हरियाणा (दैनिक Reality विशेष ग्राउंड रिपोर्ट): कुरुक्षेत्र: हरियाणा में इस बार बासमती धान की खेती करने वाले किसानों के लिए खरीफ सीजन खुशियों की सौगात लेकर आया है. कई वर्षों बाद मंडियों में बासमती धान के भाव में जबरदस्त तेजी देखने को मिल रही है. प्रीमियम 1121 किस्म के दाम ₹5600 प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं, जबकि 1718 किस्म भी करीब ₹4870 प्रति क्विंटल के भाव पर बिक रही है. अच्छे उत्पादन और शानदार कीमतों ने किसानों की आमदनी बढ़ा दी है. व्यापारियों को उम्मीद है कि दिवाली के बाद बासमती के भाव ₹6000 प्रति क्विंटल का आंकड़ा भी पार कर सकते हैं.19 लाख एकड़ में बासमती की खेती: कृषि विभाग और मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार इस खरीफ सीजन हरियाणा में बासमती धान का सत्यापित रकबा करीब 19 लाख एकड़ यानी लगभग 7.7 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है. यह आंकड़ा प्रदेश में बासमती और सुगंधित धान की खेती के बढ़ते रुझान को दर्शाता है. करनाल, कुरुक्षेत्र, कैथल और आसपास के क्षेत्रों में बड़े स्तर पर बासमती की खेती की जाती है. किसान अब पारंपरिक गैर-बासमती किस्मों के बजाय ऐसी फसलों की ओर बढ़ रहे हैं, जिनसे बेहतर बाजार भाव और अधिक मुनाफा मिलने की संभावना रहती है.आधुनिक बीजों की ओर बढ़े किसान: इस बारे में कुरुक्षेत्र के थानेसर अनाज मंडी के प्रधान राइस मिलर और बासमती निर्यातक सुशील सिंगला ने बताया कि, पहले किसान सीएसआर-30 और एसबीसी-19 जैसी पुरानी किस्मों पर निर्भर रहते थे. इन किस्मों में बीमारियों का प्रकोप अधिक होने और उत्पादन कम रहने के कारण किसानों को परेशानी होती थी. पहले पुरानी किस्मों की मंडियों में काफी आवक होती थी. एक समय इनकी करीब पांच लाख बोरियां मंडी में आती थीं, लेकिन बीमारी और कम उत्पादन के कारण किसानों ने इनकी खेती कम कर दी. अब इन किस्मों की आवक नाममात्र रह गई है. नई किस्मों से बेहतर उत्पादन: सिंगला ने आगे कहा कि, अब किसान बासमती की आधुनिक किस्मों 1121, 1718 और 1509 को अधिक अपना रहे हैं. इन किस्मों में उत्पादन क्षमता बेहतर होने के साथ बाजार में भी अच्छी मांग बनी हुई है. नई किस्मों में रोगों से लड़ने की क्षमता बेहतर है और उत्पादन भी बढ़ा है. जहां पुरानी किस्मों से करीब 10 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन मिलता था, वहीं आधुनिक किस्मों में करीब 30 क्विंटल प्रति एकड़ तक पैदावार हो रही है. 1509 जैसी किस्मों में इससे भी अधिक उत्पादन मिलने की संभावना रहती है. कई साल बाद किसानों को मिल रहा अच्छा रेट: पिछले कुछ वर्षों में बासमती धान के औसत भाव करीब ₹4000 प्रति क्विंटल के आसपास रहने से किसानों को अपेक्षित मुनाफा नहीं मिल पा रहा था. इस बार कीमतों में तेजी ने किसानों को बड़ी राहत दी है. जैसे-1121 किस्म: ₹5000 से ₹5600 प्रति क्विंटल तक1718 किस्म: करीब ₹4870 प्रति क्विंटलदिवाली के बाद अनुमान: ₹6000 प्रति क्विंटल से अधिक एक एकड़ से सवा लाख रुपये तक की कमाई का अनुमान: इस बारे में थानेसर अनाज मंडी के कमीशन एजेंट रणबीर सिंह ने कहा कि, बेहतर उत्पादन और ऊंचे भाव के चलते इस बार बासमती किसानों को अच्छा मुनाफा मिल रहा है. इस बार किसानों को बासमती के शानदार दाम मिल रहे हैं. उत्पादन भी अच्छा हुआ है. अगर बाजार में तेजी इसी तरह बनी रही तो दिवाली के बाद बासमती धान का भाव ₹6000 प्रति क्विंटल से ऊपर जा सकता है. करीब 30 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन और ₹5000 से अधिक के भाव के हिसाब से किसानों की कुल बिक्री एक एकड़ से लगभग ₹1.25 लाख तक पहुंच सकती है. हालांकि, यह कुल बिक्री का अनुमान है. वास्तविक मुनाफा खेती की लागत, मजदूरी, खाद, बीज, सिंचाई और अन्य खर्चों पर निर्भर करेगा. इसके बावजूद इस बार के भाव किसानों के लिए पिछले कई वर्षों की तुलना में बेहतर स्थिति बना रहे हैं. अंतरराष्ट्रीय मांग बढ़ने से मंडियों में आई तेजी: हरियाणा की बासमती अपनी लंबाई, खुशबू और स्वाद के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में खास पहचान रखती है. मध्य पूर्व के देशों में भारतीय बासमती की मजबूत मांग रहती है. सुशील सिंगला ने बताया कि, कुछ समय पहले मध्य पूर्व में तनाव और युद्ध जैसी परिस्थितियों के कारण निर्यातकों को सप्लाई चेन से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ा था. अब हालात में सुधार होने से निर्यातकों को नए ऑर्डर मिलने लगे हैं. अंतरराष्ट्रीय बाजार में बासमती की मांग फिर से बढ़ रही है. निर्यातकों को नए ऑर्डर मिल रहे हैं, जिसका सीधा असर मंडियों में धान के भाव पर दिखाई दे रहा है. ग्लोबल मार्केट में हरियाणा की मजबूत पहचान: राइस मिल एसोसिएशन के राज्य प्रधान और बासमती निर्यातक अमरजीत छाबड़ा के अनुसार, हरियाणा देश के प्रमुख बासमती उत्पादक और निर्यातक राज्यों में शामिल है. वर्ष 2024-25 में भारत से करीब 60.65 लाख मीट्रिक टन बासमती चावल का निर्यात हुआ. इसमें हरियाणा की हिस्सेदारी लगभग 30 से 40 प्रतिशत यानी करीब 18 से 24 लाख मीट्रिक टन बताई गई है. करनाल, कैथल और कुरुक्षेत्र में पैदा होने वाली बासमती अपनी खास सुगंध और गुणवत्ता के लिए जानी जाती है. ईरान, सऊदी अरब, यमन और यूएई जैसे देशों में इसकी अच्छी मांग है. नए निर्यात ऑर्डर मिलने से किसानों और व्यापारियों दोनों को राहत मिली है. बरसात के बावजूद फसल ने दिया अच्छा उत्पादन: इस बार मौसम में उतार-चढ़ाव और बीच में हुई बारिश के कारण किसानों को शुरुआत में फसल खराब होने की चिंता थी. हालांकि, बेहतर उत्पादन और मंडियों में मिल रहे भाव ने किसानों की परेशानी दूर कर दी है. वहीं, थानेसर अनाज मंडी में बासमती लेकर पहुंचे किसान सतनाम सिंह ने बताया कि, शुरुआत में मौसम को लेकर चिंता थी. बारिश के कारण लग रहा था कि फसल को नुकसान हो सकता है, लेकिन पैदावार अच्छी हुई है. अब मंडी में उम्मीद से बेहतर भाव मिल रहे हैं. इस बार दिवाली भी अच्छी रहने की उम्मीद है. किसानों से लेकर व्यापारियों तक बढ़ेगी आर्थिक गतिविधियां: बासमती के बेहतर भाव का असर केवल किसानों की आमदनी तक सीमित नहीं रहेगा. इससे ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन, राइस मिलिंग, खाद-बीज कारोबार और स्थानीय बाजारों में भी आर्थिक गतिविधियां बढ़ने की उम्मीद है. हरियाणा में बासमती का बढ़ता रकबा, आधुनिक किस्मों का इस्तेमाल, बेहतर उत्पादन और अंतरराष्ट्रीय मांग ने इस सीजन को खास बना दिया है. यदि आने वाले दिनों में निर्यात मांग मजबूत बनी रहती है, तो किसानों को और बेहतर भाव मिल सकते हैं.फिलहाल मंडियों में बासमती की चमक किसानों के चेहरों पर खुशी लेकर आई है. दिवाली के बाद भाव ₹6000 प्रति क्विंटल पार जाने की उम्मीदों ने इस उत्साह को और बढ़ा दिया है. पिहोवा में 100 करोड़ रुपये से अधिक के फर्जीवाड़े का आरोप हरियाणा के बासमती किसानों की बल्ले-बल्ले, मंडियों में मिल रहे रिकॉर्ड भाव, एक एकड़ से सवा लाख रुपये तक की कमाई नेपाल हेलिकॉप्टर हादसे में मारे गए चेन्नई के पर्यटक का शव वापस लाने के प्रयास तेज SpaceX-Qualcomm पार्टनरशिप: 5G नेटवर्क के साथ रखी जाएगी एआई-नेटिव 6G की नींव हरियाणा में मौसम बदलने के साथ ही हवा बनी "जहर", 7 शहर देश के टॉप-12 प्रदूषित शहरों में, AQI 300 पार IRGC कुद्स चीफ गनी की अमेरिका को चेतावनी- 'दांव लगाने वाला बर्ताव भारी पड़ेगा'। हरियाणा की मंडियों में किसानों की सुविधा और फसलों की सुचारू खरीद को लेकर व्यापक प्रबंध किए गए हैं।
मंडियों में फसल आवक, खरीद व एमएसपी दरें
मंडियों में फसल की आवक लगातार जारी है और खरीद एजेंसियों द्वारा तय मानकों के अनुसार खरीद की जा रही है। किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य दिलाने के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
| मंडी व कृषि विवरण | वर्तमान स्थिति, दरें व प्रबंध |
|---|---|
| फसल / संदर्भ | हरियाणा के बासमती किसानों की बल्ले-बल्ले, मंडियों में मिल रह |
| प्रमुख मंडियां | हरियाणा की संबंधित अनाज मंडियां |
| खरीद व्यवस्था | न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के तहत सुचारू |
| भुगतान माध्यम | डीबीटी द्वारा सीधा बैंक खाते में |
किसानों के लिए जरूरी दिशा-निर्देश व भुगतान व्यवस्था
किसानों के बैंक खातों में डीबीटी (DBT) के माध्यम से सीधा भुगतान भेजा जा रहा है। खरीद के साथ-साथ मंडियों से फसल के उठान की गति भी तेज रखने के निर्देश दिए गए हैं।
मौसम, खाद-बीज और फसल सुरक्षा के उपाय
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को मौसम के पूर्वानुमान के अनुसार फसलों की देखभाल करने और आगामी बिजाई के लिए प्रमाणित बीजों का ही उपयोग करने की सलाह दी है।
प्रशासनिक प्रबंध और उठान की स्थिति
मार्केट कमेटियों को निर्देश दिए गए हैं कि मंडियों में बारदाने, पेयजल और किसानों के विश्राम की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।





