जुटेंगे। इस दौरान सरकार द्वारा जारी स्पीकिंग ऑर्डर की प्रतियों को जलाकर विरोध दर्ज कराया जाएगा। शिक्षकों का कहना है कि वे पिछले 21 वर्षों से विभाग की रीढ़ बने हुए हैं और अब इस उम्र में उन्हें नियमितीकरण के अधिकार से वंचित करना उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है।





