शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026
विज्ञापन • ADVERTISEMENT
गुरुग्रामब्रेकिंग

बिजली निजीकरण पर आर-पार के मूड में ऊर्जा मंत्री अनिल विज, बोले- आखिरी छोर तक लड़ेंगे कानूनी लड़ाई

हरियाणा के ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण के निजीकरण का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि विनियामक आयोग के फैसले के खिलाफ अपील करेंगे।

नीरज अहलावत
वरिष्ठ पत्रकार एवं मुख्य संपादक
21 अक्टूबर 2026 को 09:18 am बजे2 मिनट पठन0 व्यूज
शेयर करें:
बिजली निजीकरण पर आर-पार के मूड में ऊर्जा मंत्री अनिल विज, बोले- आखिरी छोर तक लड़ेंगे कानूनी लड़ाई
दैनिकरियलिटी
गुरुग्राम
दैनिक रियलिटी विशेष कवरेज
dainikreality.in
फोटो: दैनिक रियलिटी विशेष डिजिटल डेस्कdainikreality.in

खबर की मुख्य बातें (Key Highlights)

  • •ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण के निजीकरण का किया कड़ा विरोध।
  • •विनियामक आयोग के निर्णय के खिलाफ उच्च स्तर पर अपील करने की दी दो टूक चेतावनी।
  • •कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए विभागीय अधिकारियों और नेताओं को बुलाई उच्चस्तरीय बैठक।
  • •विपक्ष द्वारा एसआईआर (SIR) और मतदाता सूची संशोधन पर उठाए गए सवालों पर दिया तीखा जवाब।

हरियाणा की राजनीति में बिजली वितरण के निजीकरण का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। प्रदेश के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने स्पष्ट शब्दों में घोषणा की है कि वे किसी भी सूरत में बिजली क्षेत्र के निजीकरण के पक्ष में नहीं हैं और इसके खिलाफ हर मुमकिन कानूनी व प्रशासनिक लड़ाई लड़ी जाएगी। हाल ही में गुरुग्राम और नूंह जिलों में बिजली वितरण व्यवस्था को एक निजी कंपनी को सौंपने के फैसले के बाद से कर्मचारियों और शासन के बीच सरगर्मी बढ़ गई है। मंत्री विज ने दो टूक कहा कि विभाग ने विनियामक आयोग के समक्ष इस प्रस्ताव का पूरी दृढ़ता से विरोध किया था और अब आयोग के फैसले के खिलाफ वे उच्च कानूनी मंचों का दरवाजा खटखटाएंगे।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। ऊर्जा मंत्री ने कर्मचारियों के असंतोष को शांत करने और उनकी चिंताओं का व्यावहारिक समाधान खोजने के लिए दोपहर बाद अपने कार्यालय में प्रमुख कर्मचारी नेताओं को विशेष चर्चा के लिए आमंत्रित किया है। विज का यह रुख स्पष्ट करता है कि सरकार और कर्मचारियों के बीच संवाद के दरवाजे खुले हैं, लेकिन निजीकरण के मोर्चे पर उनका कड़ा रुख नीतिगत फैसलों में नया मोड़ ला सकता है। विपक्षी दलों द्वारा इस मामले में उठाए जा रहे सवालों और राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था पर हो रही बहसों के बीच मंत्री का यह बयान नीतिगत स्पष्टता को रेखांकित करता है।

मुद्दा / प्रकरणसंबंधित विभाग / क्षेत्रमंत्री अनिल विज का रुख / कार्रवाई
बिजली वितरण निजीकरणगुरुग्राम और नूंह ज़िलाविनियामक आयोग के निर्णय के खिलाफ अपील, आखिरी छोर तक विरोध
कर्मचारी संवाद बैठकऊर्जा विभाग, हरियाणाकर्मचारी नेताओं के साथ समाधान के लिए विशेष उच्चस्तरीय बैठक
मतदाता सूची संशोधन (SIR)चुनाव आयोग प्रक्रियाविपक्ष के आरोपों को नकारा, कहा- यह चुनाव आयोग का संवैधानिक दायित्व है

दूसरी ओर, राजनीतिक बयानबाजी के इस दौर में मंत्री अनिल विज ने विपक्षी दलों द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठाए जा रहे सवालों पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने दो टूक कहा कि मतदाता सूचियों को तैयार करना और उनमें संशोधन करना पूरी तरह से चुनाव आयोग का स्वतंत्र अधिकार और दायित्व है, न कि किसी राजनीतिक दल का। विज ने विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जो लोग खुद अपने प्रशासनिक कार्यकाल में पारदर्शी व्यवस्था नहीं दे पाए, वे आज संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर अंगुली उठा रहे हैं। कानून के प्रावधानों के तहत हर वर्ष या नियत समय पर सूची संशोधन की प्रक्रिया चलती है, जिसमें नाम जुड़वाने और कटवाने का पूरा कानूनी अवसर आम नागरिकों को मिलता है।

"विनियामक आयोग ने फैसला दे दिया है और उसकी आगे हम अपील करेंगे, हम आखिरी सिरे तक पूरी तरह से जाएंगे। कर्मचारियों के साथ पहले भी बैठक की थी, अब यदि कोई बेहतर समाधान होगा तो उसे जरूर माना जाएगा।" - अनिल विज, ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री, हरियाणा

प्रशासनिक और जनजीवन पर पड़ने वाला व्यापक प्रभाव

बिजली वितरण व्यवस्था में निजी कंपनियों के प्रवेश और उसके खिलाफ राजनीतिक नेतृत्व के मुखर विरोध का सीधा असर राज्य के बिजली उपभोक्ताओं और ऊर्जा निगमों के कर्मचारियों पर पड़ रहा है। गुरुग्राम और नूंह जैसे आर्थिक रूप से बेहद संवेदनशील और तेजी से विकसित हो रहे शहरी-ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली नेटवर्क के प्रबंधन को लेकर चल रही यह खींचतान आने वाले दिनों में नीतिगत बदलावों की दिशा तय करेगी। कर्मचारियों का एक बड़ा वर्ग इस निजीकरण के विरोध में आंदोलित है, ऐसे में ऊर्जा मंत्री का उनके पक्ष में खड़े होना कर्मचारियों के बीच एक बड़ा संदेश दे रहा है।

प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि यदि ऊर्जा विभाग विनियामक आयोग के फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत या न्यायाधिकरण में अपील करता है, तो यह देश भर के बिजली क्षेत्र के सुधारों और निजीकरण की नीतियों के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी दृष्टांत (Precedent) बन सकता है। आम नागरिकों के दृष्टिकोण से, बिजली सेवाओं की गुणवत्ता, टैरिफ दरों और उपभोक्ता अधिकारों का मुद्दा हमेशा से सर्वोपरि रहा है। सरकार और विभाग के बीच इस कानूनी और वैचारिक टकराव का अंत किस रूप में होता है, इस पर पूरे हरियाणा के लाखों बिजली उपभोक्ताओं की पैनी नजर टिकी हुई है।

प्रायोजित • SPONSORED
इस खबर को अपने दोस्तों व ग्रुप्स में शेयर करें:
व्हाट्सएप
नीरज अहलावत (Neeraj Ahlawat)

नीरज अहलावत (Neeraj Ahlawat)वरिष्ठ पत्रकार एवं संपादक

DainikReality.in | पानीपत, हरियाणा | 10+ वर्षों का डिजिटल पत्रकारिता अनुभव

लेखक प्रोफाइल व सभी खबरें →

नीरज अहलावत हिंदी पत्रकारिता और डिजिटल समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और पाठकों तक उपयोगी जानकारी पहुंचाने को प्राथमिकता देते हैं। DainikReality.in पर उनका फोकस हरियाणा की खबरों, समसामयिक घटनाओं, सरकारी योजनाओं और रोजगार पर तथ्यपरक विश्लेषण प्रस्तुत करना है।

संपादकीय प्राथमिकता:निष्पक्ष खबरेंतथ्यपरक जानकारीसरल हिंदीपाठकों का विश्वास
बिजली निजीकरण पर आर-पार के मूड में ऊर्जा मंत्री अनिल विज, बोले- आखिरी छोर तक लड़ेंगे कानूनी लड़ाई | दैनिक रियलिटी