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हरियाणा बिजली निगम के ALM-SA को हाईकोर्ट से बड़ी राहत: HSSC री-शफलिंग पर रोक, रिलीव कर्मचारी वापस बुलाए जाएंगे

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा बिजली निगम के असिस्टेंट लाइनमैन (ALM) और सब-स्टेशन अटेंडेंट (SSA) की HSSC री-शफलिंग सूची पर रोक लगा दी है।

नीरज अहलावत
वरिष्ठ पत्रकार एवं मुख्य संपादक
30 अक्टूबर 2026 को 07:30 am बजे2 मिनट पठन0 व्यूज
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हरियाणा बिजली निगम के ALM-SA को हाईकोर्ट से बड़ी राहत: HSSC री-शफलिंग पर रोक, रिलीव कर्मचारी वापस बुलाए जाएंगे
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फोटो: दैनिक रियलिटी विशेष डिजिटल डेस्कdainikreality.in

खबर की मुख्य बातें (Key Highlights)

  • •पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने बिजली निगम के ALM-SA कर्मियों की री-शफलिंग सूची पर तत्काल रोक लगाई।
  • •हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) द्वारा जारी री-शफलिंग प्रक्रिया पर न्यायिक हस्तक्षेप से विराम।
  • •निगम ने स्पष्ट निर्देश जारी किए कि जिन कर्मियों ने स्टे प्राप्त किया है, उन्हें रिलीव न किया जाए।
  • •पहले से रिलीव किए जा चुके सभी संबंधित कर्मचारियों को तुरंत प्रभाव से वापस ड्यूटी पर लेने का आदेश।
  • •यह निर्णय हजारों बिजली कर्मियों के लिए बड़ी राहत और विभाग में स्थिरता लाने वाला माना जा रहा है।

पानीपत: पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने हरियाणा बिजली वितरण निगमों में कार्यरत असिस्टेंट लाइनमैन (ALM) और सब-स्टेशन अटेंडेंट (SSA) के पदों पर हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) द्वारा जारी री-शफलिंग सूची पर रोक लगाकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। इस आदेश के बाद, बिजली निगम ने तत्काल प्रभाव से उन सभी कर्मचारियों को उनकी वर्तमान पोस्टिंग से रिलीव न करने के निर्देश जारी किए हैं, जिन्होंने अदालत से स्थगन आदेश प्राप्त कर लिया है। इसके साथ ही, जिन्हें पहले ही रिलीव किया जा चुका था, उन्हें भी तुरंत अपनी पुरानी ड्यूटी पर वापस बुलाने के आदेश दिए गए हैं, जिससे हजारों कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है।

यह निर्णय हरियाणा के विभिन्न जिलों जैसे पानीपत, करनाल, कुरुक्षेत्र, रोहतक, सोनीपत और गुरुग्राम सहित संपूर्ण जीटी रोड बेल्ट व अन्य क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति और रखरखाव से जुड़े इन महत्वपूर्ण कर्मचारियों के लिए स्थिरता और राहत लेकर आया है। हाईकोर्ट का यह हस्तक्षेप HSSC की पुनर्गठन प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों और कर्मचारियों में व्याप्त अनिश्चितता को संबोधित करता है, जिससे निगम के कामकाज पर पड़ने वाले संभावित नकारात्मक प्रभाव को भी रोका जा सकेगा।

घटना का पूरा विवरण और सिलसिलेवार घटनाक्रम

हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) द्वारा हाल ही में बिजली निगमों में कार्यरत असिस्टेंट लाइनमैन (ALM) और सब-स्टेशन अटेंडेंट (SSA) के पदों पर कर्मचारियों की री-शफलिंग सूची जारी की गई थी। इस सूची के जारी होने के बाद, कई कर्मचारियों ने अपनी बदली गई पोस्टिंग को लेकर असंतोष व्यक्त किया और इसे चुनौती देते हुए पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। कर्मचारियों का तर्क था कि यह री-शफलिंग प्रक्रिया मनमानीपूर्ण है और इससे उन्हें अनावश्यक रूप से दूरदराज के क्षेत्रों में स्थानांतरित किया जा रहा है, जिससे उनके व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

न्यायालय ने इन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए, HSSC की री-शफलिंग सूची पर अंतरिम रोक लगाने का आदेश दिया। इस आदेश के तुरंत बाद, हरियाणा बिजली वितरण निगमों (उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम) ने एक आंतरिक पत्र जारी कर सभी संबंधित अधिकारियों को सूचित किया कि जिन कर्मचारियों ने हाईकोर्ट से स्थगन आदेश प्राप्त कर लिया है, उन्हें उनकी वर्तमान पोस्टिंग से किसी भी सूरत में रिलीव न किया जाए। इसके अतिरिक्त, उन सभी ALM और SSA कर्मचारियों को, जिन्हें इस री-शफलिंग के तहत पहले ही रिलीव किया जा चुका था और उन्होंने नई पोस्टिंग पर ज्वाइन नहीं किया था, उन्हें भी अविलंब उनकी पूर्व की ड्यूटी पर वापस बुलाने के निर्देश दिए गए हैं। यह कदम कर्मचारियों के हितों की रक्षा और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

विवरणजानकारी
न्यायालयपंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय
प्रभावित पदअसिस्टेंट लाइनमैन (ALM), सब-स्टेशन अटेंडेंट (SSA)
संबंधित आयोगहरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (HSSC)
विवाद का विषयHSSC द्वारा जारी री-शफलिंग सूची
न्यायालय का आदेशरी-शफलिंग सूची पर तत्काल रोक
निगम के निर्देशस्टे प्राप्त कर्मियों को रिलीव न करें, रिलीव कर्मियों को वापस बुलाएं
प्राथमिक प्रभावित क्षेत्रसंपूर्ण हरियाणा (विशेषकर जीटी रोड बेल्ट)

अधिकारियों व जांच दल की भूमिका व बयान

इस पूरे मामले में, बिजली निगम के अधिकारियों ने उच्च न्यायालय के आदेश का तुरंत पालन सुनिश्चित किया है। निगम द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि न्यायालय के निर्देशों का अक्षरशः पालन किया जाए ताकि किसी भी कर्मचारी के साथ अन्याय न हो और न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान हो। हालांकि, हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) की ओर से इस मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान अभी तक जारी नहीं किया गया है। आयोग संभवतः इस न्यायिक आदेश का अध्ययन कर रहा है और आगे की कानूनी रणनीति पर विचार करेगा।

यह घटना राज्य की भर्ती और स्थानांतरण नीतियों में न्यायिक समीक्षा के महत्व को दर्शाती है। निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वे न्यायालय के आदेश का सम्मान करते हैं और सभी संबंधित कर्मचारियों को नियमानुसार सूचित कर रहे हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस आदेश से बिजली आपूर्ति या अन्य आवश्यक सेवाओं पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि कार्यबल की स्थिरता बनी रहेगी।

स्थानीय जनजीवन, नागरिकों व व्यवस्था पर प्रभाव

इस न्यायिक आदेश का हरियाणा के स्थानीय जनजीवन और विशेष रूप से बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। असिस्टेंट लाइनमैन और सब-स्टेशन अटेंडेंट बिजली वितरण प्रणाली की रीढ़ होते हैं। उनकी बार-बार होने वाली अस्थिरता या मनमानीपूर्ण स्थानांतरण से न केवल कर्मचारियों का मनोबल गिरता है, बल्कि दूरदराज के क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति और रखरखाव सेवाओं पर भी सीधा असर पड़ सकता है।

इस फैसले से कर्मचारियों में सुरक्षा और स्थिरता की भावना बढ़ी है, जिससे वे अपने कार्य पर बेहतर ढंग से ध्यान केंद्रित कर पाएंगे। यह निर्णय सुनिश्चित करता है कि आवश्यक सेवाओं में लगे कर्मियों को बेवजह की प्रशासनिक उथल-पुथल का सामना न करना पड़े। नागरिकों के लिए इसका अर्थ है कि बिजली आपूर्ति और संबंधित सेवाओं में लगे कर्मचारी अधिक स्थिर और संतुष्ट रहेंगे, जिससे सेवाओं की गुणवत्ता पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। यह कदम हरियाणा में प्रशासनिक न्याय और कर्मचारियों के अधिकारों के संरक्षण की दिशा में एक मिसाल कायम करता है।

आगे की कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई और आगामी कदम

पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा HSSC की री-शफलिंग सूची पर लगाई गई रोक के बाद, अब इस मामले में आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार है। उम्मीद है कि हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) न्यायालय के समक्ष अपना विस्तृत जवाब दाखिल करेगा और स्थगन आदेश को चुनौती देने या अपनी प्रक्रिया की वैधता साबित करने का प्रयास करेगा। वहीं, याचिकाकर्ता कर्मचारी अपने पक्ष में मजबूत दलीलें पेश करते रहेंगे।

बिजली निगम के लिए, यह आदेश एक अंतरिम राहत है, लेकिन अंतिम समाधान न्यायालय के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगा। आगामी सुनवाई में न्यायालय इस मामले के विभिन्न पहलुओं पर विचार करेगा, जिसमें HSSC की री-शफलिंग नीति की वैधता, पारदर्शिता और कर्मचारियों पर इसके प्रभावों का गहन विश्लेषण शामिल होगा। इस दौरान, निगम यह सुनिश्चित करेगा कि न्यायालय के अंतरिम आदेश का पूर्णतः पालन हो और कोई भी कर्मचारी अनावश्यक रूप से प्रभावित न हो। यह मामला हरियाणा में सरकारी नियुक्तियों और स्थानांतरण प्रक्रियाओं में उचित प्रक्रिया और कर्मचारी कल्याण के महत्व को रेखांकित करता रहेगा।

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नीरज अहलावत (Neeraj Ahlawat)

नीरज अहलावत (Neeraj Ahlawat)वरिष्ठ पत्रकार एवं संपादक

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