साइबर सिटी गुरुग्राम के रियल एस्टेट सेक्टर में एक बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। आयकर विभाग की इंटेलिजेंस एंड क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन (I&CI) विंग ने बादशाहपुर तहसील में पिछले पांच वर्षों के दौरान हुए संपत्ति लेनदेन के रिकॉर्ड को अपने कब्जे में लेकर जांच का दायरा बढ़ा दिया है। प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई है कि वर्ष 2020 से 2025 के बीच करीब 23 हजार से अधिक ऐसी रजिस्ट्रियां हुई हैं, जिनका कुल मूल्य 36 हजार करोड़ रुपये से भी अधिक है। विभाग अब इन सौदों में वित्तीय अनियमितताओं और अघोषित आय के निवेश की तलाश कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि गुरुग्राम का बादशाहपुर क्षेत्र प्रॉपर्टी निवेश के लिहाज से बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण है। यहाँ बड़ी संख्या में हाई-वैल्यू ट्रांजेक्शन होते हैं। आयकर विभाग की सात सदस्यीय विशेष टीम वर्तमान में तहसील कार्यालय के दस्तावेजों का मिलान कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि सरकारी नियमों के अनुरूप कितने लेनदेन की आधिकारिक रिपोर्टिंग विभाग को की गई और कितने सौदों को गुप्त रखने का प्रयास किया गया।
जांच का मुख्य आधार और 30 लाख का अनिवार्य नियम
आयकर अधिनियम के तहत यह वैधानिक रूप से अनिवार्य है कि यदि किसी अचल संपत्ति का लेनदेन 30 लाख रुपये या उससे अधिक मूल्य का है, तो संबंधित रजिस्ट्रार या सब-रजिस्ट्रार कार्यालय को इसकी जानकारी आयकर विभाग को देनी होती है। विभाग को संदेह है कि बादशाहपुर तहसील में हुए हजारों सौदों में इस नियम का उल्लंघन किया गया है। टीम अब खरीदार और विक्रेता के पैन (PAN) विवरण, उनके द्वारा दाखिल किए गए आयकर रिटर्न (ITR) और रजिस्ट्री में दर्शाई गई राशि का विश्लेषण कर रही है।
| जांच का मुख्य बिंदु | विवरण व आंकड़े |
|---|---|
| जांच की अवधि | वर्ष 2020 से 2025 तक |
| कुल रजिस्ट्रियों की संख्या | 23,000 से अधिक |
| अनुमानित लेनदेन मूल्य | ₹36,000 करोड़ से ज्यादा |
| जांच टीम की सदस्य संख्या | 07 (विशेषज्ञ अधिकारी) |
| अनिवार्य रिपोर्टिंग सीमा | ₹30 लाख से ऊपर के सौदे |
ब्लैक मनी और अघोषित निवेश पर सर्जिकल स्ट्राइक
इस वृहद जांच का एक मुख्य उद्देश्य रियल एस्टेट में खपाए गए काले धन का पता लगाना है। अक्सर देखा जाता है कि रजिस्ट्री में संपत्ति का मूल्य 'कलेक्टर रेट' या 'सर्किल रेट' पर दिखाया जाता है, जबकि वास्तविक लेनदेन (मार्केट रेट) उससे कहीं अधिक होता है। आयकर विभाग की टीम अब इस 'कैश कंपोनेंट' या ऊपरी लेनदेन की संभावनाओं को भी खंगाल रही है। विभाग उन संपत्तियों की सूची तैयार कर रहा है जहाँ खरीदार की आय के ज्ञात स्रोत और निवेश की गई राशि में बड़ा अंतर नजर आ रहा है।
"आयकर विभाग की यह कार्रवाई नियमित जांच का हिस्सा है जिसके तहत उच्च मूल्य वाले लेनदेन (High Value Transactions) की निगरानी की जाती है। रिकॉर्ड के मिलान के बाद ही स्पष्ट होगा कि कितनी कर चोरी हुई है और किन पक्षों को नोटिस जारी किए जाने हैं।"
स्थानीय रियल एस्टेट बाजार और निवेशकों में हड़कंप
गुरुग्राम के बादशाहपुर, सोहना रोड और गोल्फ कोर्स एक्सटेंशन जैसे इलाकों में इस जांच का सीधा असर देखने को मिल रहा है। कई बड़े बिल्डर्स और प्रॉपर्टी डीलर्स भी विभाग की रडार पर आ सकते हैं। यदि जांच में यह सिद्ध होता है कि जानबूझकर जानकारी छिपाई गई है, तो संबंधित पक्षों पर भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। इसके साथ ही, बेनामी संपत्ति लेनदेन अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
आगामी कार्रवाई और विभागीय कदम
सूत्रों के अनुसार, आयकर विभाग की टीम वर्तमान में डेटा माइनिंग और डिजिटल रिकॉर्ड्स के विश्लेषण के चरण में है। एक बार जब 23 हजार रजिस्ट्रियों के डेटा का मिलान विभाग के पास मौजूद 'एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट' (AIS) से हो जाएगा, तो उन लोगों को नोटिस जारी किए जाएंगे जिनके लेनदेन में विसंगतियां पाई जाएंगी। आने वाले हफ्तों में कई बड़े निवेशकों और जमीन के मालिकों को अपनी आय का स्रोत स्पष्ट करने के लिए समन भेजे जा सकते हैं। इस कार्रवाई से गुरुग्राम के प्रॉपर्टी बाजार में पारदर्शिता आने की उम्मीद है, लेकिन फिलहाल निवेशकों के बीच अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।





