चंडीगढ़: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा लगाए गए 'वोटों की चोरी' के आरोपों पर कड़ा पलटवार किया है। चंडीगढ़ में मीडिया से बातचीत करते हुए सीएम सैनी ने राहुल गांधी के दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि 'SIR' देश में कोई नई प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह कांग्रेस के शासनकाल में भी कई बार अपनाई गई थी। उन्होंने राहुल गांधी से यह भी पूछा कि 1984 के सिख-विरोधी दंगों और 1975 में आपातकाल के दौरान उनकी 'मोहब्बत की दुकान' कहाँ थी, जब देश के लोग गंभीर संकट का सामना कर रहे थे।
मुख्यमंत्री सैनी ने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 'SIR' प्रक्रिया पहली बार हो रही होगी, लेकिन कांग्रेस सरकारों ने अपने कार्यकाल में इसे अनगिनत बार अंजाम दिया है। उन्होंने राहुल गांधी के इस आरोप को बेबुनियाद बताया कि मौजूदा प्रक्रिया 'वोटों की चोरी' है, जबकि कांग्रेस के समय में ऐसी ही प्रक्रिया को वैध और आवश्यक माना जाता था। यह राजनीतिक बयानबाजी ऐसे समय में आई है, जब देश में चुनावी माहौल गरमाया हुआ है और मतदाता सूची की पारदर्शिता पर बहस तेज हो गई है।
संवैधानिक प्रावधान और चुनाव आयोग का अधिकार
सीएम सैनी ने अपने बयान में संविधान के अनुच्छेद 324 और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 21 का हवाला दिया, जो चुनाव आयोग को मतदाता सूची में संशोधन करने का अधिकार देते हैं। उन्होंने बताया कि चुनाव आयोग समय-समय पर यह प्रक्रिया पूरी करता रहता है ताकि मतदाता सूची को अपडेट रखा जा सके और उसकी शुद्धता सुनिश्चित की जा सके। सैनी ने आजादी के बाद से हुए व्यापक मतदाता सूची संशोधनों का एक लंबा इतिहास प्रस्तुत किया, जिसमें 1952, 1956, 1957, 1961, 1966, 1983, 1984, 1987, 1989, 1992, 1993, 1995, 2002, 2003 और 2004 जैसे वर्ष शामिल हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये सभी बड़े संशोधन कांग्रेस के शासनकाल में हुए थे।
मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी के इस दावे पर भी सवाल उठाया, जिसमें वे मंच पर कुछ आंकड़े दिखाते हुए कहते हैं कि किसी खास घर में इतने सारे वोट हैं। सैनी ने कहा कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल के दौरान, चुनाव आयोग ने मतदाता सूची से डुप्लिकेट और फर्जी प्रविष्टियों को हटाने का काम किया है। यह कदम चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है कि कोई भी अयोग्य वोट न गिना जाए और कोई भी योग्य मतदाता छूट न जाए। उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस के सत्ता में रहने के दौरान यही प्रक्रिया वैध मानी जाती थी, तो आज यह 'वोटों की चोरी' कैसे हो गई, राहुल गांधी को इसका स्पष्टीकरण देना चाहिए।
| मतदाता सूची संशोधन वर्ष | संबंधित सरकार का कार्यकाल | प्रक्रिया का उद्देश्य |
|---|---|---|
| 1952, 1956, 1957, 1961, 1966 | कांग्रेस | मतदाता सूची को अद्यतन करना |
| 1983, 1984, 1987, 1989 | कांग्रेस | व्यापक संशोधन और शुद्धिकरण |
| 1992, 1993, 1995 | कांग्रेस | त्रुटियां दूर करना, नए मतदाताओं को जोड़ना |
| 2002, 2003, 2004 | कांग्रेस | नियमित अद्यतन और डुप्लीकेट हटाना |
| वर्तमान | भाजपा (नरेंद्र मोदी सरकार) | पारदर्शिता, डुप्लीकेट/फर्जी प्रविष्टियां हटाना |
ऐतिहासिक घटनाक्रम और 'मोहब्बत की दुकान' पर सवाल
नायब सिंह सैनी ने राहुल गांधी के 'मोहब्बत की दुकान' के नारे पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने पूछा कि जब 1984 के सिख-विरोधी दंगों से प्रभावित परिवार पीड़ा में थे, तब यह 'मोहब्बत की दुकान' कहाँ थी? उन्होंने कहा कि उस समय भी पीड़ितों के लिए यह दुकान खोली जानी चाहिए थी। सैनी ने 1975 में इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल का भी जिक्र किया, जब लोग डर के साये में जीने को मजबूर थे, जेलों में बंद थे और अपने घरों को वापस नहीं लौट पा रहे थे। उन्होंने सवाल किया कि उस भयावह समय में 'मोहब्बत की दुकान' क्यों नहीं खोली गई थी? मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी को इतिहास के इन महत्वपूर्ण पन्नों को भी स्वीकार करने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस को केवल वर्तमान पर टिप्पणी करने के बजाय अपने शासनकाल की ऐतिहासिक घटनाओं पर भी विचार करना चाहिए। सैनी ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में हो रही मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया, जिसका उद्देश्य चुनावी प्रणाली को मजबूत और निष्पक्ष बनाना है, उसे बेवजह राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। उन्होंने कांग्रेस पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि जब वे सत्ता में थे, तब ऐसी प्रक्रियाओं को सही ठहराते थे, लेकिन अब विपक्ष में आने पर उन पर सवाल उठा रहे हैं।
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा, "'SIR' कोई नई प्रक्रिया नहीं है। कांग्रेस के शासनकाल में यह प्रक्रिया कितनी बार अपनाई गई थी? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह पहली बार हो रहा है, लेकिन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में यह कितनी बार हुआ था? मैं राहुल गांधी से पूछना चाहता हूं कि 1984 के सिख-विरोधी दंगों और 1975 की इमरजेंसी के वक्त उनकी 'मोहब्बत की दुकान' कहाँ थी?"
जन कल्याणकारी योजनाएं और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का भविष्य
सीएम सैनी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चल रही जन कल्याणकारी योजनाओं की भी सराहना की। उन्होंने बताया कि कैसे मोदी सरकार ने गरीबों को 5 लाख रुपये तक के इलाज की सुविधा (आयुष्मान भारत) प्रदान की है, जिससे वे सम्मान के साथ अपना इलाज करा सकते हैं। उन्होंने उन माताओं को घर दिए हैं, जिनका सपना था कि उनके सिर पर अपनी छत हो, और उज्ज्वला योजना के तहत एलपीजी सिलेंडर देकर उन महिलाओं के आंसू पोंछे हैं जो खाना बनाते समय धुएं से परेशान रहती थीं। इसके अतिरिक्त, उन्होंने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में शौचालय बनवाकर महिलाओं को सम्मान के साथ शौच जाने की सुविधा प्रदान की है, जिसके लिए उन्हें पहले सूर्यास्त तक का इंतजार करना पड़ता था।
यह राजनीतिक टकराव दर्शाता है कि आगामी चुनावों में मतदाता सूची की विश्वसनीयता और ऐतिहासिक घटनाओं की व्याख्या एक महत्वपूर्ण मुद्दा बनी रहेगी। दोनों प्रमुख दल एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप के माध्यम से जनता के बीच अपनी-अपनी बात रखने का प्रयास कर रहे हैं। चुनाव आयोग अपनी संवैधानिक भूमिका का निर्वहन करते हुए मतदाता सूची को त्रुटिहीन बनाने की दिशा में काम कर रहा है, जबकि राजनीतिक दल इन प्रक्रियाओं को अपने चुनावी लाभ के लिए भुनाने की कोशिश में हैं। इस बहस का सीधा असर आम मतदाताओं की जागरूकता और चुनावी प्रक्रिया में उनके विश्वास पर पड़ेगा।





