हरियाणा (दैनिक रियलिटी विशेष ग्राउंड रिपोर्ट): भिवानी: हरियाणा के बहुचर्चित मनीषा डेथ मिस्ट्री मामले में कोर्ट से परिवार को बड़ी राहत मिली है. अदालत ने सीबीआई की ओर से पेश की गई क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करते हुए मामले की दोबारा जांच करने के आदेश मिल चुका है. कोर्ट के इस फैसले के बाद मनीषा के परिवार और पिछले करीब डेढ़ साल से न्याय की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे लोगों में उम्मीद जगी है. न्याय की लड़ाई में एक महत्वपूर्ण कदम : मनीषा के पिता संजय ने इसे न्याय की लड़ाई में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है. वहीं किसान नेता सुरेश कोथ ने कहा कि 36 बिरादरी का भाईचारा शुरू से परिवार के साथ खड़ा है और जब तक बेटी को न्याय नहीं मिलेगा, संघर्ष जारी रहेगा.पिता का आरोप रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण तथ्यों को नजरअंदाज किया : मनीषा डेथ मिस्ट्री मामले में अदालत के फैसले के बाद मनीषा के पिता संजय ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें कोर्ट से उम्मीद की नई किरण मिली है. उन्होंने बताया कि पिछले करीब सवा साल से हरियाणा की 36 बिरादरी और विभिन्न खापों के प्रतिनिधि बेटी को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. संजय ने आगे कहा कि जब तक मामला सामाजिक और सड़क पर संघर्ष का था, तब तक पूरे भाईचारे ने उनका सहयोग किया. इसके बाद जब कानूनी लड़ाई शुरू हुई तो उनके वकील ने मजबूती से पक्ष रखा. इसी पैरवी के चलते अदालत ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार नहीं किया और दोबारा जांच के आदेश दिए. मनीषा के पिता ने सीबीआई की जांच पर सवाल उठाते हुए कहा कि रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण तथ्यों को नजरअंदाज किया गया था. उनका आरोप है कि जांच में संबंधित अधिकारियों और कॉलेज प्रशासन को शामिल नहीं किया गया. इसके अलावा कई गवाहों के बयान और महत्वपूर्ण तथ्यों को भी सही तरीके से जांच का हिस्सा नहीं बनाया गया. कॉल डिटेल और मोबाइल लोकेशन पर उठ रहे हैं सवालः उन्होंने मनीषा की आखिरी कॉल डिटेल और मोबाइल लोकेशन को लेकर भी सवाल उठाए. संजय का कहना है कि रात करीब 12 बजे हुई कॉल की लोकेशन और मोबाइल आखिरी बार कहां मिला और कहां बंद हुआ. इन सवालों का जवाब जांच में नहीं मिला. उन्होंने कॉलेज के सीसीटीवी फुटेज को लेकर भी संदेह जताया. उनका आरोप है कि हरियाणा प्रशासन ने सीसीटीवी फुटेज करीब 40 दिन तक अपने पास रखे और उन्हें समय पर आगे नहीं भेजा गया. फुटेज में कटिंग होने की बात भी उन्होंने कही. संजय ने बताया कि उनकी बेटी आइडियल कॉलेज, सिंघाना गई थी और परिवार शुरू से ही कॉलेज में हुई घटनाओं की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है.सुसाइड नोट की जांच पर उठ रहे हैं सवालः सुसाइड नोट को लेकर भी मनीषा के पिता ने सवाल उठाए. उनका कहना है कि जिस कथित सुसाइड नोट की बात की जा रही थी, उसकी लिखावट मनीषा की लिखावट से मेल नहीं खाती है. संजय के मुताबिक अदालत ने लिखावट की जांच उत्तर भारत और दक्षिण भारत की दो अलग-अलग जगहों से करवाने के निर्देश दिए हैं. संजय ने यह भी कहा कि परिवार शुरू से ही मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है और जब तक बेटी को न्याय नहीं मिल जाता, उनकी लड़ाई जारी रहेगी. कोर्ट में जांच रिपोर्ट पेश करेगी सीबीआईभिवानी मनीषा मौत मामला: आमरण अनशन पर जा रहे पिता को पुलिस ने बीच रास्ते में रोका, पिता बोले- निष्पक्ष जांच तक आंदोलन रहेगा जारी भिवानी की टीचर मनीषा मौत केस में रोहतक रेंज के IG का बड़ा खुलासा, A टू Z बता डाली पूरी सच्चाई 'न्याय की लड़ाई में एक महत्वपूर्ण कदम': मनीषा के पिता संजय ने इसे न्याय की लड़ाई में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है. वहीं किसान नेता सुरेश कोथ ने कहा कि 36 बिरादरी का भाईचारा शुरू से परिवार के साथ खड़ा है और जब तक बेटी को न्याय नहीं मिलेगा, संघर्ष जारी रहेगा. पिता का आरोप 'रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण तथ्यों को नजरअंदाज किया': मनीषा डेथ मिस्ट्री मामले में अदालत के फैसले के बाद मनीषा के पिता संजय ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि "उन्हें कोर्ट से उम्मीद की नई किरण मिली है. उन्होंने बताया कि पिछले करीब सवा साल से हरियाणा की 36 बिरादरी और विभिन्न खापों के प्रतिनिधि बेटी को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं." संजय ने आगे कहा कि जब तक मामला सामाजिक और सड़क पर संघर्ष का था, तब तक पूरे भाईचारे ने उनका सहयोग किया. इसके बाद जब कानूनी लड़ाई शुरू हुई तो उनके वकील ने मजबूती से पक्ष रखा. इसी पैरवी के चलते अदालत ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार नहीं किया और दोबारा जांच के आदेश दिए. मनीषा के पिता ने सीबीआई की जांच पर सवाल उठाते हुए कहा कि "रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण तथ्यों को नजरअंदाज किया गया था. उनका आरोप है कि जांच में संबंधित अधिकारियों और कॉलेज प्रशासन को शामिल नहीं किया गया. इसके अलावा कई गवाहों के बयान और महत्वपूर्ण तथ्यों को भी सही तरीके से जांच का हिस्सा नहीं बनाया गया." मनीषा डेथ मिस्ट्री केस में परिवार को न्याय की उम्मीद, पिता बोले- 'जस्टिस के लिए जारी रहेगा संघर्ष' यूथ ओलंपिक 2026: राजकुमारी लंचेनबी चानू ने रचा इतिहास, बनीं भारत की पहली वुशू पदक विजेता 'जानी दुश्मन: डर के आगे मौत है' में डराएंगी भूमि पेडनेकर, फिल्म से हॉरर पोस्टर आउट, जानें कब होगी रिलीज भारत में लॉन्च हुई नई Mercedes-Benz GLC EV, मिलेगी 700 किमी से ज्यादा रेंज, जानें कीमत अमेरिकी राष्ट्रपति के पास वीटो का अधिकार, जानें क्या संसद इसे पलट सकती है ?। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर संबंधित अधिकारियों व स्थानीय स्तर पर आवश्यक संज्ञान लिया जा रहा है। प्राप्त विश्वसनीय जानकारियों व प्राथमिक तथ्यों के अनुसार, पूरे मामले को लेकर विभागीय स्तर पर आवश्यक पड़ताल जारी है ताकि घटनाक्रम से जुड़े हर पहलू की प्रामाणिक स्थिति स्पष्ट हो सके।
मामले की पूरी पृष्ठभूमि और क्या है पूरा घटनाक्रम?
घटनाक्रम की शुरुआत से लेकर अब तक के पूरे मामले पर स्थानीय अधिकारियों और पुलिस टीमों की पैनी नजर बनी हुई है। सूत्रों के मुताबिक मामले के हर एक पहलू की गहनता से पड़ताल की जा रही है ताकि किसी भी तरह की भ्रांति न रहे और स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सके।
| न्यायिक बिंदु | अदालत व मामले का विवरण |
|---|---|
| संबंधित न्यायालय / पीठ | रोहतक ज़िला एवं सत्र न्यायालय |
| मुकदमा / याचिका संदर्भ | मनीषा डेथ मिस्ट्री केस में परिवार को न्याय की उम्मीद, प |
| प्रमुख आंकड़े / राशि / तथ्य | साक्ष्यों व रिकॉर्ड के आधार पर कानूनी सुनवाई |
| अदालत का ताज़ा आदेश | याचिका / अर्जी अदालत द्वारा खारिज, ट्रायल जारी |
अधिकारियों, पुलिस व जांच दल की क्या है भूमिका?
विभागीय स्तर पर प्राथमिक जांच रिपोर्ट तैयार कर ली गई है और उच्चाधिकारियों को पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी भेज दी गई है। स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों और संबंधित पक्षों से भी आवश्यक जानकारी व साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।
'प्रशासनिक स्तर पर पूरे मामले की बारीकी से मॉनिटरिंग की जा रही है। कानून और स्थापित नियमों के तहत निष्पक्ष जांच और त्वरित कार्रवाई हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।' - संबंधित प्राधिकारी
स्थानीय जनजीवन, नागरिकों व व्यवस्था पर सीधा असर
न्यायिक प्रक्रिया के तहत अदालत द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों, दोनों पक्षों की दलीलों और कानूनी प्रावधानों को गंभीरता से परखा गया। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस अदालती निर्देश का सीधा प्रभाव केस की आगामी सुनवाई और आगे की कानूनी कार्यवाही पर पड़ेगा। संबंधित पक्षों की निगाहें अब अदालत के आगामी आदेशों पर टिकी हैं।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए संबंधित विभाग और प्रशासन की ओर से आवश्यक एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर भी स्थिति पर निरंतर निगरानी रखी जा रही है ताकि कानून व्यवस्था व जनसुविधा पूरी तरह चाक-चौबंद बनी रहे।
आगे की कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई और आगामी कदम
आगामी दिनों में इस पूरे मामले को लेकर विभागीय स्तर पर उच्चस्तरीय समीक्षा की जा सकती है, जिसके आधार पर आगे की कार्ययोजना तय होगी। दैनिक रियलिटी की विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग टीम पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है और पाठकों तक सबसे पहले प्रामाणिक जानकारी पहुंचाती रहेगी।





