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डॉ. विनीता हत्याकांड-हाईकोर्ट से सबूतों के अभाव में नौकरानी बरी: कॉल से लुटेरे बुलाने का आरोप, सिम किसी और का निकला; 4 की फांसी सजा में बदली - Kurukshetra News

कुरुक्षेत्र की चर्चित लेडी डॉक्टर डॉ. विनीता अरोड़ा हत्याकांड में करीब 45 महीने जेल में रहने के बाद उनकी पूर्व नौकरानी पूनम को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट।

नीरज अहलावत
वरिष्ठ पत्रकार एवं मुख्य संपादक
30 अक्टूबर 2026 को 05:02 am बजे2 मिनट पठन0 व्यूज
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डॉ. विनीता हत्याकांड-हाईकोर्ट से सबूतों के अभाव में नौकरानी बरी:  कॉल से लुटेरे बुलाने का आरोप, सिम किसी और का निकला; 4 की फांसी सजा में बदली - Kurukshetra News
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फोटो: दैनिक रियलिटी विशेष डिजिटल डेस्कdainikreality.in

खबर की मुख्य बातें (Key Highlights)

  • •कुरुक्षेत्र की चर्चित लेडी डॉक्टर डॉ. विनीता अरोड़ा हत्याकांड में करीब 45 महीने जेल म...
  • •प्रशासनिक व संबंधित विभाग ने मामले पर लिया त्वरित संज्ञान, जांच जारी।
  • •कुरुक्षेत्र सहित प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति पर रखी जा रही है निरंतर नजर।
  • •विस्तृत तथ्यों व अग्रिम अपडेट्स के लिए दैनिक रियलिटी से जुड़े रहें।

हरियाणा (दैनिक रियलिटी विशेष ग्राउंड रिपोर्ट): कुरुक्षेत्र की चर्चित लेडी डॉक्टर डॉ. विनीता अरोड़ा हत्याकांड में करीब 45 महीने जेल में रहने के बाद उनकी पूर्व नौकरानी पूनम को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने बरी कर दिया है।। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर संबंधित अधिकारियों व स्थानीय स्तर पर आवश्यक संज्ञान लिया जा रहा है। प्राप्त विश्वसनीय जानकारियों व प्राथमिक तथ्यों के अनुसार, पूरे मामले को लेकर विभागीय स्तर पर आवश्यक पड़ताल जारी है ताकि घटनाक्रम से जुड़े हर पहलू की प्रामाणिक स्थिति स्पष्ट हो सके।

मामले की पूरी पृष्ठभूमि और क्या है पूरा घटनाक्रम?

साथ ही डकैती की धारा हटाकर लूट की धाराओं में सजा तय की।। हाईकोर्ट ने पूनम के खिलाफ सबूतों को नाकाफी मानते हुए उसकी सजा रद्द कर दी।। कोर्ट ने कहा कि पूनम का आरोपियों से संपर्क या घर में गहने-कैश रखने की जानकारी होना उसे साजिश में शामिल साबित नहीं करता।। विनाती के पति डॉ. अतुल ने कहा था कि इन गहनों की जानकारी लुटेरों को पूनम ने ही दी थी।।

न्यायिक बिंदुअदालत व मामले का विवरण
संबंधित न्यायालय / पीठकुरुक्षेत्र ज़िला एवं सत्र न्यायालय
मुकदमा / याचिका संदर्भडॉ. विनीता हत्याकांड-हाईकोर्ट से सबूतों के अभाव में नौक
प्रमुख आंकड़े / राशि / तथ्य30 साल, 9 जनवरी
अदालत का ताज़ा आदेशसंबंधित विभाग व प्रशासन द्वारा निगरानी जारी

अधिकारियों, पुलिस व जांच दल की क्या है भूमिका?

पुलिस ने नौकरानी द्वारा लुटेरों को कॉल करने की थ्योरी बनाई थी, जिस नंबर से कॉल की वो पूनम का बताया गया था।। कोर्ट में पूनम के जीजा ने कहा कि वे नंबर उसका है, पूनम का नहीं।। कोर्ट में ये थ्योरी भी साबित नहीं हो सकी।। इससे पहले ट्रायल कोर्ट ने पूनम समेत पांच आरोपियों को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई थी।। बता दें कि 9 जनवरी की रात लूट के दौरान आरोपियों ने डॉ. पूनम की हत्या कर दी थी।।

'प्रशासनिक स्तर पर पूरे मामले की बारीकी से मॉनिटरिंग की जा रही है। कानून और स्थापित नियमों के तहत निष्पक्ष जांच और त्वरित कार्रवाई हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।' - संबंधित प्राधिकारी

स्थानीय जनजीवन, नागरिकों व व्यवस्था पर सीधा असर

न्यायिक प्रक्रिया के तहत अदालत द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों, दोनों पक्षों की दलीलों और कानूनी प्रावधानों को गंभीरता से परखा गया। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस अदालती निर्देश का सीधा प्रभाव केस की आगामी सुनवाई और आगे की कानूनी कार्यवाही पर पड़ेगा। संबंधित पक्षों की निगाहें अब अदालत के आगामी आदेशों पर टिकी हैं।

पहले सिलसिलेवार समझिए, कैस हुई थी हत्या:- अब पढ़िए, हाईकोर्ट से कैसे बरी हुई पूनम पूनम पर घर की जानकारी देने का था आरोप पूनम डॉ. अतुल अरोड़ा के घर में नौकरानी का काम करती थी।। अतुल ने पुलिस को दी शिकायत में शक जताया था कि पूनम को घर में नकदी और गहने रखने की जगह की जानकारी थी।। उन्होंने बताया था कि विक्रम उर्फ विक्की पहले पूनम को लेने अस्पताल आया करता था।। पुलिस ने पूनम और विक्की के बीच संपर्क को साजिश से जोड़कर देखा।। पुलिस का दावा था कि पूनम ने विक्की को घर की जानकारी दी थी।। एक मोबाइल नंबर की कॉल डिटेल के आधार पर भी पुलिस ने उसे दूसरे आरोपियों से जोड़ने की कोशिश की थी।। मोबाइल नंबर पूनम का होना साबित नहीं हुआ हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान सामने आया कि पुलिस जिस मोबाइल नंबर को पूनम का बता रही थी, वह पूनम के जीजा जसबीर सिंह के नाम पर था।। जसबीर ने कोर्ट में कहा कि उसने सिम पूनम को नहीं दिया था।। पुलिस यह साबित नहीं कर सकी कि संबंधित मोबाइल नंबर का इस्तेमाल पूनम करती थी।। कॉल डिटेल से भी वारदात के आसपास पूनम और दूसरे आरोपियों के बीच संपर्क साबित नहीं हुआ।। जान-पहचान और घर की जानकारी साजिश का सबूत नहीं हाईकोर्ट ने कहा कि विक्रम से जान-पहचान होना या घर में नकदी और गहने रखने की जगह पता होना किसी को साजिश में शामिल साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है।। पूनम के खुलासे के आधार पर भी पुलिस को ऐसी कोई बरामदगी नहीं मिली, जो उसे वारदात से जोड़ती।। कोर्ट ने माना कि पूनम के खिलाफ आरोप साबित करने के लिए पुख्ता सबूत नहीं हैं।। इसी आधार पर ट्रायल कोर्ट का फैसला रद्द करते हुए उसे बरी कर दिया गया।। This website follows the DNPA Code of Ethics.।

आगे की कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई और आगामी कदम

आगामी दिनों में इस पूरे मामले को लेकर विभागीय स्तर पर उच्चस्तरीय समीक्षा की जा सकती है, जिसके आधार पर आगे की कार्ययोजना तय होगी। दैनिक रियलिटी की विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग टीम पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है और पाठकों तक सबसे पहले प्रामाणिक जानकारी पहुंचाती रहेगी।

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नीरज अहलावत (Neeraj Ahlawat)

नीरज अहलावत (Neeraj Ahlawat)वरिष्ठ पत्रकार एवं संपादक

DainikReality.in | पानीपत, हरियाणा | 10+ वर्षों का डिजिटल पत्रकारिता अनुभव

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नीरज अहलावत हिंदी पत्रकारिता और डिजिटल समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और पाठकों तक उपयोगी जानकारी पहुंचाने को प्राथमिकता देते हैं। DainikReality.in पर उनका फोकस हरियाणा की खबरों, समसामयिक घटनाओं, सरकारी योजनाओं और रोजगार पर तथ्यपरक विश्लेषण प्रस्तुत करना है।

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